वृंदावन की कूंज गली मेंमही बैचने में गईनंद जी के लाल मुझे सामने मिले जबमें तो शरमा गई रेकनैया तेरी मुरली बैरन भई
उम्र छोटी, किरदार हजार, अनुभव लाख पाए थे,
तक़दीर कि मिली ठोकर से हम शून्य पर आए थे..!!
विरक्ति
हटा पतझर के पहरा, तनिक मधुमास आवे द
उदासल मन का देहरी पर, किरिन सविलास आवे द।
कसक एतना, मसकि जाता करेजा, दर्द अइसन बा
जिये के होसिला लेके, नया उल्लास आवे द।
झुकल आकास देखता, घुटन से जिन्दगी ऊबल
चुकल एहसास, बिनती बा, नया...
तुम इस शहर की रिवायत से
अनजान हो मेरे दोस्त,
यहाँ याद रहने के लिए
पहले याद दिलाना पड़ता है.....
सूरज, सितारे, चाँद मेरे साथ में रहें,जब तक तुम्हारे हाथ मेरे हाथ में रहें,शाखों से टूट जाए वो पत्ते नहीं हैं हम,आंधी से कोई कह दे की औकात में रहें !
थोड़ी सी आवारगी भी जरूरी है जिंदगी में,
कैद में रहकर परिंदे अक्सर उड़ना भूल जाते है।
साथ मेरे चलना इतना आसान तो नहीतुझे अभी दुनियां की पहचान तो नहीबेहतर है के छोड़ दो तुम जिद्द करनाजिंदा इश्क के आग मैं जलना ये तुम्हारे मिज़ाज़ मैं नही !!
कमाने वाले को पता होता है पैसे कैसे कमाए जाते हैं,
बैठके खाने वाले लोग हाथ का मैल कह देते हैं।
अनवर चतुर्वेदी
यादों से न पूछें तरबियत उनकीये वो आजाद परिंदे हैं जो पल में सागर पार कर लेते हैं
समुद्र जब लहरे लेना छोड़ दे तो, समझ लेना चाहिए कि अब सुनामी आएगी..!!
टमाटर का भाव खाना एक बार समझ आता हैं, लेकिन अदरक शक्ल ना सूरत फिर भी 200 रू किलो...शायद इसलिए ही इसे कूटा जाता है..
मैं आज भी अपने मुकद्दर से शर्त लगाती हूं...
भरी बरसात में कागज की पतंग उड़ाती हूं...!!
बिछड़ना नहीं,
सम्मान ख़त्म हो जाना प्रेम का अंत हैं...
मन में रखते हीन भावना, पेशे से शुद्ध चाटुकार हैं,
बनते कद्दावर नेता हैं, लेकिन फितरत से गद्दार हैं..!!
कुछ भी मेरा नही मेरे पास,
ये बदुआये भी लोगों की दी हुई है..
घना जंगल, अंधेरी रात, रास्ते भी सुनसान हैं,कैसे मिले मंज़िल जब खौफनाक हर इंसान हैं..!!