"कुछ लोग पाँवों से नहींदिमाग़ से चलते हैंये लोगजूते तलाशते हैंअपने दिमाग़ के नाप के।"
नरेश सक्सेना
ऐसी बाँणी बोलिये, मन का आपा खोइ।
अपना तन सीतल करै, औरन कौं सुख होइ॥
जीवन में कुछ छोड़ देने के बाद हीसब कुछ मिलता हैं..!!
बादलों की ओट से सूरज निकलने वाला है
सफ़र जारी रखो वक्त बदलने वाला है!
रात इकाई नींद दहाई
ख़्वाब सैकड़ा दर्द हज़ार!
हमेशा मन में रखता है बोला नही जाता
जिसे पाया ही ना हो,उसे खोया नहीं जाता..!!
कुछ हादसे ऐसे हैं जो करीब है दिल के
कुछ खुशियों के दाग को,धोया नहीं जाता..!!
ज्यादा मुस्कुराने का सबब है बस इतना सा है
रोना चाहो भी अगर,तो...
ना दशहरा ना होली ना दिवाली होता हैं,
बेरोज़गारो का त्योहार नौकरी होता हैं...
हिसाब भरी ज़िन्दगी को बेहिसाब जिया जाए ,
महीना सावन का आ गया है महादेव से इश्क किया जाए ..!!
मैं ढूंढती हूं खुद में...खुद को ही,शायद मैं वो नहीं जो हुआ करती थी..!!
किसी पीर से पूछो ना किसी फ़क़ीर से पूछो, तुम अपने बारे में सिर्फ अपने ज़मीर से पूछो....!!
किस तरह जमा कीजिए अब अपने आप को, काग़ज़ बिखर रहे हैं पुरानी किताब के
हुक़ूमत से सिफारिश की तमन्ना हम नही ऱखते..!!!हमे मालूम है हमारी हिफाज़त कौन करता है??
एक सपने के टूटकर चकनाचूर हो जाने के बाद,,
दूसरा सपना देखने के हौसले को
"ज़िंदगी" कहते हैं..!!
न कर यूं बेवक्त बारिश हे भगवान
किसान के चेहरे की खुशी खेतों में पड़ी है।
रोज़ इतने लोग मरते हैं,पता नहीं,मैं क्यों बच जाता हूं..!!
पता नहीं नसीब खराब है या मैं खराब हूं
हर उसने दिल दुखाया हैं जिसपे मुझे नाज था !!
फासला इसलिए रखा मैंनेक्योंकि तुम करीब थे हर किसी के…..!!
उदासी में कुछ पल जन्नत में जिओगे क्या,चाय बना रहा हूं अदरक वाली पिओगे क्या ?
यदि आपके पास कोई समस्या आती है
तो उसका समाधान खोजें
उससे दूर नहीं भागे !