हम दोनों जानते हैं
वह दिन बुरा था सबसे बुरा
जिस दिन हम आखिरी बार मिले थे
लेकिन
आज मैं दावे से कह सकता हूं
वह दिन
इतना भी बुरा नहीं था
कम से कम
उस दिन हम दोनों आखरी बार...
बीते मीठे लम्हों का है जो आसराहसरतें खामोश ठहरा ज़ज्बातो का दायरातेरी भीनी आंखों में खो जाए मन मेरातुझसे ही जाने क्यूँ मेरा है ऐसा राब़्ताचादर की सिलवटें में है जो थोड़े फ़ासलेतेरे पास ना होने का करे हर पल...
जिम्मेदारी वो पिंजरा है..
जहां इंसान आजाद होकर भी कैद है..!!
किसी भी इंसान को पढ़ना हो तो
वहाँ से पढ़ो,
जहाँ पर
वह खामोश हो जाता है।
हमसफ़र वक़्त को बदलने वाला होना चाहिए,
वक़्त के साथ बदलने वाला नही….!!
कोई भी नशा आदमी के लालच से बड़ा नहीं होता!
मदन कश्यप
छुप छुप कर क्यूँ पढ़ते हो अलफाजों को मेरे,सीधे दिल ही पढ़ लो सांसों तक तुम ही हो..!!
समंदर में ले जा कर फरेब मत करना,
तू कहे तो किनारे पे डूब जाऊं में।।
रोटी कमाने की फिक्र,
रोटी खाने भी नहीं देती...
रब से कभी उम्मीद मत छोड़ना ,
और दुनिया से कभी उम्मीद मत करना
जिद्दी बनना सीखो..
क्योंकि हर चीज क़िस्मत में नहीं लिखी होती..!!
यदि पांडवो सी विवशता आएगी,
तो हिस्से में श्री कृष्ण भी आयेंगे !
बहुत आसान नहीं थानज़दीकियों का फ़ासलामीलों तय किया हैअपनों को अपना समझते समझते!
चल के आई है मेरे पास, तो कुछ ऊँचा मांग
चाँद तारे तो मेरे चेले भी ला सकते हैं ..!!
ज़रा अपना लहज़ा संभालो,
बातें नस्लो का पता देती हैं...
आंधी ने तोड़ दी है दरख्तों की टहनियां
कैसे कटेगी रात परिंदे उदास हैं!
सबको दिलासा देने वाला शख्स,
अपने दुखो में हमेशा अकेला रह जाता है...
अक्सर दिखावे का प्यार ही शोर करता है
सच्ची मोहब्बत तो इशारों में ही सिमट जाती है
दुःख देखिएहम सब अकेले हैंफिर भी हमारे पास समय नहीं हैकिसी अकेले के लिए।
जीविका अगर सर्वोपरि नही होती, तो ईश्वर की प्रतिमाएं कभी दुकानों में नही बिकती।