बस साथ निभाने की जो कसमें दिलाई गई थीउसका बोझ है पर प्रेम नहीं हैअब यदि वो प्रेम की बात भी कर रहे हैतो वो इसलिए कि मजबूरी हैकि पति पत्नी हैगहराई में जाकर देखा जायतो वो सामाजिक बंधन ही...
ये नफ़रत नहीं फितरत है मेरी ,
जिसे छोड़ दिया मतलब छोड़ दिया...
इंसानी फितरत है साहब,
सज़ा हो या सलाह सिर्फ दुसरो को ही दी जाती है….!!
अगर मोहोब्बत जिस्म से होतीतो तुमसे ही कियू होती हजारों से होती…
बड़ी कस केबांधे रक्खी है मुझेयादें तेरीबिछड़ना मुझे भी नहीइन से…..
एहसास की नमी बेहद जरुरी है हर रिश्ते में..!!
वरना रेत भी सूखी हो तो निकल जाती है हाथों से..!!
एक उम्र जी है मैंने तकलीफों में,
अब जो तकलीफ ना हो तो तकलीफ होती है…!!
लौट आना गर दिख भी जाएं जो रास्ता उसके घर का,
पता तो सही होगा और लोग भी मगर क़िरदार बदले मिलेंगे..!!
बाजार से खरीदी हुई मूर्ति के सामने हाथ जोड़कर धन मांगते हो,
अगर मूर्ति धन देती तो दुकानदार इसे बेचता ही क्यों ??
मैं क्या बताऊँ कैसी परेशानियों में हूँ, काग़ज़ की एक नाव हूँ और पानियों में हूँ.... ~ भारत भूषण पन्त
कभी-कभी दिल बेवजह इतना भरा होता हैलगता है कोई नाम भी पुकारेगा तो रो देंगे
यूँ तो हर शाम उमीदों में गुज़र जाती हैआज कुछ बात है जो शाम पे रोना आया
~ शकील बदायुनी
ख़्वाब ख़्वाब ही रह गया ,
जिंदगी ने कुछ यूं हिसाब किया..!!
मस्तमौला होकर जीना अपनी ज़िन्दगी,तुम परेशानियों से मत हारना,ज़िम्मेदारी कितनी भी परत चढ़ा दे सिलवटों की,कभी अपने बचपन को मत मारना..!!
मेरी ख्वाहिशों का शहर बहुत बड़ा थापर अब जिम्मेदारी की गलियों में अटक गया हूँ
विश्वास का टूटना, श्वास के टूटने से
कहीं अधिक कष्टकारी होता है.
काश जिंदगी भी माँ की तरह होतीदो आँसू देखकर सजा़एं माफ़ मर देती !!
तुझे अल्फाजों में लिखते-लिखते
यूँ ही ज़िंदगी की शाम हो जाये,
बस रहे तू ही आबाद मेरे लफ्ज़ो में,
चाहे ये जिंदगी नीलाम हो जाये...!!
किसी से क्या शिकायत करते साहब ,
दिल लगाने की खता तो हमनें भी की..!!
कुछ लम्हे ऐसे होते हैं,जो उम्र भर की याद बन जाते हैं,वो पल, वो वक्त, वो एहसास,दिल के सबसे करीब आ जाते हैं।