रात हवा तूफानी होगी
साथ रहो आसानी होगी।
अहमद महफूज़
आज फिर ग्रह मिले है, आज फिर कायनात ने संदेश भेजा है ,आज फिर उसकी याद आईं है, आज फिर गलतियों पर रोना आया है ,आज फिर …..।।
शंका का कोई समाधान नहीं ,चरित्र का कोई प्रमाण नहीं,मौन से अच्छा कोई साधन नहीं,और शब्द से तीखा कोई बाण नहीं।
~अज्ञात🌷
कंपटीशन इतना बढ़ गया है
कि अगर हम किसी को अपना दुःख बताते हैं
तो वो हमसे ज्यादा बताने लगता है।।
दिल पर तो बहुत ज़ख़्म ज़माने के लगे हैंख़ुद-दारी से लेकिन कभी रोया नहीं जाता
पहरे मिरे होंटों पे लगा रक्खे हैं उस नेचाहूँ मैं गिला करना तो बोला नहीं जाता
~ अज़हर नय्यर
जिंदा रहने के लिए भोजन जरुरी है। भोजन से भी ज्यादा पानी जरुरी है, पानी से भी ज्यादा वायु जरूरी है और वायु से भी ज्यादा आयु जरूरी है, मगर मरने के लिए कुछ भी जरुरी नहीं है। आदमी यूं...
आंधी ने तोड़ दी है दरख्तों की टहनियां
कैसे कटेगी रात परिंदे उदास हैं!
मेरे गाँव का मौसम बसंत हो गया है,यानी, तुम शहर से गाँव आई हो।
जो दूसरों की स्वाधीनता छीनते हैं, वास्तव में कायर हैं।
एक ऐसा दोस्त है मेरे पास,जब दुनिया ने साथ छोड़ दिया था वो मेरे साथ था !!
परिवर्तन केवल कर्म से आता है,
ध्यान और प्रार्थना से नहीं।
दलाई लामा
लड़ाई का उद्देश्य जीत होता है। संरक्षण में कोई संभव जीत नहीं होती।
ब्रह्मांड की सारी शक्तियां पहले से हमारी हैं।
वो हम ही हैं जो अपनी आंखों पर हाथ रख लेते हैं
और फिर रोते हैं कि कितना अंधकार है।
स्वामी विवेकानंद
चरित्र कि कसौटी पर स्त्री के जज़्बात निचोड़े जाते हैं,पवित्रता कि परीक्षा में हर बार उसके कपड़े उतारे जाते हैं,हर पीड़ा सहकर भी खामोश रहती है वो,उसके ज़ख़्म तो भर जाते हैं मगर निशां छोड़े जाते हैं..!!
तसल्ली से चाहिए मुझे तुम्हारा साथ ,
लम्हों में जन्मों की थकान कहाँ उतरती है !!
हमें भी इश्क़ के मारों पे रहम आता है ,
ये बोझ वो है जिसे हमनें भी उठाया है ।।
जो भीड़ से अलग हो,,
ज़रूरी नहीं वो हमेशा गलत हो,,
कीर्ति चन्द्रा
ए सुनो ना….मेरी सांसों को तुम्हारी सांसों की गहराई नापने दो आज…रात भर तुम्हें निहारना चाहता हूं…तो तुम मेरी बाहों में लिपट कर सो जाओ…मगर मुझे जागने दो आज
“संगीत”
लगाता है मन की पीड़ाओं परमरहम सुकून का
नफ़रत के खेल में बस ख़ून है,
मुहब्बत करो, इसमें सुकून है।