तुम्हारे साथ बिताए हुए वो कुछ लम्हें दोस्त ...
उम्र भर की मेरी आवारगी पे भारी हैं...
"कुछ लोग पाँवों से नहींदिमाग़ से चलते हैंये लोगजूते तलाशते हैंअपने दिमाग़ के नाप के।"
नरेश सक्सेना
कहानी लिखने वाला बड़ा नहीं होता, बड़ा वह है जिसने कहानी अपने जिस्म पर झेली है। ~ अमृता प्रीतम
मुझ जैसी आफत में तुम्हारी शराफत कम पड़ जायेगी,मुझसे ज्यादा बात करोगे तो मेरी आदत पड़ जायेगी
कुछ नहीं बचा मेरे इन दोनो खाली हाथों मेंएक हाथ से किस्मत रूठ गई,और दूसरे हाथ से मोहब्बत छूट गई..🥀
तानों की भट्ठी में तपा आदमी,
राख नहीं सोना बनता है....
तुम ने तो सितारों को दूर ही से देखा है,तुम समझ न पाओगे आसमां की तनहाई…
ठहरेंगे कहीं तो खबर कर देंगे ,
मौत से कह दो कि अभी सफ़र में हैं हम ..!!
वेदना मेरे हृदय में नासूर कर रही है,
ये खामोशियां मेरी चीखें रोक रहीं हैं..!!
विरक्ति
सहायता तोल मोलकर नहीं दिल,खोलकर की जाती है!!
काटकर गैरों की टाँगें ख़ुद लगा लेते हैं लोग
इस शहर में इस कदर भी कद बढ़ा लेते हैं लोग....!!
मोहब्बत इंसान से हो या जानवर से , जुदाई के वक्त रूला देती है ...
तूने जो ना कहा मैं वो सुनती रही ख़ामख़ाह, बेवजह ख़्वाब बुनती रही जाने किसकी हमें लग गई है नज़र इस शहर में ना अपना ठिकाना रहा दूर चाहत से मैं अपनी चलती रही ख़ामख़ाह, बेवजह ख़्वाब बुनती रही ....
लहू रिसने नही देता कभी जो अपने अंदर से ,ज़माना सोचता है वो ज़ख़्म ताज़ा नहीं होता!बस आंखों की उदासी खोलती है राज ए दिल वरना ,मेरे चेहरे से मेरे गम का अंदाज़ा नहीं होता!
कोशिश करा करो सच बोलने की,झूठे रिश्ते ही टूटेंगे, इंसानियत का धर्म नही…
सिर्फ एक गलती की देर है,लोग भूल जाएंगे आप पहले कितने अच्छे थे।
प्रेम करुणा बन के आंखो से न बहे तो..
समझो अंतर मन में उतरा ही नहीं...!!
चाहा यही की एक ही शक्स समझे मुझे,भीड़ से रहा हमेशा परहेज मुझे
बालों के सफेद होने से लेकर चेहरे कि सिलवटें बनने तक,
तुम्हारा साथ चाहिए मेरी अर्थी के पास बैठकर रोने तक..!!
स्वार्थ मनुष्य के व्यवहार में शामिल होता है ,
बारिश रुक जाने के बाद छाता भी उसे बोझ लगने लगता है …