बुरा लगता है ना,,,जब कोई अपनागैर बन जाता है ,,,
दर्द होता है ना,,जब कोई सालोंका रिश्ता पल भरतोड़ देता है ना ,,,,
अच्छा नहीलगता है ना,,,,
जब कोई जानकारअजनबी बनजाता है ना,,,,,
कीमत दोनों को चुकानी पड़ती है,
बोलने की भी और चुप रहने की भी....
जरा सा भी नही पिघलता दिल तेरा ,
इतना क़ीमती पत्थर कहाँ से ख़रीदा!!
ज़िंदगी इक़ बुरी बला है तो इन बलाओं से जूझते है
मौत इक़ हल नही चलो ख़ुद की ख़ता'ओ से जूझते है
गरीब की थाली में पुलाव आ गया हैलगता है शहर में चुनाव आ गया...
कृष्ण में लीन मीरा
कृष्ण-प्रेम में मग्न है रहती
सुधबुध है खोई अपनी
बावरी कृष्ण-भजन में डूबी रहती
दरस की अभिलाषी मीरा
विष को भी अमृत मान है पी लेती
मोह कहाँ है उसे इस जग से
हर साँस वो गिरधारी को समर्पित करती
ऐसी है दर्श दिवानी...
"जिन्हें ईश्वर ने हृदय और परख दी है,
वे आदमियों की पोशाक नहीं देखते,
उनके गुण और चरित्र देखते हैं।"
मुंशी प्रेमचंद
नजर आना सभी को एक जैसा है कहा मुमकिन,
कहीं आँखों में कंकर तो कहीं आँखों के तारे हैं हम!!
चाय को तीसरी बार गर्म करके पिओगे
तो जहर बन सकती है
सुरमे की तरह पीसा है हमें हालातों ने,
तब जा के चढ़े है लोगों की निगाहों में..!!
झूठे इल्जामों की फिक्र ना करें वक्त का ग्रहण चाॅंद ने भी झेला था!!
गरीबी ही सटीक है मेरे लिए,फालतू लोग आस-पास फटकते भी नहीं फिर ……
ख़ुदख़ुशी करने से मुझे परहेज नहींबस शर्त इतनी हैं की फंदा तेरी जुल्फो का हो….!!
भटकी है रूह मेरी आज तलक उसके प्यार में,
जिसने किया था वादा रूह को रूह से जोड़ देंगे..!!
क्या मनाउ होली..
कैसे मनाउ जश्न...
जब फिलिस्तीन के..
बच्चो के जिस्म पर है..
खुन निकलता जख्म
बारिश के मौसम में सन्नाटे में, एकांत का असली सुख पता चलता है, हम जिस रस में होते हैं उसी में डूब जाते हैं, इसमें भी हल्की ध्वनि में संगीत सुनते हुए मदिरापान का आनंद शेष सभी प्रकार के सुखों...
जब क्रूर समाज ममता को नारी की कमजोरी समझ बैठे,
तब उस ममता को शक्ति का नव रूप बनाना जरूरी है।
लहरों का शोर नहीं, सागर का 'शान्त' सुनो
जीवन में कुछ बड़ा करना है, तो एकान्त चुनो
प्रह्लाद पाठक
हुस्न की क़ीमत कुछ खास नहीं होती
बदन अक्सर ऊंचे दामों में बिकता है !
दर्द हल्का है साँस भारी हैजिए जाने का कैसा रस्म जारी है