आदमी की सबसे अच्छी नस्लयुद्धों में नष्ट हो गई,देश का सबसे अच्छा स्वास्थ्यविद्यालयों मेंसंक्रामक रोगों से ग्रस्त है
~ धूमिल
मेरी काटों जैसी जिंदगी में फूल भर जाना,
प्रिय तुम बर्तन धुलने के बाद ऑनलाइन आ जाना...
किसी को छल कर ग़र तुम ख़ुश हो रहे हो,
तो ये तुम्हारी सबसे बड़ी नाकामयाबी है।
जबरदस्ती की नजदीकी से,
सुकून की दूरियां अच्छी हैं....
मैं रोज सुबह
कभी देर रात आता हूं
तुम्हारे शब्द पंखों के कोमल भावों को
कभी ओढ़ता कभी बिछाता हूं
किनारा कर लिया हर उस चीज़ से,जो डुबो रही थी मुझे
जिसमे निखरे वो भी इश्क़ था , जिसमे बिखरे वो भी इश्क़ है ...
गुलशन के निगहबानो हम को न भुला देना
कुछ ख़ार भी लाज़िम हैं फूलों की कहानी में
ऐ दीदा-ए-तर तुझ को मालूम नहीं शायद
बह जाते हैं ख़्वाब अक्सर अश्कों की रवानी में
कैसे उसने ये सब कुछ मुझसे छिपकर बदला , चेहरा बदला, रास्ता बदला बाद में घर बदला , मैं उसके बारे में ये कहती थी लोगो से , मेरा नाम बदल देना अगर वो शख्स बदला ..
किसी के लिए इतना भी मत गिर जाना कीजिसके लिए गिरे हो वहीं उठाने से इंकार कर दे।
किसी की गलती माफ़ की जा सकती है,
मगर भुलाई कभी नहीं जा सकती है....
लिया नहीं दरियाओं का एहसान क़भी,मैं कुआं खोद के पानी पीता आया हूँ।
निभा न सकेंगे एक भी दिन मेरा किरदार
मशवरें जो देते फिरते हैं हज़ार...!!
मैं कियूं करूं तुम्हारी बातों पर गुस्सा, जब मुझे पता हैं की तुम्हारे पास दिमाग नही हैं...||
चरित्र कि कसौटी पर स्त्री के जज़्बात निचोड़े जाते हैं,पवित्रता कि परीक्षा में हर बार उसके कपड़े उतारे जाते हैं,हर पीड़ा सहकर भी खामोश रहती है वो,उसके ज़ख़्म तो भर जाते हैं मगर निशां छोड़े जाते हैं..!!
हटा पतझर के पहरा, तनिक मधुमास आवे द
उदासल मन का देहरी पर, किरिन सविलास आवे द।
कसक एतना, मसकि जाता करेजा, दर्द अइसन बा
जिये के होसिला लेके, नया उल्लास आवे द।
झुकल आकास देखता, घुटन से जिन्दगी ऊबल
चुकल एहसास, बिनती बा, नया...
कुछ लोगों की सोच चाय ने डूबे बिस्किट,
की तरह होती है कब गिर जाए पता नहीं चलता....
न तातो न माता न बन्धुर्न दाता
न पुत्रो न पुत्री न भृत्यो न भर्ता ।
न जाया न विद्या न वृत्तिर्ममैव
गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि ॥
सम्मान सबका मगर इज्जत उतनी,जितनी सामने वाला करे...!!