निकले हैं वो मेरी शख्सियत तराशने,
जिनके खुद के किरदार मरम्मत मांग रहे है।
आप सारे फूलों को कुचल सकते हो
मगर बसंत का आना नहीं रोक सकते!
अरे नफरत नहीं थी मुझे इश्क़ से, हम भी कभी मुरीद थे उसके,
जब देखा उसे गैर कि बाहों में तब जाना सिर्फ मरीज़ थे उसके..!!
नत हूं मैं सबके समक्ष, बार-बार मैं विनीत स्वरऋण - स्वीकारी हूं - विनत हूंमैं मरूंगा सुखीमैंने जीवन की धज्जियां उड़ाई हैं।
~ अज्ञेय
खता मत गिन इश्क़ में,किसने क्या गुनाह किया
इश्क़ एक नशा था, तूने भी किया और मैंने भी किया !!
कभी उसे भी तो खले ना मिलना हमारा ,सिर्फ मैं ही क्यों रोयु ,याद करू और गिड़गिड़ाऊं ।।
परेशानी यह नहीं की दिन बुरे चल रहें, मसला ये है कि दिन भी जवानी के हैं ..!!
पवर पहचान बना सकती है
सम्मान चाहिए तो कर्म करो।
ये सोचना ग़लत है के’ तुम पर नज़र नहीं,मसरूफ़ हम बहुत हैं, मगर बे-ख़बर नहीं
हम आपके इशारे पे घर-बार छोड़ दें ?दीवाने हैं ज़रूर ! मगर इस क़दर नहीं !!
~ आलोक श्रीवास्तव
दो ही लोग तो जिंदगी में याद रहते है
एक हाथ मिलने वाला दुसरा साथ छोड़ने वाला..
कबीरा तेरे जगत की है कैसी ये तकदीर
जनता सारी सड़कों पर, बैठे महल फ़कीर
🍁हैलो सुनते ही उसने कट कर दिया मेरा फ़ोन,ख़ुदा का शुक्र है, आवाज़ तो पहचानता है वो…
चल ग़ालिब कहीं और चलते हैंयहां हर नागिन के पीछे दो नाग बैठे हैं
बारिश में भीग मन बावलाधीरे-धीरे पट हृदय के खोल रहाआंखों से चूम तन बावलामृग कस्तुरी बन स्वच्छंद दौड़ रहा
तुम्हारा "तुम" कह कर रोज़ झगड़ना,
तुम्हारा "आप" कह कर बिछड़ने से अच्छा था...!!
मरहम लगता है उसके ज़ख्मों पर,
वो हर भवसागर से तर जाती है,
जब बेटे कि पहली तनख्वाह से,
मां के सपनों कि साड़ी आती है..!!
बर्फ़ से रिश्तों का मौसम गुनगुना हो जाएगा
मिल के आपस में रहें तो ख़ुशनुमा हो जाएगा
बीच की दीवार पहले तुम गिराओ तो सही
देखना आँगन वही फिर दो-गुना हो जाएगा
राघवेंद्र द्विवेदी
सियासत को लहू पीने की लत है ,
वरना हमारे मुल्क में सब खैरियत है ।।
उठते हुए तूफ़ान का मंज़र नहीं देखा
देखो मुझे गर तुम ने समुंदर नहीं देखा
अच्छे निर्णय लेना अनुभव से आता है,
और अनुभव बुरे निर्णय लेने से आता है।