हमारे बिन अधूरी रहेगी कहानी तुम्हारी, तुम्हारी कहानी का पूर्ण विराम हूं "मैं.
कितने हसीन नाज़नीन मिले तुम नहीं मिलेकुछ आप जैसे भी मिले पर तुम नहीं मिलेबारिश फिज़ा तुम्हारी पसंदीदा चाय भीमिलने के आसार तो लगे फिर भी तुम न मिले..
दर्द से मेरा दामन भरदे या अल्लाह...
मेरी दोस्त ने अभी कहा - ये जो लड़कियां होती है ना, इनसे आप थोड़ा दूर रहा करिए!….इनके पास रोने के सिवा कुछ नहीं होता.
मैं "हिंदी" का "आलिंगन" हूँवो "उर्दू" में "आग़ोश"उसको मेरे "बाजुओं" में सुकूँन है,मैं उसकी "बाहों" में मदहोश…
सुलझी सी कविताएँ लिखते हैं, ख़ुद में ही उलझे से लोग..!
महंगे होटल में भी भुख मिटती नहीं ,मां तेरी वो हाथों की रोटियां बिकती नहीं ..!!
जो भीड़ से अलग हो,,
ज़रूरी नहीं वो हमेशा गलत हो,,
कीर्ति चन्द्रा
बलात्कार को 'पाशविक' कहा जाता है,
पर यह पशु की तौहीन है,
पशु बलात्कार नहीं करते,
सुअर तक नहीं करता, मगर आदमी करता है।
हरिशंकर परसाई
ख़ुद को ख़ुद से आज़ाद किया, जा, तुझको हमने माफ़ किया !
नियम के बिना और अभिमान के साथ
किया गया तप व्यर्थ ही होता है।
वेदव्यास
भिन्न मत का मान रखो, गलत का नहीं
नजर आना सभी को एक जैसा है कहा मुमकिन,
कहीं आँखों में कंकर तो कहीं आँखों के तारे हैं हम!!
खुद मे झाकने के लिए ज़िगरा चाहिए,,,दुसरो की शीनाखत् मे हर शख्स माहिर है,,,
शादी उसकी भी होगी, और मेरी भी होगी,लेकिन "हमारी" होती तो क्या बात थी.
शक अपने ही हुनर पर भी करते हैइस तरह से बहुत कुछ हम सिखते है
तुम्हें छूकर मैंने जाना
किसी रेलगाड़ी के गुजरने पर
धरती कांपती क्यों है।
तुम्हें चूमकर मैंने जाना
छूइमूई के पौधे का रहस्य।
तुम्हारे आलिंगन से मैंने जाना
चन्द्रमा पर प्रथम मनुष्य होने का एहसास।
तुमसे प्रेम करके मैंने जाना
मछुआरे और मछली के बीच...
तलवारों की छाए पर इतिहास हमारा बनता है ,,
जिस ओर ज़वानी चलती है उस और ज़माना चलता है..!!
फासला इसलिए रखा मैंनेक्योंकि तुम करीब थे हर किसी के…..!!
लिखें वही जिसके नीचे अपने हस्ताक्षर कर सकें …..
सोचे वही जो बेहिचक बोल सकें …..
और बोलें वही जिसका जवाब सुन सकें !!!