दोस्त कठिन है यहाँ किसी को भी
अपनी पीड़ा समझाना
दर्द उठे तो, सूने पथ पर
पाँव बढ़ाना, चलते जाना
सर्वेश्वर दयाल सक्सेना
थोड़ी सी आवारगी भी जरूरी है जिंदगी में,
कैद में रहकर परिंदे अक्सर उड़ना भूल जाते है।
अब हम जब भी आयेंगे,,
बस याद ही आएंगे..!!
तेरी मोहब्बत का असर दिखने लगा है, वतन नफरतों से नफरत करने लगा है !
चराग़ों को आँखों में महफ़ूज़ रखना बड़ी दूर तक रात ही रात होगी
बोले हुए अल्फाज़, गुजरा हुआ वक्त,
टूटा हुआ भरोसा, कभी वापस नही आता...
तनाव से केवल समस्या जन्म लेती है,
समाधान खोजना है तो मुस्कुराना पड़ेगा....
दुःख देखिएहम सब अकेले हैंफिर भी हमारे पास समय नहीं हैकिसी अकेले के लिए।
मांगने से प्रेम नहीं मिलता,
सिर्फ सहानुभूति मिलती है।
उदास लम्हों में बस चाहिए अकेलापनदिलासा देते हुए लोग ज़हर लगते हैं
अक्श समस्तीपुरी
भींगना तो है पर बरसात भी न हो, चाँद भी चाहिए और रात भी न हो
घर की जिम्मेदारियों से जब दब जाओगे,
क्या असर करती है चाय समझ जाओगे।
तुम परवाह करना छोड़ दो, लोग तकलीफ देना छोड़ देंगे।
जीवन एक ऐसा रंगमंच है,
जहां किरदार को खुद नहीं पता होता,
कि अगला दृश्य क्या होगा...
बाप मेरा राजा नहीं था लेकिन ,
पाला मुझे राजकुमार की तरह था ।।
उम्मीद कम रखिए,खुशियां बेहिसाब होंगी !
हर सुबह आपका ख्वाब आता है..आंख खुलने से पहले लबों पर..आपका ही नाम आता है….!!
अजीब सी मोहब्बत
मेरे हिस्से आयी है ,,,,
ना दुवा है
ना सलाम है
पता नही
महबूबा मेरी
किस से लड़
कर आई है,,,,,
यूँ तो सबसे करती है
हंस हंस कर गल्ला
बस मुझसे ही
अकड़ कर
मुह को फुलाई है
मैं नहीं जानता मेरी लाश को गिद्ध नोचेंगे या दाह संस्कार होगा,
मगर ये जानता हूं मुझे पढ़ने के बाद मोहब्बत का तिरस्कार होगा