भरोसा बहुत कीमती हैजिंदगी कम पड़ जाती है इसे कमाने में
जितना कम सामान रहेगा उतना सफ़र आसान रहेगा!
~गोपालदास नीरज
ये जादू तेरे इश्क का,
या मुझे नशा हो गया है,
तेरे सिवा हर शख्स क्यू
धुंधला सा हो गया है...!!!
खुद लड़नी पड़ती है जिंदगी की लडाई.. लोग साथ कम और ज्ञान ज्यादा देते है..!!
शायद इसलिए .."शायरी" इतनी "खुबसूरत" होती है...
कभी सच ..छुपा लेती है तो.. कभी "शख्स".....
सुन्दरता सस्ती चारित्र महंगा, घडी सस्ती समय महंगा....!!
अगर भाई से कुछ बांटना चाहते हो तो,विपत्तियां बांटो, संपत्ति तो सब बांटते हैं..!!
थोड़ा डुबूंगा, मगर मैं फिर तैर आऊंगा ,
ऐ ज़िंदगी,
तू देख, मैं फिर जीत जाऊंगा...
खुद से बेखबर हूंपता नही मैं कौन हूंदर्द है ज्यादाफिर भी मौन हूंइधर उधर मैंगलियों में फिरता हूंकोई पूछले गर इकबारकी मैं कौन हूंकह दूंगा ..खुद की तलाश में हूंभटकता मैं कोई राहीदीन दुनिया से भी बेखबर हूं शायद...
यूँ तो अमरोहा से मेरा कोई नाता ना था
फिर कमबख्त नामुराद मोहब्बत हुई
और उसपर सितम तुझ बेवफा से हुई
और हम खुद बे खुद
जॉन ऐलिया के मुरीद हो गए
नीर बहते है नयनो से नारी के,जब पीर सहा न जाए दिल के,
घास बड़ी होती हैतो आपस में दोस्त हो जाती है पेड़ बड़े होते हैं तो अकेले हो जाते हैं…..
~ लीलाधर जगूड़ी
जब सोच में मोच आती है
तब हर रिश्ते में खरोंच आती है. !!
आँखों में पानी रखो होठों पे चिंगारी रखोजिंदा रहना है तो तरकीबें बहुत सारी रखो।
सारे जग की उम्मीदों से
निज स्वार्थ बड़े जब हो जायें
पद हेतु, शत्रु के पाले में
कुछ मित्र खड़े जब हो जायें
तब दिल पर पत्थर रखकर
उनसे हाथ छुड़ाना पड़ता है
निज संबंधों को भूल
पार्थ को शस्त्र उठाना पड़ता है
फंस गया तुम्हारा...
न तो ईश्वर है न आत्मा होती है,
पुनर्जन्म भी नहीं होता है,
जो है बस यही जिंदगी है।
गौतम बुद्ध
ऐ खुदा लोग बनाने थे पत्थर के अगर,तो मेरे एहसास को शीशे सा न बनाया होता।
घुटन सी होने लगी उस के पास जाते हुए
मैं ख़ुद से रूठ गया हूँ उसे मनाते हुए
मेरा रूठना
तेरा मनाना मुझे
मेरा कहना
तेरा सुनना मुझे
मेरा समझाना
तेरा समझना मुझे
मेरा बेपरवाह होना
और तेरा जिम्मेदार
कहना मुझे
हाए...वो भी क्या
खुश़-फैमियां थी मेरी ।।
मत सोचो जिंदगी बोझ है
खुश रहो क्योंकि समस्या तो रोज है !!