रूठना मनाना और छोड़ देना तुम्हारा शौक है..
हमें तो आदत है तुम्हें मना कर मुस्कुराने की..!!
साथ हजारों ख्याल आयेजैसे कोई सूखी लकड़ीसुर्ख आग की आहें भरे,दोनों लकड़ियां अभी बुझाई हैं
सब झूठे हैं यहां,
बस यही एक सच है..!
न मैं शायर हूँ न मेरा कोई शायरी से वास्ता ,
बस एक आदत सी हो गई उसकी यादों को बयान करना ..!!
किरदारों कि लेप चढ़ी है,
जिसे जैसा चाहिए बन जाता हूं,
सबको खुश रखने के चक्कर में,
मैं अंदर से छन जाता हूं..!!
कहानी लिखने वाला बड़ा नहीं होता, बड़ा वह है जिसने कहानी अपने जिस्म पर झेली है। ~ अमृता प्रीतम
तह बह तह जमती चली जाती है सन्नाटों की गर्दहाल-ए-दिल सब देखते हैं पूछता कोई नहीं
निभा न सकेंगे एक भी दिन मेरा किरदार
मशवरें जो देते फिरते हैं हज़ार...!!
बूढ़े मां बाप को अपने घर से निकाल रखा है
अजीब शौक है बेटे का, कुत्तों को पाल रखा है
लकीरों की इस भीड़ मेंकाश होती एक लकीर तेरे नाम कीबस वही बना लेते अपना घरऔर बंद कर लेते अपनी सारी ख़ुशियाँहमेशा के लिए अपनी मुट्ठी में
देश चलता नहीं,मचलता है,मुद्दा हल नहीं होता सिर्फ उछलता है,जंग मैदान पर नहीं,मीडिया पर जारी है,आज तेरी तो कल मेरी बारी है।
ज़िन्दगी के कुछ लम्हें और हादसे भुलाये नहीं जाते,हालांकि भुला देने में भलायी होती है.लेकिन अफसोस हमसे ये हो नहीं पाता.
इतने सिद्दत से मेहनत करो तुम..कि तुमको कतरा नहीं तुमको समंदर मिले..
रात चाहे कितनी भी
काली क्यूं न हो
मन में रोशनी का दिया
जलाया जा सकता है
उम्मीद के दीपों से
सजाकर घर अपना
आमवस को
पूर्णमासी बनाया जा सकता है..!
इश्क बेहद किया है हमने..इसलिए बस हदें ना लांघ सके..🍁
गिर कर उठना आसान है
कोशिश कर के तो देखो तुम
बिखर गया है जो कुछ भी
एक बार तो उसको समेटो तुम
कैसे जुदा कर दे उसे अपने आप से,उसके नाम का एक अक्षर मेरे नाम में भी आता है !
वह पथ क्यापथिक कुशलता क्याजिस पथ पर बिखरे शूल न होंनाविक की धैर्य परीक्षा क्याजब धाराएँ प्रतिकूल न हों
जयशंकर प्रसाद
सबके अपने सत्य हैं,
सबके अपने झूठ।
कोई कहता लाभ इसे,
तो किसी को लगती लूट।
सबके अपने कष्ट हैं,
सबकी अपनी जंग।
कोई कभी टूट जाता है,
कोई हो जाता तंग।
सबकी अपनी मान्यता,
सबका निज विश्वास।
कोई कभी...
उसे छोड़ देना ही उचित हैं,
जो आपके होने का मूल्य ही न समझे…