किसी एक को खुश करने के लियेलोग अपने लोगों से दूरी बना लेते हैंऔर एक दिन ऐसा भी आता है, किजिसके लिये पूरी दुनिया से अलग हुयेवो खुद अकेला छोड़कर अलग हो जाता है
तुम्हारी ख़ातिर तो बदला मैंने खुद को।
फिर तुम....किसकी ख़ातिर बदल गए
नजरें झुकी हैं पर इश्क़ भी बरकरार है
हया है चेहरे पर और इज़हार भी कमाल है …
सुनो कृष्ण!!मौसम हरे रखनाऔर मन गीला
और फिर मेरा संभल जाना ही,
इस प्रेम कहानी का अंत रहा...
ख कर लगे है तुझको ये राब्ता पुराना है
तेरी ही बाहों में जैसे गुज़रा इक ज़माना है
भारत हमको जान से प्यारा है
सबसे न्यारा गुलिस्ताँ हमारा है
खिड़कियां मत खोलो
अजनबियों के वास्ते
कितने ही खास हो जाएं
पर ये वफादार नही होते
जागना भी कबूल है तेरी यादों में रात भर तेरे एहसासों में जो मजा है वो नींद में कहा!!
कोशिश करे ,शिकायत नहीं...
अपनी क्या फिक्र करें, हम जिंदा हैं वही काफी है...
जो बातें हम पी जाते हैं,वो बातें हमें खा जाती है..!!
उसके साथ रहो जिनकी तबीयत खराब हो, लेकिन उनके साथ कभी न रहो जिनकी नियत खराब हो..!!
दर्द से मेरा दामन भरदे या अल्लाह...
सियासत संभल कर रहे…
जिस दिन जनता एकजुट हो गई..
समूची राजनीति का बोरिया बिस्तर बंध जायेगा !
तू नहीं तो कोई और सही,
कोई और नहीं तो कोई और सही,
बहुत लंबी हैं जमीं, मिलेंगे लाख हंसी,
इस जमाने मे सनम तू अकेली तो नहीं.
रखना अपने शौक को ज़िन्दा,किसी के मोहताज मत होना,शरीर भले ही लाचार रहे,मगर दिमाग से अपाहिज़ मत होना..
गुरुर है मुझे अपने भी किरदार पर , कोई तुमसा नहीं तो कोई मुझसा भी कहाॅ॓ है ..!!