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वेदना छिपाकर अपनी मैं गीत खुशियों के गुनगुना रहा हूं, समझ ना ले कोई मुर्दा इसलिए असल किरदार छिपा रहा हूं..!! विरक्ति

गरीब की थाली में पुलाव आ गया हैलगता है शहर में चुनाव आ गया...

अक़्ल कहती है दोबारा आज़माना जहल है, दिल ये कहता है फ़रेब-ए-दोस्त खाते जाइए..!!

सभी दुखों की जड़ लगाव है !

ये एक बात समझने में रात हो गई है मैं उस से जीत गया हूँ कि मात हो गई है तहज़ीब हाफ़ी

पहले कैशलेस इंडिया फिर जॉबलेस इंडियाअब आपके सामने पेश है ब्रेनलेस इंडिया

वही फिर मुझे याद आने लगे हैंजिन्हें भूलने में ज़माने लगे है

तन्हाई में बस ये एहसास होता है, दूसरा कोई नहीं हमारे पास होता है।

आप बस किरदार हैं अपनी हदें पहचानिएवरना फिर एक दिन कहानी से निकाले जाएंगे

रखने की बस ये तीन ही चीज़ें हैं इन दिनों, हिम्मत रखो यक़ीन रखो और फ़ासला रखो।

चालाकियों से कुछ देर ही मोहित किया जा सकता है , दिल जीतने के लिए सरल और सहज होना ज़रूरी है ...

इतना बारूद मत रखो अपने अंदर, एक चिंगारी से खाक हो जाओगे...

अगर आँसुओ की किम्मत होती। तो कल रात का तकिया अरबों का होता।।

ऐ बारिश जरा थम के बरस जब मेरा यार आ जायें तो जम के बरस🌧️ पहले ना बरस कि वो आ ना सके फिर इतना बरस की वो जा ना सके 🌧️ मुसाफिर

उसे खोना… मतलब खुद को खोना….इसलिए मैं उसे पाकर… मैं आबाद होना चाहती हूं…

मजलूमों के हक़ के लिए लड़ने का जज़्बा और बुलंद हो, यह साल आपके संघर्षों को और पैना करे ! मुल्क में अमन लाए, बदलाव लाए !

किसी को अधूरा पाने से बेहतर है,उसे मुकम्मल खो दिया जाए

सिगरेट के धुंए से भर गया था कमरारात को उसकी तलब जोर की लगी थी…

कुछ लम्हे ऐसे होते हैं,जो उम्र भर की याद बन जाते हैं,वो पल, वो वक्त, वो एहसास,दिल के सबसे करीब आ जाते हैं।


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