ज़िंदगी इक़ बुरी बला है तो इन बलाओं से जूझते है
मौत इक़ हल नही चलो ख़ुद की ख़ता'ओ से जूझते है
अंध कक्ष में बैठ रचोगे ऊँचे मीठे गान
या तलवार पकड़ जीतोगे बाहर का मैदान।
रामधारी सिंह दिनकर
मशहूर तुम आज भी हो मेरे नाम सेपहचान तुम्हारा आज भी है मेरे नाम सेवेवफाइ का चादर ओढ़ तुम आए थे मेरे पासले कर चली गई सारी खुशियांखुदा ने जो रखा था मेरे नाम से…..
कमाल-ए-ज़ब्त को ख़ुद भी तो आज़माऊँगी,
मैं अपने हाथ से उस की दुल्हन सजाऊँगी.....
कोई ग़म तेरी मोहब्बत में पराया ही नहींवो भी आए हैं जिन्हें मैंने बुलाया नहीं !!
हवा ने किया ऐसे स्पर्श तनजैसे छू कर मन मीत गयाकुछ भरा हृदय प्रेम मगरदृग जल से कुछ रीत गया।
सपने पूरे होंगे लेकिन आप ,
सपने देखना शुरू तो करें..!!
हम अपनी जान के दुश्मन को अपनी जान कहते है,मोहब्बत की इसी मिट्टी को हिन्दुस्तान कहते हैं,
जो ये दीवार का सुराख है साज़िश है लोगों की,मगर हम इसको अपने घर का रोशनदान कहते हैं !
कबीरा खड़ा बाजार में, सबकी मांगे खैर,न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर।
दोनो मज़बूर थे अपने अपने दायरों मे...ना वो बता सकी ना हम जता सके...
मुकेश को याद करते हुए...१०० साल {1923-2023}
हम बने ही थे तबाह होने के लिए
तेरा मिलना तो बस एक बहाना था
ये कैसा नशा है मैं किस ख़ुमार में हूँ तू आके जा भी चुका है मैं इंतज़ार में हूँ
हँसता रहता हु….क्यूँकि मुझे ‘आज’
की फ़िक्र हैं, ‘कल’ की नहीं
शर्तो पर सुल्तान बनने से कई गुना बेहतर है ,
अपने ही मौज का फकीर बने रहना ...
हर सुबह आपका ख्वाब आता है..आंख खुलने से पहले लबों पर..आपका ही नाम आता है….!!
तूफ़ान तेज था
अचानक से आया
हवायें मज़बूत थी
तोड़ना मुश्किल था
मुझे अंदाज़ा था कि
आए बिना मानेगा नहीं
रास्ते बंद करती तो
तोड़फोड़ करता
फिर दो दरवाज़ों को खोल दिया
एक आने का
एक जाने का
और थोड़ा...
जन्म लेना भाग्य की बात है
मृत्यु आना समय की बात है
मृत्यु के बाद लोगो के दिलों में
रहना ये कर्मों की बात है।
वक्त किसी का उधार नहीं रखता..
जो दोगे वो सूद समेत वापिस मिलेगा..!!
सुध बुध खो कर
सौंप दिया तुझको
मुझमें जो भी था मेरा
चाहे तो रख लो सहेज कर
चाहे तो छोड़ दो तजकर