सुप्रीम कोर्ट तक लेकर जाऊँगा मैं इस बात को, कि बहुत गौर से देखा था तुमने मेरी चाय को ...
जमाना वो आ गया है की..
जहर एक देता है जहरीले सभी लगने लगते है..!!
कितना ख़ास बनाया था हमें ईश्वर ने
हम कितने आम बन गए हैं
मशीनों से ग़ुलामी कराते कराते
मशीनों के ग़ुलाम बन गए हैं
एक शाम की मोहताज हैं दुनिया सारी ,एक शाम हल्की सी हर दर्द पर भारी ..
मृत्यु और मिथ्या से मिश्रित जग में ,
प्रेम सदैव शाश्वत है...
कुछ आस थी कभी, कभी कुछ वहम था
एक दरिया सा और एक विशाल सागर सा
वो आस भी ले डूबी और वहम भी ले डूबा
कभी गहरी आग सा तो कभी गहरे पानी सा ...
पैसा इन्सान को ऊपर जरूर ले जाता हैं,
परंतु इंसान पैसे को ऊपर नहीं ले जा सकता....
सफलता चाहिए तो
खुद को बस में रखो ,दूसरों को नहीं !
हर दरबार में जाकर माँगा हैं तुम्हें, प्रसाद मिल जाता है पर तुम नहीं
"मेरे खेत की मिट्टी से पलता है तेरे शहर का पेट
मेरा नादान गांव अब भी उलझा है किश्तों में"
ये जीवन जिंदगी और मौत के….बीच का एक खूबसूरत सफर है…!!
सज गई मंडी वोटो की आ गए उनके चाहतदार...हाथ जोड़कर मांग रहे हैंबन जाओ उनके खेवन हार...🙏🥸निर्णय लेना सोच समझकर नानी दादी दादा और पापा महिला बहने भी याद रखना तुम्हारी बचत पर फिर से ना पड़ जाए छापा....!!😜
प्यार, मुहब्बत, ख्याल, एहसास, रिश्ते-नातें, तालुक, वास्ते, सब झूठ, बकवास…अगर इनमें से किसी एक का भी वजूद होता तो, मेरे पास जरूर होता!
प्रीत के पंछी हो,तड़पने से डरते हो?जब बारिश में निकले हो ,तो भीगने से क्यों डरते हो?
_अर्चना शर्मा
घास बड़ी होती हैतो आपस में दोस्त हो जाती है पेड़ बड़े होते हैं तो अकेले हो जाते हैं…..
~ लीलाधर जगूड़ी
में मिट्टी जैसे मैला, वो साफ़ जैसे रेत
मैं चाय जैसा साँवला, वो दुध जैसी सफेद !
कभी कभी ऐसा क्यों लगता है तू मेरा होकर भी जुदा सा क्यों लगता है ?माना तेरी भी कुछ मजबूरिया है पर ये तों बता ये जो तेरी हर आहट का इंतजार करता है ये शक्श आखिर तेरा क्या लगता...
खूब समझती है वो रूदन अपने लाल का,"मां" पृथ्वी पर साक्षात् भगवान होती है,
घर, समाज, ईश्वर किसी का उसे भय नहीं,अपनी औलाद में ही उसकी जान होती है,
और नहीं करती फिक्र कभी धूप - शीत की,हर आफत से बचा ले...
कह दो इन हसरतों से कहीं और जा बसें
इतनी जगह कहाँ है दिल-ए-दाग़दार में
उड़ा दो उस पंछी को जो आपके दिल में रह कर,,किसी और के साथ उड़ने का शौक रखता हो...!!