कदर कर लिया करो कुछ लोग बार-बार नहीं मिलते मेरे जैसे तो बिल्कुल भी नहीं मिलते...
उस एक लम्हे को ढूंढो, जो तुमको ढूंढता है गुज़रते लम्हों से यूं बदगुमान क्या होना....!!!
अपना जीवन आलस्य में बिताना,
आत्महत्या करना है।
हम ही पत्थर के हो गये ये सोचके..
कि ज़िंदगी तो फूल बनेगी नहीं...!!
तेरे !!! सजदे मे सर रख के मौला मेैंअपने सारे गमों को भूल जाता हूं…
चढ़ते हैं चढ़ाइयाँ बनाकर सीढ़ियाँ जिन काँधों पर,
फतह होते ही मंज़िल लतियाकर गिरा देते हैं लोग.
आँखों से निकले हर आँसू कोतलाश होती है अपनी एक मुस्कान की …
-मधुलिका
दवा की बोतलाे में प्यार भर के बेचो यार,
लोग बीमारी से नहीं तन्हाई से मारे जा रहे हैं...
ये सोचना ग़लत है के’ तुम पर नज़र नहीं,मसरूफ़ हम बहुत हैं, मगर बे-ख़बर नहीं
हम आपके इशारे पे घर-बार छोड़ दें ?दीवाने हैं ज़रूर ! मगर इस क़दर नहीं !!
~ आलोक श्रीवास्तव
क्या फायदा इतनी बड़ी दुनिया का
जब कोई घुमाने नही ले जा रहा है...
हमारी सादगी ही गुमनाम रखती है हमें,जरा सा बिगड़ जाएं तो मशहूर हो जाएं।
“मेरे देश के रिश्ते कमाल हैं, मेरे देश का दान-धर्म कमाल हैं, मेरे देश का खून कमाल हैं…”, यह कहना है, मेरी एक विदेशी दोस्त का।आप बताएं के हमारे देश में और क्या-क्या कमाल हैं? भारत देश महान है ❣️
मैंने अपनी ज़िंदगी के सारे, महंगें सबक सस्ते लोगों से सीखे हैं...
शायद तुम्हें कभी पता ना चले...
पर तुम्हारा ख़याल...
तुम्हारी परवाह...
मुझे अब भी है...
रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो चटकाय।
टूटे से फिर ना जुड़े, जुड़े गाँठ परि जाय॥
रहीमदास
किसी को उतनी ही तकलीफ देना..
जितनी बाद में खुद बर्दाश्त कर सको..!!
डर लगता है अब ..
किसी से बात करने में कही फिर से ..
किसी की आदत न लग जाये..
जिंदगी की रफ्तार उतनी ही रखना ,,कि गैर आगे सही मगर दोस्त पीछे ना रहे..
जीने कि "ललक" तब और ज्यादा होती है,
जब दादा कि बैसाखी उनकी "पोती" होती है..!!
विरक्ति
मेरे दिल मे मत झांकना धुंआ बहुत है ,
बची कुची ख्वाइशें जला रही हूँ मैं ।।