मैं खुद की तस्वीरें अब नहीं खींचताकारण बचपन की यादे रुलाती है...
इस रात के पैरों में किसने ज़हर ए खंजर बांधें है
रोज आशिकों की रूह पर नया निशान बनाती है
हम वहाँ हैं जहाँ से हम को भी
कुछ हमारी ख़बर नहीं आती
अश्लीलता क्या हैं,नजरिया या कपड़े.?
मैंने अपनी ज़िंदगी के सारे,महंगें सबक सस्ते लोगों से सीखे हैं….
आह जो दिल से निकाली जाएगीक्या समझते हो कि खाली जाएगी
~अकबर इलाहाबादी
जिंदा आदमियों के अंदर,कई बार मारे हुए लोग भी रहते हैं….
अहंकार करने पर इंसान की प्रतिष्ठा,
वंश,वैभव, तीनों ही समाप्त हो जाते हैं॥
मिलकर सबसे रहो,
दबकर किसी से नही।।
'विद्या' सबसे अनमोल ‘धन’ है,
इसके आने मात्र से ही सिर्फ अपना ही नहीं,
अपितु पूरे समाज का कल्याण होता है।
- ईश्वर चंद्र विद्यासागर
बहुत आसान नहीं थानज़दीकियों का फ़ासलामीलों तय किया हैअपनों को अपना समझते समझते!
चिंतनहीन निर्णय और निर्णयहीन चिंतन कभी भी कारगर नहीं होते...
दिल चाहता हैं कि फिर अजनबी बनकर देखेतुम तमन्ना बन जाओ हम उम्मीद बनकर देखे
सबको मेरे बाद रखियेगा.. आप सिर्फ़ मेरे हैं,याद रखियेगा…
हम खुद को बेच भी देते तो कम पड़ता, उसके खुशियों की कीमत इतनी ज्यादा थी
जज्बात में बहुत ताकत है ,
निर्माण की भी और विध्वंस की भी।
दिलों के ताले की चाबी
लफ्ज़ में नहीं लहजे में होती है !
तुम हाथ थाम लेते होमैं चल पड़ती हूँ
तुम नज़र भर देखते होमैं मुस्कुरा देती हूँ
तुम क़रीब आ जाते होमैं शरमा जाती हूँ
तुम आग़ोश में भरते होमैं सिमट जाती हूँ
तुम माथे को चूम लेते होमैं समर्पित हो जाती हूँ
हम अपनी जान के दुश्मन को अपनी जान कहते है,मोहब्बत की इसी मिट्टी को हिन्दुस्तान कहते हैं,
जो ये दीवार का सुराख है साज़िश है लोगों की,मगर हम इसको अपने घर का रोशनदान कहते हैं !
तू ज़ाहिर है लफ़्ज़ों में मेरे
मैं गुमनाम हूँ खामोशियों में तेरी…