सवाल अहंकार का नहीं,
इज़्ज़त का रखो..
कोई अगर लहज़ा बदले,
तो तुम रास्ता ही बदल लो..!!
अब किसी की तलब नही हमे...
अब हम अपनी ही तलाश में है....!!
चेहरे अक्सर झूठ भी बोला करते हैं,
रिश्तों की हकीकत वक़्त पर पता चलती हैं.
मैं रास्ते भूलता हूँ
और इसीलिए
नए रास्ते मिलते हैं
"CRUSH" तो दूर की बात है,
मुझ पर तो किसी को
तरस भी नहीं आता..,!!
देखना तुम्हारी भी शाम न हो जाए एक दिन..!!💔
अपना ज़मीर जिंदा रखो,
ये पार्टीया तो आती जाती रहेंगी…
मेरे कानों का वो झुमकाहमारे इश्क़ की छन छन पेइतराता है
तेरे हाथों की छुअन सेजाने क्यूँ अब भीशर्माता है
हिचकियाँ आती थी उसे ,
मेरे याद करने से ,
शायद अब हिचकियाँ भी ,
बेवफ़ा हो गई हैं ...!!
जिन वृक्षों की जड़ें गहरी होती हैं,
उन्हें बार-बार सींचने की जरूरत नहीं होती ।
ब्रह्मा से कुछ लिखा भाग्य में मनुज नहीं लाया है,
अपना सुख उसने अपने भुजबल से ही पाया है।"
रामधारी सिंह 'दिनकर'
जब "हृदय" टूट जाता है तब,रूक सकता "कृंदन" का वेग नहीं,ध्वस्त हो जाती "मन" कि क्षमता है,रूक सकता "अश्कों" का संवेग नहीं..!!
व्यवहार सबसे रखो मगर.... लगाव हर किसी से नहीं...!!
जहां बातें ही तीर सी हों,
वहा रिश्ते छलनी हो ही जाते हैं...
दोनों भाई बहनों को ऊंट भी चाहिए और राजस्थान भी नहीं जाना चाहते..शास्त्रों में इसे ही कूटनीति कहा गया है…
कभी कभी बहुत ग़ुस्सा आता हैं ख़ुद पर ,मैं जैसे हूँ वैसे क्यों हूँ ?
मित्रता बड़ा अनमोल रतन
कब उसे तोल सकता है धन?
धरती की तो है क्या बिसात?
आ जाय अगर बैकुंठ हाथ
उसको भी न्योछावर कर दूँ,
कुरूपति के चरणों में धर दूँ।
सिर लिए स्कंध पर चलता हूँ,
उस दिन के लिए मचलता हूँ,
यदि चले वज्र दुर्योधन...
परेशानी यह नहीं की दिन बुरे चल रहें, मसला ये है कि दिन भी जवानी के हैं ..!!
जो अपने लक्ष्य के प्रति वफादार होते हैं, मंजिल सिर्फ उन्हीं के कदम चूमती है....
अंगड़ाई पर अंगड़ाई लेती है रात जुदाई की...
तुम क्या समझो तुम क्या जानो बात मिरी तन्हाई की...