मसला हल हुआ?
हुआ कि नही?
हमसा कोई मिला?
मिला कि नही?
छोड़िये हमको हम तो बे-दिल है।
आपका दिल लगा?
लगा कि नही?
कष्टों में रोने, और प्रसन्नता में गले लगने को,
कम से कम एक कंधा तो सुरक्षित रहना चाहिए !!
लहरों का शोर नहीं सागर का 'शान्त' सुनो ,
जीवन में कुछ बड़ा करना है, तो एकान्त चुनो ..!!
आप का धैर्य आप की सबसे बड़ी शक्ति है,आज़मा कर देखो.
किरदार की बदबू महंगे से महंगें,
परफ्यूम से भी नहीं छुपा सकते हो...
थक चुका हूं इन पुराने अल्फ़ाज़ों से खेलते खेलते,
तुम मेरे दिल से खेल कर एक नया शब्दकोश उपहार कर दो..!!
खुशियां खत्म हो चुकी मेरे जीवन से,
मैं अवसादों का रहगुजर हूं,
और जिसे कोई नहीं तराश सकता,
मैं वो मानव निर्मित पत्थर हूं..
इंसान के समाज में होने से कहीं अधिक जरूरी है, इंसानियत का समाज में होना....!!
जीभ कभी फिसलती नहीं है,
जो दिमाग़ में चल रहा है,
वो जीभ पर आ जाता है !!!
लफ्ज़ टूट टूट कर निकल रहे है ज़हन से,
पक्का दिल मे कोई हादसा जबरदस्त हुआ है….!!
कभी कभी अंदर की घुटन से दिल और दिमाग इस हद तकतकलीफ में आ जाते है की रोने से भी सुकून नही मिलता ...
कभी कभी लगता है जिनको मोहब्बत में ज्यादा तमन्ना नहीं होती है न.. उनके ही ज्यादा गहरे ज़ख्म होते हैं
अल़फाज सुनने वाले हजारों लोग है मगर
खामोशी सुनने वाला सिर्फ मेरा अल्लाह है...
मुझे प्रेम तुझसे है तो है..!अब क्या मुकद्दमा करोगी मुझ पर…!!🍹
मैं मुद्दतों जिया हूँ किसी दोस्त के बग़ैरअब तुम भी साथ छोड़ने को कह रहे हो ख़ैर
फ़िराक़ गोरखपुरी
जिसके भी भाव बढ़े उसे त्याग दो,
चाहे "बाबु" हो या "टमाटर.🍅
एक घुटन सी हो रही थी मुझे संपूर्ण रात्रि ,घबराहट सी हो रही थी अपने ही अंधेरे कमरे में....भोर की सुनहरी रौशनी आई एक हल्की दस्तक लिए ,उदासी तमाम मेरे कमरे के दरवाज़े से फ़ौरन ही विदा हो कर नई...
जिस दिन धरती से छिपकली, कॉकरोच और चूहे खत्म हो जाएंगे,उस दिन धरती पर स्त्रियों का पूर्ण शासन होगा.
सुंदरता का मोह त्याग चूके है हम ,
जिसे पसंद आना था आ चूके है हम...
दर्पण देख सँवर गए कितने
अपने पर ही मर गए कितने
ख़्वाबों की खेती को सच के
कीट-पतंगे चर गए कितने
प्यार वफ़ा ईमान की बातें
करके लोग मुकर गए कितने
फ़ाइलें सब्ज़ योजनाओं की
चूहे रोज़ कुतर गए कितने...