आसमां को गुरूर था कि वो सबका मुकाम हैबारिश को मगर जमीं ही रास आई!
किनारा न मिले तो कोई बात नहीं,
दूसरों को डुबाके मुझे तैरना नहीं है।
सबको लगता है खुश हूं मैसब के सब धोखे मे है…
ख्वाहिशें अनेक हैं "मन" में,
लेकिन परिस्थितियां "दम" तोड़ रही हैं,
खुशियां दिखा कर "मुकद्दर",
मेरे सारे "ख्वाब" तोड़ रही हैं,
घर "जर्जर" है, बहन भी "ब्याहना" है,
लेकिन ये "मुफलिसी" भी भारी है,
मध्यम वर्गीय "पुरुष" के कांधे पर
"परिवार" सबसे बड़ी जिम्मेदारी है..!!
विरक्ति
तिरी ज़मीं से उठेंगे तो आसमाँ होंगे
हम ऐसे लोग ज़माने में फिर कहाँ होंगे
इब्राहीम अश्क
वो सब देख रहा है आपकी पार्थना भीआपका संघर्ष भी आपकी तकलीफ़ भीऔर आपका संयम और कर्म भी...
जितनी शिद्दत से तुझे चाहा था
तूझे भूलने में उतनी ही ज़हमत उठानी पड़ रही है..
तुमने तोड़ा है इतने टुकड़ों में मुझे तुम क्या जानो खुद को समेटने में कितनी मशक्कत उठानी पड़ रही है..
ना रातों को चैन है ना दिन...
वो अपने ही होते हैं जो लफ्ज़ों से मार देते हैं !
मूर्ख दूसरों पर हसते हैं, और बुद्धिमान खुद पर...
उसे उस हद तक चाहो ,
वो भी बोले अच्छा ठीक हैं करलो ..!!
जिसके भी भाव बढ़े उसे त्याग दो,
चाहे "बाबु" हो या "टमाटर.🍅
जैसे-जैसे आप उतार-चढ़ाव देखते हैं,
याद रखें कि चुनौतियाँ आगे बढ़ने के अवसर हैं।
वे आपके लचीलेपन, आपके चरित्र का परीक्षण करते हैं,
और आपको अपने एक मजबूत संस्करण में आकार देता है।
जब आगे का रास्ता अनिश्चित लगे,
अपने विचारों को एकत्रित करने के...
इंसान की कदर तब होती है जबउसके कारनामे लोगों के काम आते हैं..!!