सब्र कोई कमजोरी नही होती है,ये वो ताकत होती है जो सब में नहीं होती !
फॉर्मल कपड़ा अच्छा लगता है,रिश्ते नहीं।
शब्द सरिता बहती रहे, कलम अनवरत चलती रहे, बस यही आशीर्वाद मिलता रहे ! !
फकीरों की सोहबत में बैठा कीजिए साहब!!
बादशाही का अंदाज खुद ब खुद आ जाएगा...
पानी से पानी मिले, मिले कीच से कीच।
ज्ञानी से ज्ञानी मिले, मिले नीच से नीच।
किस सफर में जिंदगी बदल जाए कोई मालूम नहीं ,,
आज क्या है कल क्या हो जाए कोई मालूम नहीं..!!
ख़्वाहिशे ही तो हैं
मन के भीतर
कितनी मासूमियत से पनपती हैं
उचक उचक कर
शिशु की भाँति लगाती हैं पुकार
पूर्णता को पाने के लिये पैर पटकती हैं
चाहत होती है के सब पा लें
सहज़ ही
मगर कहाँ इतना सहज़ है
इनकी ही तरह सहज़...
रातों को जागो, दिनों को निचोड़ो
सपने होंगे पूरे, देखना न छोड़ो
ना दशहरा ना होली ना दिवाली होता हैं,
बेरोज़गारो का त्योहार नौकरी होता हैं...
लहू में घरौंदा कर के
अहसास बैठे थे
नस नस से उभर कर
वो आज
तूलिका के द्वार से
फलक पर उतर रहे हैं
लोग ये समझ रहे हैं
मैं तेरी #तस्वीर बना रहा हूं
हकीकत में तो मैं
तूलिका की आंखों से
तुझे देख रहा हूं....
मैं कहां #तस्वीर...
मिलती नही है सादगी,
मुुश्किल बड़ा ये काम,
मिल जाये जब ये सादगी,
मिलते नही है दाम
जिस काम से आपका घर चलता हो,उस काम को करने से कभी शर्म मत करो।
वो ख़्वाब रात काचाय साँझ कीबारिश की बूंदें रूमानीवही समां पुरानाधड़कनों से बतियानाबदला नहीं है कुछ भीवही मिज़ाज़ आशिकानाचलो निभाते हैं हम तुमवही पुराना याराना लेकर चुस्कियाँ चाय कीकरेंगे गुफ्तगू शायराना
शहर की मोहब्बत ही ठीक है
गांव मैं पकड़े गए तो बहोत मारते है..
तेरी मर्जी से ढल जाऊं हर बार ये मुमकिन तो नहीं,,मेरा भी अपना वजूद है मैं कोई आइना तो नहीं...!!
दोस्त कठिन है यहाँ किसी को भी
अपनी पीड़ा समझाना
दर्द उठे तो, सूने पथ पर
पाँव बढ़ाना, चलते जाना
सर्वेश्वर दयाल सक्सेना
अच्छा होने से पहले बहुत कुछ बेकार होता है
जिंदगी एक खेल है और ये आप पर निर्भर करता है , खिलाड़ी बनना है या खिलौना......!!
मासिक वेतन पूरनमासी का चाँद है जो एक दिन दिखाई देता है और घटते घटते लुप्त हो जाता है।
मुंशी प्रेमचंद
यही खशियत है जिंदगी की
कर्ज वो भी चुकाने पड़ते है जो लिए ही नही