इतनी शिद्दत से पाला कि वफादार हो गया
आहिस्ता आहिस्ता जख्म भी यार हो गया।
होठों पर जरूरत से ज्यादा बिखरी हंसी,अक्सर गवाह होती है आंखों में पसरी हुई उदासी की....
कोई दुःख
मनुष्य के साहस से बड़ा नहीं,
हारा वही जो लड़ा नहीं।
कुँवर नारायण
ऐ जिंदगी जा ढुंढ कोई खो गया मुझसे ,
अगर वो न मिले तो तु भी लौट के मत आना ..!!
ये मत समझ की तेरे काबिल नहीं हम, तड़प रहे हैं वो जिसे हासिल नहीं हम...!
जो ठीक लगे वो ही देना प्रभू,
हमारा क्या है हम तो कुछ भी मांग लेते हैं...
यदि मंज़िल न मिले तो रास्ते बदलो,
क्योंकि वृक्ष अपनी पत्तियाँ बदलते हैं जड़े नहीं...
कभी-कभी शब्दों को पढ़ते व शब्दों को गढ़ने से क़िताब तो पूर्ण हो जाती है,किंतु कहानी अधूरी ही रह जाती है।।
खुद में ढूंढता हूं दुनिया भर की खुशी ,
दुनिया में ढूंढना महंगा सौदा होगा यही..!!
न्यूज़ देख रहा था
ना मुझे इजराइल से बैर है
ना फलीस्तीन से मोहब्बत
दोनो तरफ से मरने वालों की
संख्या बताई जा रही थी
जिसमे औरते मर्द मासूम थे
टूटते घर थे
कुछ लाशें थी
कहीं आग लगी थी
कहीं रुदन था...
धड़की थी जो आपको देखकर,
याद है मुझे अब भी वो...
पहली धड़कन...💕
क्या तुम्हे याद है...?
महल मेरा रेत का बनवाते हो
और पता बारिश को देते हो....!!
ख़ुशियों के झोंके सा है वोजिसे भी छूकर गुजर जाता हैज़हन में उसके मुस्कुराहटें भर जाता है
-मधुलिका
सुनो कभी तुम नाराज हूए तो हम झुक जाएंगे,कभी हम नाराज हो तो आप गले लगा देना..!
दया अगर लिखने बैठूं होते हैं अनुवादित रामरावण को भी नमन किया ऐसे थे मर्यादित राम
~अज़हर इक़बाल
शेरो शायरी कोई खेल नहीं जनाब ।।जल जाती है जवनियाँ लफ्जो की आग में ।।
दुःख रूप बदलता हैलेकिन खत्म नहीं होता
इश्क बेहद किया है हमने..इसलिए बस हदें ना लांघ सके..🍁
संस्कारों में बस इतने बने रहना,कि कोई परवरिश तक ना पहुंचे…
सुनसान रास्तों पर भी , ज़िंदगी ख़ुशगवार लगती है ,,जब मौजूद हो कुछ भटके हुए साये , लाजवाब बेशुमार लगती है ,,भीड़ थी आसपास बहुत कि उलझनें और उलझ गई ,, इसलिए ...छोड़ दिया सब कुछ ,, अब ना कोई...