आज कल हर इंसान के पास ई मेल है,
मगर इंसान का इंसान से कोई मेल नहीं है...
मैं दोस्ती का हर एक बढता हाथ चुमता हूं
बस एक शर्त है , बंदा नमक हराम ना हो
वो सूफ़ी का क़ौल हो या पंडित का ज्ञानजितनी बीते आप पर उतना ही सच मान।
अगर आप मोहब्बत में बेवक़ूफ़ नहीं हो सकते , तो आप मोहब्बत नहीं कर सकते...
पैसे की कीमत अपने बाप से जाकर पूछो जिसने सारी जिंदगी तुम्हारें लिए अपना सुख चैन छोड़ दिया
काश ये सिर्फ शायरी ना होकर हकीकत हो जाती,
जी भरकर देख लेता तुझे अश्कों की बरसात हो जाती..!!
विरक्ति
जिसके लिए टूटो वह तुम्हें कभी संँभालने नहीं आता
मायूस भी नहीं है वो और खुश भी नहीं है, क्या बात है जो दिल को मजधार में ले आई.. रफ़्ता रफ़्ता खत्म हुए हम जो तेरे इश्क़ में अफसोस है कि मौत क्यों इक बार में न आई.. तुझे...
प्रेमपाप यदि हैइस धरा पर पवित्र फिर क्या होगाजल नहीं थल नहींवायु नहीं गगन नहीं अग्न नहीं
फिर बोलों तुमक्या शिव हृदय पत्थर होगानहीं नहींहोगा करुणा भरा ईश्वरतभी तोशुद्ध हृदय प्रतिबिम्ब उसका प्रेम होगा।
राजेश गौरी
ना छेड़ क़िस्सा -ऐ- उल्फ़त का ,
बड़ी लंबी कहानी है ,
मैं ग़ैरों से नहीं हारा किसी अपने की मेहरबानी है !
वर्तमान में
स्त्री का एक हिस्सा ,
उसके बहोत से हिस्सो पर
भारी पड़ रहा है ।
मकानों को घर मे तब्दील करने वाली स्त्रियांकरती हैं अनगिनत सब कुछ हर बारअपने आत्मसमान को दांव पर लगाकरफिर भी पाती है तिरस्कार अक्सर उन्हीं अपनों से जिनके लिए वह सबकुछ करती है
बेहिसाब झूठ कहा तो खुदा मान बैठे,
जरा सा सच बोल दिया बुरा मान बैठे!
किसी जगह पर पहुँचने के लिए,
किसी जगह से निकलना भी पड़ता हैं...
जब मुसीबत सर पर भारी हो,
तब सारे दांव फंस जाते हैं,
और जिनको समझते हैं हम घनिष्ठ,
अक्सर वही डंस जाते हैं..!!
जुल्म इतना बुरा नहीं जितनी बुरी तुम्हारी ख़ामोशी है !जुल्म के खिलाफ बोलना सीखो !!वरना तुम्हारी पीढ़ियां गूंगी हो जाएंगी !!
यह लड़ाई साझी थी...मुल्क से मुहब्बत साझी थीनफ़रत से लड़ाई साझी थी कभी-कभी जो होती थीवो हताशा साझी थी झीख...खीज...अनबनहंसी-बैठकीसब साझी थी और साझी रहेगी तुम्हारा हिस्साअब तुम्हारी यादें देंगी तुम्हारी यादेंसब में साझी रहेंगी
हर समस्या का समाधान होता है…तो अब इस समस्या का समाधान क्या है ?
धीरे-धीरे
हर चीज बेवकूफ लगेगी...
जन्म, प्रेम, जिंदगी
और
आखिरी बेवकूफ़ी मृत्यु।
सुसिल ग़ाफ़िल