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अल्फ़ाज़ नहीं रहे शेष अब, विचारधारा भी है शून्य, मस्तिष्क में है उथल-पुथल, आवेश भी लगता पुन्य..!! विरक्ति

क्या ही करूंगा मैं दुनिया जीत करजब आख़िर में तुझे ही हारना है….!!

बेहतरीन का दौर है आप कहां हम जैसे पर अटके हो..!

वो आईना भी कितना खुश क़िस्मत होगाजो हर सुबह तुम्हारा दीदार करता होगा….!!

मांगना नहीं कमाना सिखों चाहे इज्जत हो या दौलत..!!

ख़ुश मिजाजी मशहूर हैं हमारी सादगी भी कमाल है हम शरारती भी बेइंतेहा के है तन्हां भी बेमिसाल है

मन तो सबके पास होता है, लेकिन मनोबल" कुछ लोगों के पास ही होता है..!!

मुझे तुम्हारा साथ चहिए,तुम्हारी सलाह नहीं…

साथ देने वाले कभी हालत नहीं देखते और हालत देखने वाले कभी साथ नहीं देते !!!

मैं कैसे कह दूँ आज मेरे मन में व्यथा नहीं, पर संघर्षों से घबरा जाना मेरे कुल की प्रथा नहीं..!

चरित्रहीन व्यक्ति दूसरों पर जितना सन्देह करता है, उतना सच्चरित्र नहीं। महादेवी वर्मा

क्या उस गली में कभी तेरा जाना हुआजहाँ से ज़माने को गुज़रे ज़माना हुआमेरा समय तो वहीं पे है ठहरा हुआबताऊँ तुम्हें क्या मेरे साथ क्या-क्या हुआम्म हम्म, खामोशियाँ एक साज़ हैंतुम धुन कोई लाओ ज़रा….

मैं भाल-भाल पर कुंकुम बन लग जाऊंगा lमैं तलवारों से मेघ-मल्हार गवाऊंगा ll

एक उम्मीद जगती हैं सुबह के साथ , कुछ करने की लकीर उभरती हैं सुबह के साथ , काली रातों से ना घबरा अरे यार , उजाले की उम्र बढ़ती हैं सुबह के साथ ।

शतरंज हो या ज़िंदगी, जीतने के लिए धैर्य रखना पड़ता हैं...

अच्छा इंसान तो अपने जुबान से ही जाना जाता है,वरना अच्छी बातें तो दीवारों पर भी लिखी होती है..!!

किसी की निंदा करने से यह पता चलता हैं, की आपका चरित्र क्या हैं ना की उस व्यक्ति का.

"वक्त की पाबंदी सभ्यता की पहली निशानी है…।"

हम उस दौर में जी रहे हैं दोस्त..जहाँ मासूमियत को बेवकूफी कहा जाता हैं..!!

बेवजह खुश रहो... वजह महंगी है.....!!


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