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World's Best Cow Hospital

पुरानी और नई पीढ़ी की सोच का अंतराल हीआज में "पिता" और "बेटे" के बीच की दूरी है

खामोश रहना हमें वहीं सिखाते है जिनसे हम बात करना चाहते हैं ..!!

जिनके पास लक्ष्य नहीं होता, उनका मन उन्हें फालतू कामों और तनाव में उलझा कर रखता है।

अगर इस ज़िंदगी को दोबारा पाने का मौक़ा मिलेगा तो उस मौक़े को गवाँ देंगे हम .. ये भी क्या जिंदगी हैं ? हर छोटी छोटी ख्वाहिश को तरसे है हम ..

तुम छा गए हो कोहरे की तरह मेरे चारों तरफ ना कोई दूसरा दिखता है ना देखने की चाहत हैं..!!

तुम किताबों के सामने झुक जाओ , ये तुम्हारे सामने दुनिया झुका देगी ..!! डॉ. भीमराव आंबेडकर

ये संवाली रंगत सादा हुलिया उदास आंखें हम से जो कोई दिल लगाए तो क्यों लगाए!!

रूद्र हुँ,महाकाल हुँ,मृत्यु रूप विकराल हुँ,नित्य हुँ, निरंतर हुँ, शांति रूप मे शंकर हुँ, शांति का श्रृंगार हुँ,मै क्रोध का अंगार हुँ, घनघोर अंधेरा ओढ़ के मै जन जीवन से दूर हुँ,शमशान मे नाचता मै मृत्यु का गरूर हुँ, शाम दाम तुम रखोंमै...

शुरू-शुरू में सब यही चाहते हैंकि सब कुछ शुरू से शुरू होलेकिन अंत तक पहुँचते-पहुँचते हिम्मत हार जाते हैंहमें कोई दिलचस्पी नहीं रहतीकि वह सब कैसे समाप्त होता हैजो इतनी धूमधाम से शुरू हुआ थाहमारे चाहने पर। ~ कुँवर नारायण

मैं बिल्कुल शीशे जैसा हु जो जितना मेरा है मैं उसका उतना हु.

अपने संघर्ष को अपना जुनून बना लो.. जब तक वो तुम्हारी कहानी ना लिख दे..!!

किसी की निंदा करने से, यह पता चलता हैं की , आपका चरित्र कैसा हैं न कि उस व्यक्ति का आचरण ...

आसमान जितना नीला है, सुराजमुखी जितना पिला है, पानी जितना गिला है, लगता है स्क्रू उतना ही ढीला है. . .

अब कोई आए चला जाए मैं ख़ुश रहता हूँ अब किसी शख़्स की आदत नहीं होती मुझ को

बढ़ रहा है ज़िंदगी का कैनवस हर दिन मगर रंग गहरा अब नहीं दिखता किसी तस्वीर में राघवेंद्र द्विवेदी

घर कैसा भी हो, मां के बिना अधूरा ही लगता है...

किस तरह जमा कीजिए अब अपने आप को, काग़ज़ बिखर रहे हैं पुरानी किताब के

अक्सर, पिताओं के गुज़र जाने के बाद ही हम उनसे प्यार करना सुरु करते हैं.

सहयोग मुश्किल से मिलता है, और सालाह आसानी से.!!


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