मत रखना अपेक्षा किसी से,एक एहसान खुद पर जता लेना,इस स्वार्थी छल कि दुनिया में,तुम अपना सम्मान बचा लेना..!!
भागदौड़ जिंदगी
सिमटी दुनियां
गिरफत में आंखे
हर वक्त देखे ...
बदला तस्वीर
बदलाव का बयार
एक पल को ओझल
अनदेखे रहा न जाए.!!
जहां तहां की खबरे
अखबारों सा व्यवहार
विपरीत प्रभाव
चस्का खराब ..!!
क्या उस गली में कभी तेरा जाना हुआजहाँ से ज़माने को गुज़रे ज़माना हुआमेरा समय तो वहीं पे है ठहरा हुआबताऊँ तुम्हें क्या मेरे साथ क्या-क्या हुआम्म हम्म, खामोशियाँ एक साज़ हैंतुम धुन कोई लाओ ज़रा….
नजरें झुकी हैं पर इश्क़ भी बरकरार है
हया है चेहरे पर और इज़हार भी कमाल है …
घर ना जाऊं किसी के तो रूठ जाते हैं, गांवों में अभी वो तहज़ीब बाकी है...
अच्छी संगत पाय के संगी बदले रूप
जैसे मिल के आम से मीठी हो गई धूप
वे भगवान हैं जिनको हमनें माँ के रूप में पाया है
उनकी गोद स्वर्ग है तो आँचल आख़िरी छाया है
सियासत को लहू पीने की लत है ,
वरना हमारे मुल्क में सब खैरियत है ।।
क्यूँ न आए दुआओं 🤲 पर यकीन.गिरते गिरते सम्भल जो गया हूं मैं..!!
हमें गुमान था तुम्हारा होने का
आँखें खुली और सारा भ्रम टूट गया
अक्सर, पिताओं के गुज़र जाने के बाद ही
हम उनसे प्यार करना सुरु करते हैं.
मैं गांव की अबोध लड़की कहां छुपा पाऊंगी तुम्हारे प्रेम को….मैं मुस्कुराती भी हूं, तो लोगों को शक हो जाता है…
व्यवहार सबसे रखो मगर.... लगाव हर किसी से नहीं...!!
आग उगलते न्यूज चैनल्स, जहर बाँटते अख़बार,
बहुत हुआ अब बंद करो, नफरत का कारोबार!
घना जंगल, अंधेरी रात, रास्ते भी सुनसान हैं,कैसे मिले मंज़िल जब खौफनाक हर इंसान हैं..!!
मैं बिल्कुल शीशे जैसा हु
जो जितना मेरा है मैं उसका उतना हु.
खून का वो आख़िरी क़तरा,
जो वतन की हिफ़ाज़त में गिरे,
दुनिया की सबसे अनमोल चीज़ है
भरे बाजार से अक्सर मैं खाली हाथ आया हूँ ,
कभी ख्वाहिश नहीं होती कभी पैसे नहीं होते ।।
तेरी यादों ने रखा है हर वक्त बेचैन मुझे ,
ये दिसंबर भी कट रहा है तुझे याद करते करते ...
मेरी जिंदगी मै खुशियां तेरे बहाने से है, आधी तुझे सताने से है आधी तुझे मनाने से है।