उम्मीदों के जंजाल में उलझे हुए हैं,अपनी ही आंखों में खोए हुए हैं…
आज फिर समय, मुकद्दर मेरी खुशियों से जीत गया है,
मेरी ज़िन्दगी का एक और साल तेरे बिना बीत गया है..!!
तुम्हारी आवाज वो संगीत है, जिसे ताउम्र सुना जा सकता हैं…!!
तुम्हारे साथ बिताए हुए वो कुछ लम्हें दोस्त ...
उम्र भर की मेरी आवारगी पे भारी हैं...
ऐसा नहीं के हम बुरे हैं बोहत
इक प्यारी सी नज़र, की है बस कमी
हर आदम की अपनी-अपनी किस्मत है।
हर किस्मत का अपना - अपना रोना है।।
दुश्मन सामने था मगर प्यासा था… मैने तलवार रख दी...पानी पिलाया और जंग जीत लिया
रोज़ नया दिन निकलता है पर सूरज तो वही हैएक चक्कर घूम के दुबारा आपके पास आता हैऔर नया हो जाता है
वैसे ही ये ज़िंदगी है जब आप चाहें उसे नया बना देअच्छाईयों के प्रकाश से इसको नई रौशनी देपुराने...
लहज़े में उद्दंडता, खून में उबाल,जुबां पर ज़हर, अक्ल कम थी,आयी जब ज़िम्मेदारी तोमुंहपर झूठी मुस्कान और आंखे नम थी
गुलाब देना आसान होता है,
मगर समय देना मुश्किल....
बस एक ख्वाहिश है की एक ऐसी डेट हो...जिसमे ☕चाय के साथ तुमसे भेट हो....
पलकों से रास्ते के कांटे हटा देंगेफूल तो क्या हम अपना दिल बिछा देंगेटूटने न देंगे हम इस प्यार को कभीबदले में हम खुद को मिटा देंगे 🌶
क्या इक स्त्री और पुरुष के आपसी मजबूत संबंधो मापदंड मूल स्तम्भ सिर्फ सम्भोग है,,,?क्या देह से देह का घर्षण ही उनका आख़री पड़ाव है,,,?
केवल स्वयं को ढूंढना है,बाकी सब Google पर है..!! ❤️
नही लिखूँगी खत में, अपने तन्हाई के किस्से ,,
क्योंकि कुछ शिकायते, गले लगकर की जाती है।
सेजल
धीरे धीरे सब छोड़ जाते है,,
ये तो बस गुजरता एक साल है।।
जो डरा ही नहीं मुझे खोने से
वो क्या अफसोस करेगा??
मेरे ना होने से...
बाज के हौसले में फर्क है,
वरना उड़ान कौवे भी भरते हैं।
बहुत ज़्यादा फ़र्क पड़ने के बाद..
फ़िर कुछ ख़ास फ़र्क नहीं पड़ता..!!
खुद लड़नी पड़ती है जिंदगी की लडाई.. लोग साथ कम और ज्ञान ज्यादा देते है..!!