दुनिया का सारा मोटिवेशन एक तरफऔर मां पापा का यह कहना कि घर के हालात तुम्हें बदलने है ,एक तरफ!
बड़ी चालाकी से खेल गया वो एक शख़्स जो मेरी ज़िंदगी है….
धोखा भी मुझे दिया और धोखेबाज भी मुझे कहा..!!
धीरे-धीरे
हर चीज बेवकूफ लगेगी...
जन्म, प्रेम, जिंदगी
और
आखिरी बेवकूफ़ी मृत्यु।
सुसिल ग़ाफ़िल
समझो जग को न निरा सपना
पथ आप प्रशस्त करो अपना
मैथिलीशरण गुप्त
पैसा बचाने पर ध्यान मत दीजिए,
बल्कि ज्यादा कमाने पर ध्यान दीजिए...
इक़ अरसे बाद मिलना हुआ
उसने बस इतना ही पूछा था
आपका मिजाज कैसा है...!
बोल नहीं फूटे बस..आंखे भर आईं
चालाकी ,चतुराई ,और बेशर्मी के मिश्रण
को
आज कल होशियारी कहते है
हमको गर्लफ्रेंड तो चाहिए पर पत्नी बिना बॉयफ्रेंड की चाहिए। यही कारण है कि हम पत्नी में सीता का आदर्श देखना चाहते हैं पर स्वयं में राम नहीं देखना चाहते हैं ।अगर हमको सीता चाहिए तो स्वयं को राम बनना...
"आजकल लोग अपने आप से ज्यादा मोबाइल सम्भाल के रखते है….क्योंकि रिश्ते सारे अब इसी में कैद हो के रहने लगे है"…!!
मंजिलों की परवाह ना कीजिए,
जिंदगी सफर है आप चाय पीजिए...
चिंतनहीन निर्णय और निर्णयहीन चिंतन कभी भी कारगर नहीं होते...
सदा दिवाली सन्त की ,बारह मास बसंत।
प्रेम रंग जिन पर चडे ,उनके रंग अनंत ।।
क्या लिखूं ऐसा जो पढ़कर वो रोए भी ना
और रात भर सोए भी ना..!!
बहुत कम लोग है जो मेरे दिल को भाते है,और उससे भी कम लोग मुझे समझ पाते है।
बेटियाँ जो सिर्फ़ बेटियाँ होती हैं
माँ की अनुपस्थिति में माँ
पिता की ग़ैरमौजूदगी में पिता।
रोज़ी-रोटी, हक की बातें जो भी मुँह पर लाएगा,
कोई भी हो, निश्चय ही वह कम्युनिस्ट कहलाएगा !
पैसे वालों की चमचागिरी करती है दुनिया,
गरीब और मजदूर की सुनता कौन है।
ये दबदबा, ये हुकूमत, ये नशा, ये दौलतें,
सब किरायेदार हैं, घर बदलते रहते हैं...!!
तू वो किताब है जिसमें कहानिया बोहत है,मै वो काग़ज़ हूँ जो कोरा बोहत है।
आज फिर नहीं आई नींद रात भर
क्योंकि कल पूरा दिन में सो रही थी !!