शोहरत की बुलंदी भी पल भर का तमाशा है जिस डाल पे बैठे हो वो टूट भी सकती है
तेरे आने की नही उम्मीद परदेखते हैं आज भी रस्ता तेरा
कभी कभी बहुत ग़ुस्सा आता हैं ख़ुद पर ,मैं जैसे हूँ वैसे क्यों हूँ ?
मुसीबत में भी रास्ता निकाल लेते हैं..
वक्त कैसा भी हो मां बाप संभाल लेते हैं..!!
बहुत महंगा पड़ता है वो रिश्ता, जिसमे खुद को सस्ता कर दिया जाए...
सफल होने के लिए तुम्हें.. खुद की दुनिया में कैद होना पड़ेगा..!!
मैं बेरागी हूं… महादेव नहींपर तुम्हारी काया से अधिक तुम्हारी आत्मा को चाहूंगा..!
मैं प्रेमी हूँ… कान्हा नहींपर तुम्हारे नाम को सदैव अपने आगे लगाऊंगा..!
मैं मर्यादित हूं… श्रीराम नहींपर तुम्हारे अलावा मैं किसी और का न हो पाऊंगा..!
किसी रोज सुबह का कुछ ऐसा नजारा हों
खुलें जब ऑंखें सामने चेहरा तुम्हारा हों.!
जिनको विरासत में सब कुछ मिल जाता है, वे संघर्ष का वास्तविक अर्थ ही नही समझ पाते हैं!!
अनवर चतुर्वेदी
जो आपके दिल के जितना ज्यादा करीब होगा..
वो ज़ख्म भी उतना गहरा देगा...
जो चले गए बड़े सकूं से होंगेजो जी रहे उनके दिल से पूछो ..!!
पसंद उसे करो जो परिवर्तन लाए,
प्रभावित तो मदारी भी कर लेते हैं....
आप किसी को तभी तक प्यारे लग सकते हो
जब तक आप उसके लिए उपयोगी हो।
साधू भूखा भाव का,
धन का भूखा नाहिं,
धन का भूखा जी फिरै,
सो तो साधू नाहिं।
कबीरदास
अक्लमंद और बेवकूफ इंसान मे कोई फर्क
नही ये दोनो किसी के बाप की नही सुनते..!!
तुम अपनी इज्जत करके तो देखो,
लोग अपने आप औकात में आ जायेंगे।
जब दिल किसी एक पर ठहर जाए तो..ज़ेहन किसी और को कुबूल नहीं करता..!
पतझड़ में सिर्फ़ पत्ते गिरते हैं,
नज़रों से गिरने का कोई मौसम नहीं होता.....
काश ये सिर्फ शायरी ना होकर हकीकत हो जाती,
जी भरकर देख लेता तुझे अश्कों की बरसात हो जाती..!!
विरक्ति
कोई तो जिद करे हमसे भी मिलने की ,
हमें भी महसूस हो हम भी आरजू है किसी की ..!!