हमें मालूम था सदमे मिलेंगे
मगर सोचा नहीं था इतने मिलेंगे
सोने से पहले इक काम तुम कर देना. तक़लीफ देते हैं ख़्वाब आने से पहले जगा देना. ~ मालती
सौभाग्य न सब दिन सोता है,
देखें, आगे क्या होता है?
रामधारी सिंह दिनकर
वक्त भी कैसी पहेली दे गया
उलझने सौ और जान अकेली दे गया
हर समस्या का समाधान होता है…तो अब इस समस्या का समाधान क्या है ?
मेहनत तो हर फिल्ड में करनी पड़ती है
बेकार पड़े रहने से लोहे में भी जंग लग जाती है
जो समझ सकें वहीं अपना हैं,बाकी सब सपना है...
नियत सच्ची होनी चाहिए, चेहरे तो अक्सर झूठ बोलते हैं...
माँ बनने की पीड़ा एक बाँझ औरत बख़ूबी जानती है, गर्भ में संतान न होने का दर्द प्रसव पीड़ा से भी ज़्यादा असहनीय होता है।
मैंने ख़त लिख रखा है आँखों मेंआप नजर मिलाकर पढ़ो तो सही
सबके अपने सत्य हैं,सबके अपने झूठ।कोई कहता लाभ इसे,तो किसी को लगती लूट।
जिसमें ‘मैं’ का फ़ायदा,‘मैं’ का है नुक़सान।‘मैं’ का बढ़ता मान देखकर,‘मैं’ की जलती जान॥ 💐
मैं किसी शख़्स से बेज़ार नहीं हो सकता
एक ज़र्रा भी तो बेकार नहीं हो सकता ।
संघर्षों की समर भूमि में, हमसे पूछो हम कैसे हैं,
कालचक्र के चक्रव्यूह में, हम भी अभिमन्यु जैसे हैं।
हरिओम पंवार
क्रोध की एक छोटी सी चिंगारी,
किसी भी रिश्ते को खाक में मिला देती है...
और इक वक़्त के बाद इंसान इतना ख़ामोश हो जाता है,
कि उसकी सांसें भी ख़ामोशी में ख़लल लगती हैं.
इश्क सीमित नहीं इंसान तक ,
चाय के भी तो आशिक होते है ।।
कुदरत ने हमें हीरा बनाया है,
बशर्ते जो घिसेगा वही चमकेगा…!
आत्मबल को भेदती इस तीक्ष्ण गर्मी में, मानसूनी बारिश की पहली फुहार हो तुम...
मर्द हो तो तुम्हारी हस्ती का इतना तो रौब हों, बगल से कोई औरत निकले तो बेखौफ हों...!!
अभी तो नापी है मुठ्ठी भर जमीं,
अभी तो आगे पूरा आश्मा बाकी है...