मुझसे नही कटती ये उदास रातें ,
कल सूरज से कहो मुझे ले कर ढूबे ।।
….ख्वाहिशों का काफिला भी बड़ा अजीब है
अक्सर गुजरता वहां से है जहां रास्ते नही होते..!!
आप वो नहीं होते जो आप बतातें हैं
आप वो होते हैं जो आप छुपाते हैं
कभी बच्चों सी झलकती हैं नादानियां मुझमें,
कभी इतना संभालता हूं की उम्र कांप जाती है..
एक बार ही बहकती है ये नज़रेकिसी को देख कर….ये इश्क है साहेब सौ बार नहीं होता …
अल़फाज सुनने वाले हजारों लोग है मगर
खामोशी सुनने वाला सिर्फ मेरा अल्लाह है...
शाम को तेरा हस के मिलना..दिन भर की तनख्वाह है मेरी...!!
एक पल में ले गई मेरे सारे ग़म खरीद कर , कितनी अमीर होती है ये बोतल शराब की ..!!
रूठी हुई हैं वो ऐसे जैसे हम उन्हें मना लेंगे,मोहतरमा इतने वक़्त में तो हम दूसरी पटा लेंगे।
तू याद कर या भूल जा,
तू याद है बस ये याद रख।।
एक अरसे से हमारी बोलचाल बन्द हैफिर भी क्या यादों की आवाजाही बन्द है
अगर सोने का हिरण चाहेगी सीता
तो बिछड़ जायेंगे उसे राम ये तय है
चौदह वर्ष वनवास रहा
एक एक रात कटी रोते रोते
तब जाकर बार समझ में आई
सोने के हिरण नही होते
जिन्हें हालात से आता है टकराना, उनको मुसीबत भी खुशी की तरह लगती है…
शक अपने ही हुनर पर भी करते हैइस तरह से बहुत कुछ हम सिखते है
लोगो को रियलिटी से ज्यादा,
अंधविश्वास में जीना पसंद हैं...
मरीज़ हमको दवाएँ बताने लगते हैं
बुरा हो वक़्त तो सब आज़माने लगते हैं
नए अमीरों के घर भूलकर भी मत जाना
हर एक चीज़ की कीमत बताने लगते हैं
मलिकज़ादा जावेद
सफलता के दरवाज़े उनके लिए ही खुलते हैं,
जो उनको खटकाने की हिम्मत करते हैं...
ज़िंदगी को जंगल केउस पेड़ की तरह बनाओ,जो हर परिस्थिति मेंमस्ती से झूमता रहे।
सपने में बिछड़े हुए लोगों का मिलना ,
डेटिंग का सबसे दर्दनाक रूप है...!!!
ख़्वाहिशों पर पाबंदी ख़्वाबों पे पहरा है ,
कौन समझेगा दर्द मेरा कितना गहरा है।।