तू न थकेगा कभी, तू न रुकेगा कभी, तू न मुड़ेगा कभी, कर शपथ, कर शपथ, कर शपथ, अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ। यह महान दृश्य है, चल रहा मनुष्य है, अश्रु श्वेत रक्त से, लथपथ लथपथ लथपथ, अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ।
वही ज़िद वही हसरत,
ना दर्द-ए-दिल की कमी हुई
अजीब है मोहब्बत मेरी,
ना मिल सकी ना ख़त्म हुई
कुछ अजीब सा चल रहा है वक्त का ये सफर
एक गहरी सी खामोशी है खुद के अंदर!
फिल्टर सिर्फ चित्र का होता है,चरित्र का नहीं….
वो सिर्फ़ मेरे थे,
सिर्फ मेरे सामने....
कुछ लोग भूलने के नहीं,
बल्कि दफनाने के काबिल होते हैं...
सुनसान रास्तों पर भी , ज़िंदगी ख़ुशगवार लगती है ,,जब मौजूद हो कुछ भटके हुए साये , लाजवाब बेशुमार लगती है ,,भीड़ थी आसपास बहुत कि उलझनें और उलझ गई ,, इसलिए ...छोड़ दिया सब कुछ ,, अब ना कोई...
कफ़न मेरा हटा कर मुझे बार-बार देखोगी,तुम्हें मेरी मौत पे यकीन ही नहीं आयेगा...
सफल रिश्तों के यही उसूल हैं,बातें भूलिए, जो फिजूल हैं…
तू अच्छे कर्मों से एक अलग पहचान बन,तू पहले इंसान फिर हिन्दू मुसलामान बन.
लड़ाई का उद्देश्य जीत होता है। संरक्षण में कोई संभव जीत नहीं होती।
वहम से भी खत्म हो जाते हैं रिश्ते कई बार,
कसूर हर बार गलतियों का नहीं होता ..!!
ख़ामोशी किसी की यूं ही बेहिसाब नहीं होती,
दर्द उनकी आवाज़ छीन लेते हैं
मुमकिन नहीं मेरा पहले जैसा हो पाना
खुद को बहुत पीछे छोड़ आई हूँ मैं
हमें भी नींद आ जाएगी हम भी सो ही जाएँगेअभी कुछ बे-क़रारी है सितारो तुम तो सो जाओ
~ क़तील शिफ़ाई
जो जिस अंदाज में समझता है उसे
उसी अंदाज में समझाना चाहिए
एक ही समझने वाला था मुझे ,
हाय !अब वो भी समझदार हो गया ।।
शाम से आँख में नमी सी हैआज फिर आप की कमी सी है
~गुलज़ार
जो कभी साथ बैठ कर हंसे थे
आज नाग बनकर डंस रहे हैं....!!