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World's Best Cow Hospital

बोले हुए अल्फाज़, गुजरा हुआ वक्त, टूटा हुआ भरोसा, कभी वापस नही आता...

सुनाते हैं सितारे रात भर सबको को ये अफसाना कही पे एक शम्मा थी कही था एक परवाना

दाँव पर सब कुछ लगा है, रुक नहीं सकते टूट सकते हैं मगर हम झुक नहीं सकते अटल बिहारी वाजपेयी

शायद तुम्हें कभी पता ना चले... पर तुम्हारा ख़याल... तुम्हारी परवाह... मुझे अब भी है...

हम जिस दुनियां में रहते हैं, उसका नकलीपन बिल्कुल असली है...

यहीं कहीं दफ़न हो जाएंगे मेरे साथ मेरे अरमान भी,मेरी वफ़ा के बदले मुझे "तड़पन" ईनाम मिली है..!!

गीत ग़ज़लों में शामिल गर हो ना सके, तो तुम्हारे दर्द में बसर हम ज़रूर करेंगे।

हम उस दौर में जी रहे हैं दोस्त..जहाँ मासूमियत को बेवकूफी कहा जाता हैं..!!

दुश्मनों से प्यार होता जाएगा दोस्तों को आज़माते जाइए। ख़ुमार बाराबंकवी

चरित्र कि कसौटी पर स्त्री के जज़्बात निचोड़े जाते हैं,पवित्रता कि परीक्षा में हर बार उसके कपड़े उतारे जाते हैं,हर पीड़ा सहकर भी खामोश रहती है वो,उसके ज़ख़्म तो भर जाते हैं मगर निशां छोड़े जाते हैं..!!

तुम बदलो तो मजबूरियां है बहुत,हम बदले तो बेवफा हो गए ….!!

चढ़ते हैं चढ़ाइयाँ बनाकर सीढ़ियाँ जिन काँधों पर, फतह होते ही मंज़िल लतियाकर गिरा देते हैं लोग.

जब प्रतिष्ठा बढ़ेगी तो निंदा का टैक्स तो चुकाना ही पड़ेगा... निंदा से ना घबराएँ ये तो प्रगति की निशानी है...

किस्मत के सहारे मुझे ना छोड़ना मेरे "कान्हा,मुझे तेरी दया के सिवा किसी पर यकीन नही है.

आज तो कलम ने भी ताना मार दिया ! जब कोई पढ़ता ही नहीं तो लिखते क्यू हों !!

हर ख्वाहिश, हर ख्वाब, हर अरमान,, पूरे कहाँ होते हैं ?? जो हमारे लिए ज़रूरी हैं.... हम उनके लिए ज़रूरी कहाँ होते है ??..

दो रोटी के वास्ते, मरता था जो रोज । मरने पर उसके हुआ, देशी घी का भोज ॥

अकेलापन,लाख बेहतर है..!!मतलबी लोगों से….🖤

हमें गुमान था तुम्हारा होने का आँखें खुली और सारा भ्रम टूट गया

हैरत है की हम जैसे लोग भी ठुकराए हुए है जबकि हम जैसे लोग तो सीने से लगाने के लिए है...


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