बेड़ियां बंधी हैं जिस्म पर, परिंदें नोच खा रहे हैं,
देख तेरे विरह में ये कैसे कैसे ख्वाब आ रहे हैं..!!
विरक्ति
सब्र जितना था कर लिया मैने,
अब तुम ना मिलों वही बेहतर है...
उन हाथों को कभी मत भूलना..
जिन्होंने तुम्हे बड़ा किया है..!!
सारा ज़माना जब खिलाफ था भूलो नहीमें आपके बाप के कंधे से कन्धा मिलाए खड़ा था
रोज़ नया दिन निकलता है पर सूरज तो वही हैएक चक्कर घूम के दुबारा आपके पास आता हैऔर नया हो जाता है
वैसे ही ये ज़िंदगी है जब आप चाहें उसे नया बना देअच्छाईयों के प्रकाश से इसको नई रौशनी देपुराने...
तेरे वास्ते फ़लक से मैं चाँद लाऊँगा, सोलह सत्रह सितारे संग बांध लाऊँगा"पर कच्छा खुद नही धोऊँगा.
सब गुज़र तो जाता है,
मगर सब भुलाया नहीं जाता...
जो भ्रष्ट होते हैं,
वो स्पष्ट नहीं होते हैं....
औरत ने जनम दिया मर्दों को..
मर्दों ने उसे बाज़ार दिया
जब जी चाहा मसला कुचला
जब जी चाहा घुत्कार दिया
अब तो ख्वाबों में आना छोड़ दो ,
कौन सा अब तुम्हारे साथ हैं !
तेरे साथ भी बर्बाद थे ,
तेरे बाद भी बर्बाद हैं !!
मुझको मजबूर न कीजिएगा अदाकारी पर ,
मैं जो किरदार में उतरा तो क़यामत होगी ..!!
शाम ख़ामोश है पेड़ों पे उजाला कम है
लौट आए हैं सभी, एक परिंदा कम है
फ़हीम जोगापुरी
वास्ता पड़ता है तो नस्लो का पता चलता हैं,
बातों से तो हर कोई खानदानी लगता हैं...
मैं नहीं जानता मेरी लाश को गिद्ध नोचेंगे या दाह संस्कार होगा,
मगर ये जानता हूं मुझे पढ़ने के बाद मोहब्बत का तिरस्कार होगा
वो आए बज़्म में इतना तो हमने देखा डायरी
फिर उसके बाद चिराग़ों में रोशनी न रही
मर चुका है दिल मगर जिंदा हूं मैं
जहर जैसी कुछ दवाएं चाहिए 💔
लड़ाई का उद्देश्य जीत होता है। संरक्षण में कोई संभव जीत नहीं होती।
इक़ अरसे बाद मिलना हुआ
उसने बस इतना ही पूछा था
आपका मिजाज कैसा है...!
बोल नहीं फूटे बस..आंखे भर आईं
वो जो कभी रुक नहीं पायेतुम्हारी तोहमतों से भीवो जो चुपचाप चलते रहेसौंधी मुस्कान लिए
वही प्रेमी हैं ..!
-मनीषा शर्मा
त्रुटियों के बीच में से ही सम्पूर्ण सत्य को ढूंढा जा सकता है।
सिगमंड फ्रायड