मौत का एक दिन मुअय्यन है
नींद क्यूँ रात भर नहीं आती
सुख में होंगे तो करेंगे खुलासे !अब दुख में क्या तमाशे करू !!
कंपटीशन इतना बढ़ गया है
कि अगर हम किसी को अपना दुःख बताते हैं
तो वो हमसे ज्यादा बताने लगता है।।
और ,फिर मेरा खुद को संभाल के संभल जाना ही इस आधी अधूरी प्रेम कहानी का अंत होगा।
जब प्रतिष्ठा बढ़ेगी तो निंदा का टैक्स तो चुकाना ही पड़ेगा...
निंदा से ना घबराएँ ये तो प्रगति की निशानी है...
हर लम्हा सांसें बुड्ढी हो रही है
जिंदगी मौत के साये में हैं फिर भी जिद्दी हो रही है
बेवफा को बेख़बर रखना मेरी मौत की खबर से
जमाने के लिए आंसू हैं वो अंदर हस रही है!!
किताबें ऐसी शिक्षक हैं जो बिना कष्ट दिए,
बिना आलोचना किए और बिना परीक्षा लिए हमें शिक्षा देती हैं।
ये चार दिन की जिन्दगी, किस किस से कतरा के चलूं, खाक हूँ मैं…खाक पर…क्या खाक इतरा के चलूं...
हजार जताने वालों से एक निभाने वाला बेहतर है
उलझनें भी मीठी हो सकती हैं,
जलेबी इस बात की ज़िंदा मिसाल है।
कभी उसे भी तो खले ना मिलना हमारा ,सिर्फ मैं ही क्यों रोयु ,याद करू और गिड़गिड़ाऊं ।।
मंजिल चाहें कितनी भी ऊँची क्यों न हो,
रास्ते हमेशा पैरों के नीचे ही होते है।
बिजली विभाग तो यूंही बदनाम है
काटना तो कोई तुमसे सीखे...
मैं नहीं कहता मुझे औरों से बेहतर चाहिए
मुझ को जितनी है ज़रूरत उतनी चादर चाहिए
हैं परेशाँ इस लिए भी लोग अपनी प्यास से
प्यास की ख़ातिर सभी को इक समुंदर चाहिए
मुद्दतों भटके हैं मेरे ख़्वाब सारे दर-ब-दर...
न चाहते हुए भी किताबों से, हमेशा दोस्ती रखनी पड़ेगी।
हम किताबी कीड़े है मेरी जान!, हमसे मोहब्बत महंगी पड़ेगी।।
सेजल
इश्क़ और तबियत का कोई भरोसा नहीं मुर्शिद , मिजाज़ से दोनों ही दगाबाज़ हैं ..!!
!!कर्जदार रहेंगे हम उस हकीम के...
जिसने दवा में उसका दीदार कर दिया...!!
मुझे हजार चाहने वाले नही..
बस एक समझने वाला चाहिए..!!
जूठ का ज़माना है
सच बोलकर मर जाना यारों !
कान भरने वाले से दूर रहा करो,
वरना ये लोग अपनों से दूर कर देंगे…