सच में अक्सर ऐसा होता
जब भी मेरे मन
और संघर्ष के बीच युद्ध होता है
सोचते अब लड़ के खड़ा हुए की
फिर लड़खड़ा के गिर ही जाते हैं
शायद यही असल ज़िंदगी का
यथार्थ मतलब है।
नेहा यादव
और फिर मैंने
सफर को ही हमसफ़र बना लिया
🖤
वे भगवान हैं जिनको हमनें माँ के रूप में पाया है
उनकी गोद स्वर्ग है तो आँचल आख़िरी छाया है
जिंदगी के रास्ते में सफर के मज़े लो,मंजिल तुमसे खुद किसी मोड़ पर टकराएगी ।
मैं बेरागी हूं… महादेव नहींपर तुम्हारी काया से अधिक तुम्हारी आत्मा को चाहूंगा..!
मैं प्रेमी हूँ… कान्हा नहींपर तुम्हारे नाम को सदैव अपने आगे लगाऊंगा..!
मैं मर्यादित हूं… श्रीराम नहींपर तुम्हारे अलावा मैं किसी और का न हो पाऊंगा..!
अगर वजह ना पूछो तो एक बात कहूं ,बिन तेरे अब हमसे जिया नहीं जाता !!
मैं क्या बताऊँ कैसी परेशानियों में हूँ
काग़ज़ की एक नाव हूँ और पानियों में हूँ
भारत भूषण पन्त
किताबें इस लिए पढ़ो ताकि आप ,लोगों से बहस नहीं तर्क कर सको …
अपनी तन्हाई का वजूद हूँ मैं,
कुछ न होने के बावजूद हूँ मैं !
ना करीब आ , ना तो दूर जा !ये जो फासला है , यही ठीक है..!.ना गुज़र हदों से , ना हद बता !ये जो दायरा है , यही ठीक है..!!
खामोशियां बे वजह नहीं होती ,कुछ दर्द आवाज छीन लिया करते हैं…
कुछ न था मेरे पास खोने को ,
तुम मिले हो तो डर गया हूँ मैं ।।
हम दोनों को हम जैसे बहुत मिलेंगेबस हम दोनों को हम दोनों नहीं मिलेंगे!!🥀
आप का क़द नहीं आप की विनम्रता आपकों बड़ा बनाती है
मुकद्दर कि चोट ऐसी खाई थी मैंने,आज हर कदम पर फिसल रहा हूं,कभी झूठे सुख, तो कभी झूठी हंसी लिये,मैं किरदारों पर किरदार बदल रहा हूं..!!
ये दुनियाँ अगर मिल भी जए तो क्या है …..
मैं लेखक हूं, हालातों पर लिखता हूं, जज्बातों पर लिखता हूं,दफन हुई ख्वाहिशें, किसी की चंद मुलाकातों पर लिखता हूं,समाज में फैल रहे द्वेष, अनैतिकता और गंदगी पर लिखता हूं,कभी कभी मुकद्दर से चोट खायी अपनी ज़िन्दगी पर लिखता हूं..!!
मेरे अधूरे किस्से का मुझे हिसाब चाहिए,मैं सही था या गलत मुझे जवाब चाहिए ।
सोच आज दो घड़ी के लिए,
वक्त रुकता नहीं किसी के लिए !!
वक्त से हारा या जीता नही जाता,केवल सीखा जाता हैं..