मैंने अपनी ज़िंदगी के सारे, महंगें सबक सस्ते लोगों से सीखे हैं...
हकीकत से सामना हुआ तो,
पता चला लोग सिर्फ बातों से अपने थे....
तन्हाई में बस ये एहसास होता है, दूसरा कोई नहीं हमारे पास होता है।
तारीफ का तो पता नहीं, पर उंगलियां आपकी तरफ जरूर उठेंगी।
मैं जानता हूं कहाँ तक उड़ान है उनकी,
ये मेरे हाथ से निकले हुए परिंदे है..
मेरा लिखा ना तो कोई कविता है,ना कोई कहानी मेरे द्वारा लिखा गया बस, मेरे अतीत की क्षतिपूर्ति मात्र है…!
मेरा बुरा वक्त क्या आ गया
आज अंधों को भी मेरे में कमियां दिखने लगी!!
सब से पहले दिल के ख़ाली-पन को भरना,पैसा सारी उम्र कमाया जा सकता है.!
बीवी भी हक़ जताती है,माँ भी हक़ जताती है, शादी के बाद आदमी कश्मीर हो जाता है॥
क्यों है
तेरा इन्तेजार ?
किस बात कि
है दरकरार ,, ?
जानता हूँ
कितनी ही सदायें दूँ
तू ना आएगा पलटकर
फिर भी क्यों है
जिया बेकरार
व्यर्थ है आशु
अब पिया मिलन
की आस,,,,,
आशु
वक्त तो निकल जायेगा..
मसला तो यादों का है..!!
सत्य के लिए
किसी से भी नहीं डरना
गुरु से भी नहीं
मंत्र से भी नहीं
लोक से भी नहीं
वेद से भी नहीं
मैं आज भी अपने मुकद्दर से शर्त लगाती हूं...
भरी बरसात में कागज की पतंग उड़ाती हूं...!!
सस्ते और घटिया ताले किसी भी चाभी से खुल जाते हैं…….
मैं बात तालों की नहीं इंसानों की कर रहा हूं
किस्मत के सहारे मुझे ना छोड़ना मेरे "कान्हा,मुझे तेरी दया के सिवा किसी पर यकीन नही है.
किरदार पे अगर बात आई तो याद रखनाबेरहम इंसान के साथ गालियों में PHD करके बैठा हूं
अपने गैरों की दलाली करने लग जाए, तो वो अधिक देर तक अपने नहीं रहते !!
पता है मुझे ऐ ज़िन्दगी
कदम कदम पर
तू मुझे रुलायेगी
मगर याद रख
तेरे ज़ुल्मों सितम की उम्र है छोटी
मेरे होंठों की हंसी से
तू पल पल मात खायेंगी
मुफ्त में मिलती साँसें नहीं ,
मौत का भी यार दाम चुकाना पड़ता हैं ..
फूल जैसी होती है , वफ़ा की तासीरख़त्म होते ही , मिट्टी में अपनी खुशबू छोड़ जाती है …