तूफानों से आँख मिलाओ सैलाबों पे वार करोमल्लाहों का चक्कर छोड़ो तैर के दरिया पार करो
~ डॉ. राहत इंदौरी
बस साथ निभाने की जो कसमें दिलाई गई थीउसका बोझ है पर प्रेम नहीं हैअब यदि वो प्रेम की बात भी कर रहे हैतो वो इसलिए कि मजबूरी हैकि पति पत्नी हैगहराई में जाकर देखा जायतो वो सामाजिक बंधन ही...
खामोश लोग
सबसे तेज़ दिमाग रखते हैं ...
हम खाली किताब थेलोग आते गए सबक छपता गया
मिलो कभी फुर्सत निकाल कर, एक दिन बहुत उलझना है मुझे तुम से !
बदला नहीं लूँगा, बस बदल जाऊँगा.
किसिको गिराऊँगा नहीं, बस संभल जाऊँगा !
खुद की कीमत गिर जाती है...
किसी और को कीमती बनाते बनाते..!!
शब्द ही नहीं, खामोशी भी चुभती है।
मेरी साँसों पर मेघ उतरने लगे हैं,
आकाश पलकों पर झुक आया है,
क्षितिज मेरी भुजाओं से टकराता है,
आज रात वर्षा होगी।
कहाँ हो तुम ?
दिल का मामला है तो,दर्द से बनाकर रखिएगा हुज़ूर!किसी-न-किसी मोड़ पर,ठोकर ये खाएगा ज़रूर !
जो कल थे,वे आज नहीं हैं।
जो आज हैं,वे कल नहीं होंगे।
होने न होने का क्रम,
इसी तरह चलता रहेगा,
हम हैं,हम रहेंगे, ये भ्रम भी,
सदा पलता रहेगा।।
अटल बिहारी वाजपेई
नाराज़ हो जाते हैं अब वो साहब
जब जवाब हम उन्हें उनके ही लहज़े में देते हैं
मोहब्बत में कैद हुई अपनी खुशियां तराशता रहा,
चाभी रख कर कांधे पे मैं तिजोरी तलाशता रहा..!!
विरक्ति
चुप हैं किसी सब्र से तो पत्थर न समझ हमें,
दिल पे असर हुआ है तेरी बात-बात का...