कभी इसका दिल रखा
और कभी उसका दिल रखा
इसी कशमकश में भूल गए
खुद का दिल कहाँ रखा
मैं दोस्ती में हर एक बढ़ता हाथ चूमता हूं
बस शर्त ये हैं कि बन्दा नमक हराम न हो
किसी और से प्यार करना,जरूरत बन गई है उनकी,मेरे दिल को रुला देना ही,फितरत बन गई है उनकी !
जुमलों में विकास ढूँढ रहे हो…
बड़े नादान हो ज़हर में इलाज ढूँढ रहे हो…
दिखावे के शरीफ बनने की आदत नही हमारी,..शब्द चाहे जैसे भी हो खुलेआम बोलते है हम..!!
और इक वक़्त के बाद इंसान इतना ख़ामोश हो जाता है,
कि उसकी सांसें भी ख़ामोशी में ख़लल लगती हैं.
बहुत ज़्यादा फ़र्क पड़ने के बाद..
फ़िर कुछ ख़ास फ़र्क नहीं पड़ता..!!
किसी के लिए इतना भी मत गिर जाना कीजिसके लिए गिरे हो वहीं उठाने से इंकार कर दे।
अब जो है, कुछ भी नहीं है हमारातेरा ख़्वाब आख़िरी था इन आँखों में_!!
जो रिश्ते गहरे होते हैं,
वो अपनेपन का शोर नहीं मचाते!
विचारों के युद्ध मे,
पुस्तकें ही अस्त्र है।
जिन्हें तकदीर रुलाना चाहे ,उन्हें बेक़दरों से इश्क़ हो जाता है.
जो कल थे,वे आज नहीं हैं।
जो आज हैं,वे कल नहीं होंगे।
होने न होने का क्रम,
इसी तरह चलता रहेगा,
हम हैं,हम रहेंगे, ये भ्रम भी,
सदा पलता रहेगा।।
अटल बिहारी वाजपेई
स्त्री और पुरुष एक दूसरे के पूरक हैं।
आपसी सहयोग के बिना दोनों का अस्तित्व असंभव है
तुम्हें पाना मेरी मंजिल नहीं है , तुम्हें सारी उम्र खुश देखना मेरा ख्वाब है...
अगर कभी वक़्त में उनसे मुलाक़ात होगीसिर्फ़ रस्म निभाने की शायद वो क़वायद होगीहँसी आती है मुझको अब दरमियाँ आयेवजहों पर ,के अब एक अजनबी बन कर पहचान होगी…
इंसान का कर्म ही उसे सुल्तान बनाती है
जरुरी नहीं है हर किसी के पास डिग्री हो..
यूँ भी हयात में है, जवानी की अहमियत
जैसे शदीद प्यास में पानी की अहमियत
रफ़्तार में रहें न रहें और बात है
लेकिन है ज़िंदगी में रवानी की अहमियत
लोगों ने सिर्फ़ सुन के, बजा दी हैं तालियाँ
किरदार को पता है कहानी...
यूँ तो अमरोहा से मेरा कोई नाता ना था
फिर कमबख्त नामुराद मोहब्बत हुई
और उसपर सितम तुझ बेवफा से हुई
और हम खुद बे खुद
जॉन ऐलिया के मुरीद हो गए
हम भी दरिया हैं,हमें अपना हुनर मालूम है
जिस तरफ भी चल पड़ेंगे,रास्ता हो जाएगा.
बशीर बद्र