बेटे खुश ना भी हों तो कौनसा, घर वालों को पता चलने देते हैं....
"जिन्हें ईश्वर ने हृदय और परख दी है,
वे आदमियों की पोशाक नहीं देखते,
उनके गुण और चरित्र देखते हैं।"
मुंशी प्रेमचंद
ज़लील भी करो तो तरीके से,
ये तहज़ीब का शहर है….लफ्ज़ याद रखेगा तुम्हारे…!!
घर कैसा भी हो,
मां के बिना अधूरा ही लगता है...
सोचती हूं, खुद से इश्क करूं मैं अबऔर खुद में ही मुकम्मल हो जाऊं
इधर- उधर झांकने के बजाय,खुद के मायने समझ जाऊं मैं अब
किसी को अधूरा पाने से बेहतर है
उसे मुकम्मल खो दिया जाए ..!!
सौभाग्य न सब दिन सोता है,
देखें, आगे क्या होता है?
रामधारी सिंह दिनकर
जीवन अपूर्ण लिए हुएपाता कभी खोता कभीआशा निराशा से घिराहँसता कभी रोता कभीगति-मति न हो अवरूद्धइसका ध्यान आठो याम हैचलना हमारा काम हैइस विशद विश्वप्रहार मेंकिसको नहीं बहना पडासुख-दुख हमारी ही तरहकिसको नहीं सहना पडाफिर व्यर्थ क्यों कहता फिरूँमुझपर विधाता...
तेरे लौटने के इंतेजार में,तेरी यादों से मोहब्ब्त हो गई….
लगा के इश्क़ की बाजी सुना है दिल दे बैठे हो , मोहब्बत मार डालेगी अभी तुम फ़ूल जैसे हो ।।
कोशिश आखरी सांस तक करनी चाहिए, या तो लक्ष्य हासिल होता है या अनुभव
कोई चाँद कितना खफ़ा होता होगा,तुम्हें देखता होगा, फिर मान जाता होगा.
अपने संघर्ष को अपना जुनून बना लो..
जब तक वो तुम्हारी कहानी ना लिख दे..!!
जहाँ तुम मिलोगे,जाना बस वहीँ तक है…!
हम वहाँ हैं जहाँ से हम को भी
कुछ हमारी ख़बर नहीं आती
जब किसान के बेटे को गोबर में बदबू आने लग जाए तो समझ लो कि देश मे अकाल पड़ने वाला है। ~ प्रेमचंद
वक्त तराजू है जनाब •••
वो जो बुरे वक्त में आपनो का वजन बता देता है ....!!
मुद्दतों बाद उठाए थे पुराने काग़ज़.. साथ तेरे मिरी तस्वीर निकल आई है..!!
तुम्हारी तपन जला रही है,,,,,
वरना कब के बुझ गए होते ....
भला उनका भी बहुत कर रखा है,जिंनकी नजरों में आज हम गलत है।