तेरे वजूद से हैं मेरी मुक़म्मल कहानी,
मैं खोखली सीप और तू मोती रूहानी...!!
कुछ चीजें शब्दों से नहीं..
साथ होने से खूबसूरत होती हैं..!!
ताश में जोकर और अपनों,
की ठोकर अक्सर बाज़ी घुमा देते हैं....
रिश्ता गहरा हो या न हो,
विश्वास" गहरा होना चाहिए .
पत्थर दिल बनना मेरी मजबूरी है ,अगर में भीखर गया तो कोई मुझे समेट नहीं पाएगा…
उस से मिलना तो उसे ईद-मुबारक कहनाये भी कहना कि मिरी ईद, मुबारक कर दे...
तुम्हे केसे बताएं तुमसे क्या चाहते हैबस वफा के बदले थोड़ी वफा चाहते हैहमसे मोहब्बत की इंतहा ना पूछोहम तो सनम तुम्हे बेइंतहा चाहते हैतुझे मानते हैं तुझे पूजते हैतुझमें ही अपना खुदा चाहते हैअपने आशिक पे थोड़ा सा एहसान...
मुजरिम हो गया इस कद्र खुद की नजरो में
स्वाभिमान छोड़ प्रेम ढूंढ रहा था पत्थरों में
जो मेरे ख़यालात से रूबरू नहीं, वो मेरी मोहब्बत के लायक नहीं.
जो अर्थ ही ना समझें,
उनपर शब्द क्या ज़ाया करना....
सनकी 🦋
गम से खाली नहीं जिस्म का कोना कोई हम रहे न रहे हम पे मत रोना कोई..!!
इस दौर में इज्जत दौलत पर निर्भर करती है ,
जो जितना अमीर होगा उसकी उतनी इज्जत होगी ...
मकानों को घर मे तब्दील करने वाली स्त्रियांकरती हैं अनगिनत सब कुछ हर बारअपने आत्मसमान को दांव पर लगाकरफिर भी पाती है तिरस्कार अक्सर उन्हीं अपनों से जिनके लिए वह सबकुछ करती है
वही फिर मुझे याद आने लगे हैंजिन्हें भूलने में ज़माने लगे है
जाने किस हुनर से ख़ुदा हो जाते हैं लोग
एक हम हैं कि सलीके के इंसाँ न हो सके
इंतज़ार करने वालों को उतना ही मिलता है,
जितना कोशिश करने वाले छोड़ देते हैं!
हजारों की भीड़ में भी पहचान लेते हैं,पापा कुछ कहे बिना ही सब जान लेते हैं..!!
हमारा चरित्र कितना ही दृढ़ हो, पर उस पर संगति का असर अवश्य होता है।"
प्रेमचन्द
उम्मीदों का दीया गर न होता
बुझ जातीं जाने ज़िंदगियाँ कितनी
आज फिर जीने की तमन्ना है,आज फिर ' मरने' का इरादा है