समय विश्वास और सम्मान यह ऐसे पक्षी है,जो उड़ जाए तो फिर वापस नहीं आते…!
नफरत का बाज़ार ना बन, फूल खिला तलवार ना बन,रिश्ता रिश्ता लिख मंज़िल, रस्ता बन दीवार ना बन- राहत इंदौरी
इंसानों का सताया हुआ हूँ साहबसो इंसानों पर रहम नहीं करूंगा
अज़ीज़ इतना ही रक्खो कि जी सँभल जाएअब इस क़दर भी न चाहो कि दम निकल जाए
कोई बुतखाने में जाता है
कोई मयखाने में जाता है
सबको खुदा की तलाश है
जहां उम्मीद हो वहीं जाता है
इतना बारूद मत रखो अपने अंदर,
एक चिंगारी से खाक हो जाओगे...
हम अपनी जान के दुश्मन को अपनी जान कहते है,मोहब्बत की इसी मिट्टी को हिन्दुस्तान कहते हैं,
जो ये दीवार का सुराख है साज़िश है लोगों की,मगर हम इसको अपने घर का रोशनदान कहते हैं !
पुरुष कोई भी दुःख सहन कर सकता है,परंतु उसके घर का क्लेश….
उसकी आत्मा को निचोड़ कर रख देता है…!!
आज फिर ग्रह मिले है, आज फिर कायनात ने संदेश भेजा है ,आज फिर उसकी याद आईं है, आज फिर गलतियों पर रोना आया है ,आज फिर …..।।
अगर दूसरों की मदद करते समय दिल में,खुशी हो तो वही सेवा है बाकी सब दिखावा है…
अब Library में बैठा मेरा मन ,
प्रेम से ज्यादा सरकारी नौकरी चाहता है !
हर ख्वाहिश,
हर ख्वाब,
हर अरमान,,
पूरे कहाँ होते हैं ??
जो हमारे लिए ज़रूरी हैं....
हम उनके लिए ज़रूरी कहाँ होते है ??..
पहले परखते हैं किरदार फिर ऐतबार करते हैं,
हम उनमें से हैं जो सिर्फ सीरत से प्यार करते हैं..!!
सुकून चाहतें हो तो, कुछ बातें, कुछ यादें,कुछ सवाल, कुछ ख्याल दिल से आजाद कर दो...
मेरी बेचैनियों का तुम यूँ हिसाब रखना,
कि हर हिचकी पर तुम एक गुलाब रखना।
जीत के सौ बाप होते हैं और हार अनाथ होती है।
मोहब्बत कमज़ोर दिलों का काम नहीं !!!
रूहें कांप जाती हैं जब यार जुदा होता है !!
तुम जब आओगी तो खोया हुआ पाओगी मुझेमेरी तन्हाई में ख़्वाबों के सिवा कुछ भी नहींमेरे कमरे को सजाने की तमन्ना है तुम्हेंमेरे कमरे में किताबों के सिवा कुछ भी नहीं
इन किताबों ने बड़ा ज़ुल्म किया है मुझ परइन में...
टूटकर भी जो मुस्कुरा दे,
उसे कोई कैसे हरा दे…
ये चेहरे का गुस्सा महज एक बहाना है,
मेरी दुनिया मासूमियत का खजाना है!
मैं तो मुसाफ़िर हूँ, आया हूँ सैर करने यहाँ,
नफ़रत भरी दुनिया में न कोई घर बसाना है ¡!