थामा था हांथ सोचकर "कि शायद सफ़र लम्बा होगा!!
भूल से भूल की जालिम" ये भी उड़ता परिंदा होगा !!
खूब समझती है वो रूदन अपने लाल का,"मां" पृथ्वी पर साक्षात् भगवान होती है,
घर, समाज, ईश्वर किसी का उसे भय नहीं,अपनी औलाद में ही उसकी जान होती है,
और नहीं करती फिक्र कभी धूप - शीत की,हर आफत से बचा ले...
ये जो मां की मोहब्बत होती है नायह तमाम मोहब्बतों की मां होती है..!!
सबके अपने सत्य हैं,सबके अपने झूठ।कोई कहता लाभ इसे,तो किसी को लगती लूट।
जिसमें ‘मैं’ का फ़ायदा,‘मैं’ का है नुक़सान।‘मैं’ का बढ़ता मान देखकर,‘मैं’ की जलती जान॥ 💐
मुझे अगर कोई समझ पाया है तो वो मैं,
खुद हूं बाकी सब तो बस अंदाज़ा लगा रहे हैं..
तुम न कर सकोगे मेरे दिल के दर्द का इलाज़ ,
ज़ख्म को नासूर हुए मुद्दतें गुजर गयीं
ज़माना ख़राब है! भरोसा थोड़ा सोचकर समझकर करिये…यहां क़ातिल भी सिर्फ खुदा के बन्दों के "भेष" में आते है…
सच्चाई हमेशा थोड़ी,
निराशाजनक होती हैं।
वो चीज़ जिसे सुकून कहते हैं, हम भूल गए हैं कहीं रखकर...
ठाकुर का कुँवा,
ठाकुर का खेत
ठाकुर की हवेली
अब नहीं चलेगा....
तुम्हारे साथ बिताए हुए वो कुछ लम्हें दोस्त ...
उम्र भर की मेरी आवारगी पे भारी हैं...
एक अरसे से हमारी बोलचाल बन्द हैफिर भी क्या यादों की आवाजाही बन्द है
फर्ज़ बनता है "छोटो" का! कि उन्हें, समझाया जाएबड़े, बड़े हैं! मतलब ये नहीं कि गलत नहीं हो सकते
जरूरत पड़ने पर जो साथ दें,
वो अपने से बेहतर होता हैं...
दिल खोलकर तू चाहत का इज़हार करके देख…
नशा चाय से ज्यादा है इसमें, तू मुझसे प्यार करके देख…
जख्म खरीद लाया हूंइश्क के बाजार सेदिल जिद कर रहा था कीमुझे मोहब्बत चाहिये
मेरे दिल को चकनाचूर करके,
उसने मेरे भरोसे को तोड़ा था,
दुनिया समझ बैठा था जिसे अपनी,
उसने ही अकेला छोड़ा था.
गैरों पर कौन गौर करता है , बात जब भी चुभती है अपनों की चुभती है...
झूठ बोलना पाप होता है लेकीनआत्मविश्वास के साथ झूठ बोलना राजनीति...
तन्हा जीवन, उदास हम, किस्मत पर कांटे उग आएं हैं,
क्या सुनाएं दास्तान अपनी, अंदर कितने राज़ छिपाएं हैं..!!