वो वक्त और था जब दिल से मुस्कुराया करते थे..
अब चेहरे की खुशी का दिल से कोई वास्ता नहीं..!!
साथ हजारों ख्याल आयेजैसे कोई सूखी लकड़ीसुर्ख आग की आहें भरे,दोनों लकड़ियां अभी बुझाई हैं
मोहब्बत सेहरी में पिए गए आखिरी घूंट की तरह होनी चाहिए ।। जिसके बाद दूसरे घूंट की गुंजाइश ना रहे ।।
लाया हूं आपके लिए चांदी की बालियां ,
कानों में डाल के इन्हें सोना बनाइए ।।
तुम्हें लिखा जाना चाहिए था कविताओं की तरह
तुम्हें भुला गया हैं पुराने किस्सों की तरह,
तुम्हें तो पूरा हो जाना चाहिए था
तुम्हें तो खुदा से मांगा गया था दुवाओं की तरह!
अहंकार की सबसे बड़ी खराबी यह है कि ,
ये कभी आपको महसूस नहीं होने देता कि आप गलत हैं ...
नर हो न निराश करो मन को कुछ काम करो कुछ काम करो।
मैथिलीशरण गुप्त
जो जवाब वक्त पर नहीं मिलते,
अक्सर वो अपने मायने खो देते हैं।
देख सूरज तु हार जायेगा…,
माँ दुपट्टा भीगो के लाई है..!!!
ना वो खानदान रहे
ना वो दरियादिल
अब तो लोग किसी
को भीख भी देते हैं
तो चन्द सिक्को के बदले
लाखो की दुवा चाहते हैं
सर जिनके सलामत हैं,वो शर्मिंदा तो होंगे, याद आएगा जब उनको कि दस्तार कहाँ है? ~ अभिषेक शुक्ला
संघर्षों की समर भूमि में, हमसे पूछो हम कैसे हैं,
कालचक्र के चक्रव्यूह में, हम भी अभिमन्यु जैसे हैं !
संभल कर चल नादान, ये इंसानों की बस्ती हैं ...
ये रब को भी आजमा लेते हैं फिर तेरी क्या हस्ती हैं ...!!!
कभी कभी खो भी जाना चाहिए, ये देखने के लिए कौन खोजने आता है।
जो परवाज करे हो कर्बला की दास्तां सुनकर
वो घबराते नहीं जालिमों का लश्कर देखकर।
जिंदगी के सफर में उठे
मेरे कदम एक दूजे से बात करते हैं
साघते है ज़िन्दगी का सुर मीठा
और बहते आवारा हवा से तुम्हें याद करते है
राजेश गौरी
संघर्षो के दिनों में, साथ बस एकांत होता है।
न कोई यार होता है, और न इतवार होता है।।
सभी दुखों की जड़ लगाव है !
यूँ तो अमरोहा से मेरा कोई नाता ना था
फिर कमबख्त नामुराद मोहब्बत हुई
और उसपर सितम तुझ बेवफा से हुई
और हम खुद बे खुद
जॉन ऐलिया के मुरीद हो गए
कुछ रिश्ते आजकल उस रास्ते पर जा रहे हैं,न साथ छोड़ रहे हैं, और न ही साथ निभा पा रहे हैं…