वैसे तो बहुत बुरा हूॅं मैं लेकिन दो चेहरे नहीं रखता !!
खुद्दार दुश्मन के आगे नाक रगड़ देनामगर गद्दार दोस्त से फिर कभी हाथ मत मिलाना
तुम मेरी वो कमी हो,
जो कोई भी शख्स कभी पूरा नही कर सकता….!!
सस्ती लोकप्रियता की चाह और पैसों की भूख
सरेआम संस्कारों के साथ साथ जिस्म को भी नंगा करती है।
कुछ लम्हे ऐसे होते हैं,जो उम्र भर की याद बन जाते हैं,वो पल, वो वक्त, वो एहसास,दिल के सबसे करीब आ जाते हैं।
वो वस्त्र पर वस्त्र बदलते रहे..
और इधर प्रजा निर्वस्त्र होती गई
समझ के बाहर भी
एक दुनियाँ होती है,
जो दुनियाँ की समझ के
बाहर होती है l
छिप गई है हंसी चेहरे की,
माथे पर चिंता के निशान है,
ज़िम्मेदारियां जेब से बड़ी
और साथ सिर्फ़ स्वाभिमान है.
सच को कहाँ होती है तमीज़ बात करने की ,झूठों से सीखो कितना मीठा बोलते हैं …
एक बार ही बहकती है ये नज़रेकिसी को देख कर….ये इश्क है साहेब सौ बार नहीं होता …
ऊंची मीनारों पर बैठ जाने से, कबूतर कभी बाज नहीं बनते...
क्या इक स्त्री और पुरुष के आपसी मजबूत संबंधो मापदंड मूल स्तम्भ सिर्फ सम्भोग है,,,?क्या देह से देह का घर्षण ही उनका आख़री पड़ाव है,,,?
एक नींद जो पूरी नहीं हुई..
एक ख्वाब मुझे सोने नहीं देता..!!
जाने क्या बिगाड़ा है इस बनाने वाले नेहम बनते बनाते अनजान बन जाते हैं !!
मस्तमौला होकर जीना अपनी ज़िन्दगी,तुम परेशानियों से मत हारना,ज़िम्मेदारी कितनी भी परत चढ़ा दे सिलवटों की,कभी अपने बचपन को मत मारना..!!
तेरा तुझ को अर्पण..
क्या लागे मेरा..
जहा गलती न हो वहां झुको मत और ,
जहाँ इज़्ज़त ना मिले वहां रुको मत !!
मेरे दोस्तों नजर को बदलोतो नजारे बदल जाते हैंसोच को बदलो तोसितारे बदल जाते हैंकश्तियां बदलने कीजरूरत नहीं हैदिशा को बदलो तोकिनारे खुद-
पुरुष सफ़ल रहे जीवन में या असफल रहे... वो हर परिस्थिति में एक छली गई स्त्री या टूटी हुई स्त्री के जीवन को बदल सकता है उन्हें सकारात्मक कर सकता है और सहायता करने को तत्पर रहता है, परंतु स्त्री...
इल्म किसी भी यूनिवर्सिटी से हासिल करलो,
पर तजुर्बा वक्त की ठोकरों से ही हांसिल होगा।
『 𝐙𝐞𝐡𝐚𝐫𝐥𝐢𝐧𝐞 』