मतलब के बिना कौन पूछता है किसी कोबगैर रुह के तो घर वाले भी नहीं रखते
भरोसें के काबिल नहीं है ये जिंदगी..!!
शिकायत हो या मोहब्बत,अभी कर लो..!!
जाना किधर है आप को ये देख लीजिए
मंज़िल किसी भी सम्त हो आसान तो नहीं
सभ्यता का युग तब आएगा
जब औरत की मर्ज़ी के बिना
कोई औरत को हाथ नहीं लगायेगा।
ऐ खुदा लोग बनाने थे पत्थर के अगर,तो मेरे एहसास को शीशे सा न बनाया होता।
इस अंजुमन में हर शख्स मुझसे खफा है,क्योंकि मेरे लबों पर वही है जो मेरे मन में है!
तूने जो ना कहा मैं वो सुनती रही ख़ामख़ाह, बेवजह ख़्वाब बुनती रही जाने किसकी हमें लग गई है नज़र इस शहर में ना अपना ठिकाना रहा दूर चाहत से मैं अपनी चलती रही ख़ामख़ाह, बेवजह ख़्वाब बुनती रही ....
हों रहें हैं हादसे रोज़
मर रहा हैं इंसान
कमाल की बात ये हैं
सांसे फिर भी चल रही हैं..!!
लोग कहते है मैं बहुत गुरूर करता हूं, मैं तो बस दो चेहरे वाले लोगों को खुद से दूर करता हूं
जो अपने लक्ष्य के प्रति वफादार होते हैं, मंजिल सिर्फ उन्हीं के कदम चूमती है....
हम महानता के सबसे करीब तब आते हैं जब हम विनम्रता में महान होते हैं।
रबीन्द्रनाथ टैगोर
पुष्प की सुगंध वायु के विपरीत कभी नहीं जाती,
लेकिन मानव के सदगुण की महक सब ओर फैल जाती है।
गौतम बुद्ध
उठ मन्दिर के दरवाजे से,
जोर लगा खेतों में अपने;
नेता नहीं, भुजा करती है,
सत्य सदा जीवन के सपने।
जंजीर बढ़ा कर साध मुझे,
हाँ, हाँ दुर्योधन! बांध मुझे।
रामधारी सिंह दिनकर
तुम मुझे भूल भी जाओ तो ये हक़ है तुमकोमेरी बात और है मैंने तो मुहब्बत की है
~साहिर लुधियानवी
मैं जो कहता था बदलूंगा नहीं कभी खुद कोइन दिनों मैं उस पुराने लड़के को ढूंढ रहा हूॅं !!
8 अरब वाली दुनिया में, एक तुमसे ही तो इश्क़ है ..!!
राम तुम्हारे युग का रावन अच्छा था...
दस के दस चेहरे सब बाहर रखता था...
प्रताप सोमवंशी
रोज़ रोज़ ये मुलाक़ात इत्तफाक तो नहीं
मेरी तरह हुजूर धड़कने बेईमान तो नहीं
प्यार जब भीख बन जाए,और भीख देने वाला उसे अपनी जायदाद समझे __ तो पीछे हटने में कोई बुराई नहीं है