कभी उसे भी तो खले ना मिलना हमारा ,सिर्फ मैं ही क्यों रोयु ,याद करू और गिड़गिड़ाऊं ।।
प्रतीक्षा मे प्रेम अमर हो जाता हैं,और रूह हमेशा के लिए उम्र-कैद !!
दुनिया बड़ी भुलक्कड़ है केवल उतना ही याद रखती है,
जितने से उसका स्वार्थ सधता है।
हज़ारी प्रसाद द्विवेदी
जो गलत है उसका विरोध खुलकर कीजिए, चाहे राजनीति हो या समाज इतिहास आवाज उठाने वालों पर लिखा जाता है तलवे चाटने वालों पर नहीं।
तुम रूठना
तो ऐसे रूठना
जैसे माॅं रूठती ही
माॅं मेरी
सुबह की बात
शाम तक भूल जाती है...
सपना गर्ग
व्यक्ति में इतनी ताक़त हमेशा होनी चाहिएकी अपने दुःख अपने संघर्षो से अकेला जूझ सके
जब वजूद में 'माँ' मिलती हैतो सारी पीड़ाएँ नष्ट हो जाती हैंऔर मुझमें 'माँ' शेष रह जाती है।
-नेहा यादव
बगावत हमेशा ईमानदार और स्वाभिमानी लोग ही करते हैं,
चालाक लोग तो चापलूसी और तलवे चाट कर अपना काम निकालते रहते हैं।
“ये फ़र्ज़ रहे ध्यान में,लिखा है संविधान में,अगर कोई भी बात,तेरा मन गई कचोट कर,तू वोट कर,ये प्रश्न तेरे बल का है,सवाल तेरे कल का है,समय ये फ़ैसले का फिर से,आ गया है लौट कर,तू वोट कर”
शाख से टूटे हुए फूल ने सबक दिया, ज्यादा अच्छे बनोगे तो लोग तोड़ देगें..
उसे छोड़ देना ही उचित हैं,
जो आपके होने का मूल्य ही न समझे…
संभोग करना आसान हैं,
और शादी करना मुश्किल हो गया हैं...
कृष्ण में लीन मीरा
कृष्ण-प्रेम में मग्न है रहती
सुधबुध है खोई अपनी
बावरी कृष्ण-भजन में डूबी रहती
दरस की अभिलाषी मीरा
विष को भी अमृत मान है पी लेती
मोह कहाँ है उसे इस जग से
हर साँस वो गिरधारी को समर्पित करती
ऐसी है दर्श दिवानी...
इतिहास गवाह है की कोई भी वास्तविक परिवर्तन
चर्चाओं से कभी नहीं हुआ।
मैंने ताले से सीखा है साथ निभाने का हुनरवो टूट गया पर चाभी नहीं बदली…!!
पहले औरत नसीब लेकर आती थी, अब औरत नसीब देख कर आती है।
जिन्हें हालात से आता है टकराना, उनको मुसीबत भी खुशी की तरह लगती है…
योग्यताएं कर्म से पैदा होती है,जन्म से हर व्यक्ति शून्य होता है...
गम से खाली नहीं जिस्म का कोना कोई हम रहे न रहे हम पे मत रोना कोई..!!
जरूरी नहीं कि काम से ही इंसान थक जाए,
कुछ ख्यालों का बोझ भी, इन्सान को थका देता है !