"पड़ते जिस ओर चरण मेरे
भूगोल उधर दब जाता है।"
दिनकर जी
जीवन में हमेशा एक दूसरे को,
समझने का प्रयत्न करे परखने का नहीं...
मैंने कब चाहा कोई मेरे साथ चले,
"कहा ज़रूर
दो नावों पर सवार था‚
उसकी ज़िन्दगी का सफ़र;
मैंने ख़ुद की ...
दफन कर दिया था जो किरदार सुकून कि तलाश में,
आज परछाईं से उसकी सामना हुआ तो रूह कांप गई..!!
एक फूल हैं…जो बिना शोर मचाए और भी खूबसूरत तरीके से खिलता हैं…
बिन तुम्हारे कभी नहीं आईक्या मिरी नींद भी तुम्हारी है
~ जौन एलिया
काश ये सिर्फ शायरी ना होकर हकीकत हो जाती,
जी भरकर देख लेता तुझे अश्कों की बरसात हो जाती..!!
विरक्ति
कौन सीखा है सिर्फ बातों से ,
सबको एक हादसा जरूरी है।
जॉन एलिया
तुम बदलो तो मजबूरियां है बहुत,हम बदले तो बेवफा हो गए ….!!
हमको गर्लफ्रेंड तो चाहिए पर पत्नी बिना बॉयफ्रेंड की चाहिए। यही कारण है कि हम पत्नी में सीता का आदर्श देखना चाहते हैं पर स्वयं में राम नहीं देखना चाहते हैं ।अगर हमको सीता चाहिए तो स्वयं को राम बनना...
बात करने से ही बात बनती है...
बात ना करने से, बातें बन जाती है...!
अजीब है..
औरत खुल कर हंस नहीं सकती बद किरदार कहते हैं,
मर्द खुल कर रो नहीं सकता कायर कहते हैं..
खुद की पहचान बनाने मे जो मजा हैं,
वह किसी की परछाई बननें मे कहा हैं यारों...
दुश्मन भी दुआ दें फितरत ऐसी है
अपने ही दगा दे किस्मत ऐसी है!
आंखों के समॅंदर में तूफ़ान का आग़ाज़ हैं ,अब कोई अपनी कस्तियां संभालें भी तो कैसे..!!
ये मत पूछो पहचान कहां तक है ,
तू बदनाम कर तेरी औकात जहां तक है..
कुछ गधो ने मिलकर कुत्ते को शेर बना दिया, अब ये गधा पूरे देश को समझाने मे लगा है की वो सचमुच का शेर है...
भरोसा बहुत कीमती हैजिंदगी कम पड़ जाती है इसे कमाने में
शुरू-शुरू में सब यही चाहते हैंकि सब कुछ शुरू से शुरू होलेकिन अंत तक पहुँचते-पहुँचते हिम्मत हार जाते हैंहमें कोई दिलचस्पी नहीं रहतीकि वह सब कैसे समाप्त होता हैजो इतनी धूमधाम से शुरू हुआ थाहमारे चाहने पर।
~ कुँवर नारायण