इस समाज में जो आदमी बुरा नहीं है,
वो बेवकूफ समझा जाता है...
लोगों के काम आते रहिये,क्योंकि क़ुदरत का एक उसूल है, कि जिस कुएँ से लोग पानी पीते रहें, वो कभी सूखता नहीं है
तानों की भट्ठी में तपा आदमी,
राख नहीं सोना बनता है....
क्रोध से शुरू होने वाली हर बात,लज्जा पर समाप्त होती है
महरुमीयों की अपनी कोई इंतेहा नहीं ,कभी चेहरा नही, तो कभी आईना नही ।तुम जिस से कर रहे हो मेरे हक में बद्दुआ ,मेरा भी है खुदा, वो फकत तुम्हारा नही ।
गलती हो या के न हो गर्दन झुका के देखो खामोश रह के अपना रिश्ता बचा के देखो अल्फाज़ खार भी हैं, तलवार भी, जखम भी अपनी ज़ुबान को पर मरहम बना के देखो
किताब के पन्ने की तरह मोडे गए
फिर ना कभी खोले गए ना पढ़े गए
मेरा लिखा ना तो कोई कविता है,ना कोई कहानी मेरे द्वारा लिखा गया बस, मेरे अतीत की क्षतिपूर्ति मात्र है…!
पुरानी और नई पीढ़ी की सोच का अंतराल हीआज में "पिता" और "बेटे" के बीच की दूरी है
"अपनों" में रहें...
"अपने" में नहीं....!!🕊️
बल से तो दुसमन न जीते,
छल से दोगले जीते भी तो क्या जीते......
हर सिक्के का दो पहलू होता है,सोच समझ कर जुबान का इस्तेमाल करे...
"माँ थी अनपढ़
लेकिन उसके पास गीतों की कमी नहीं थी
कई बार नये गीत भी सुनाती
रही होगी एक अनाम ग्राम-कवि"
आलोक धनवा
अजीब होती है इंसान की फितरत
निशानियों को महफूज़ रखकर इंसान को खो देते हैं।
इस देश में पिता की इज़्ज़त बेटियां संभालती हैं और सम्पति बेटे।
~ दीपाली दास
धन न हो तो रिश्ते...
उंगली पे गिने जाते हैं....!!
होशियारी नोच लेगी सारे ख्वाब,लुत्फ जो भी है नादानी में है...
बिलकुल! चलिए जारी रखें। जहां निर्मलता की किरण हर कदम दिखाए।
दुनिया जो कठिनाईयों से भरी हो सकती है, हम निर्मलता को पकड़ेंगे, एकमात्र अद्भुत वस्त्र।
चमकती हुई आँखों के साथ हम...
मृत्यु एक घटना हैवो सिर्फ बर्फ की तरहसुन्न कर देती हैपीड़ा बाद में आती हैकाल की तपन मेंपिघलती हुई !!
एक ही समझने वाला था मुझे ,
हाय !अब वो भी समझदार हो गया ।।