तू शरीक रहे मेरे जनाजे में ऐसी सौगात हो,भले तेरी ही बेवफ़ाई के कारण मेरी मौत हो,और दो फूल तुम भी चढ़ाने आना मेरी कब्र पर,मुकम्मल इसी बहाने शायद हमारी मुलाकात हो..!!
हिम्मत इतनी थी की समुंदर भी पार कर सकते थे हम , मजबूर इतना हुआ की दो आंसुओ ने डूबो दिया ..!!
ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैंफिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं।
मेरे दोस्तों सामने हो मंजिल तोरास्ते ना मोड़ना जो भी मन में हो वो सपना मत तोड़ना कदम कदम पर मिलेगी मुश्किल आपको बस सितारे छूने के लिए जमीन मत छोड़ना
थोडी आज़ादी थोडी पाबंदी
थोडा वक़्त थोडी चाहत
थोडे बादल थोडी बारिश
थोडी नादानी थोडी समझदारी
थोडा तुम थोडी मैं
बस और क्या चाहिए ??
मिलकर पूरा हम हो जायेंगे
ना थोडा बचेंगे ना पूरा
दोनों मिलकर आकाश भर में समाएंगे
फिर ख़्वाब सारे हकीक़त...
शक्ल पर मरने मिटने वाले बहुत देखे ,
हृदय की तिजोरी तलाशने वाला न मिला ।
जब नादान थे तो जिंदगी के मजे लेते थे, समझदार हुये तो जिंदगी मजे ले रही है !
दर्द हल्का है साँस भारी हैजिए जाने का कैसा रस्म जारी है
चाहे राजा हो या किसान, वह सबसे ज़्यादा सुखी है जिसको अपने घर में शान्ति प्राप्त होती है।
कोई सवाल ज़िंदगी का हल नहीं हुआ,पढ़ने में सारी उम्र गवांने के बावजूद - अंकित मौर्य
सच्ची मोहब्बत एक न एक दिन लौटकर जरूर आती
हैं, या तो Sorry बोलने या फिर शादी का कार्ड देने
तजुर्बा मेरी आँखों में देखिए
हरकतों से, मैं आज भी बच्चा हूँ...!!
दिल से दिल का फासला कुछ यूं हो जाए…
इधर मैं याद करू और उधर तुम्हे याद आए …
टूटते हुए रिश्तों को बचाइए,
बिना बुलाए अपनों के घर जाइए,
फल-मिठाई ना सही,
कम से कम टमाटर ही ले जाइए।
तन्हा होना नज़र अंदाज़ होने से बेहतर है।
पुस्तक और प्रकृति से बेहतर दोस्त,इस दुनिया में और कोई नहीं !
हजारों बातें दिल में दफन करके ,
अब खामोश रहना पसंद है मुझे ..!!
रोने वालों से कहो उनका भी रोना रोएं ,
जिनको मजबूर हालात ने रोने ना दिया ।।
वो जो हर दर्द अपने दिल में छुपाए बैठा है
रो पड़ेगा कभी लगना आहिस्ता गले उसके
अपने पिता के काम पर कभी मत शर्माना,
वो शर्म खो देते है,
तुम्हारी अच्छी ज़िंदगी बनाने के लिए