बड़ा आदमी बनना अच्छी बात है
अच्छा आदमी बनना बड़ी बात है !!!
ऑॅंखे थक गई हैं आसमान को देखते देखतेपर वो तारा नही टूटता, जिसे देखकर मैं तुम्हें मांग लू!
ख़ामोशी को चुना है मैंनेक्योंकि बहुत कुछ सुना है मैंने!
ईमानदारी को धन से नफरत है
और समाज को ईमानदारों से।
मूर्ख से बहस करना गाल पर बैठे मच्छर को मारने जैसा है,
मच्छर मरे या ना मरे पर आपको थप्पड़ ज़रूर लगेगा।
लाचार है बीमार है सही से चल नहीं सकता,एक गरीब बिना मेहनत किये पल नहीं सकता,और जो खुद कांटे हैं उन्हें तक़दीर सुख भेजती है,वहीं मुफलिसी उम्मीद लिए सड़कों पर फूल बेचती है..!!
ये चार दिन की जिन्दगी, किस किस से कतरा के चलूं, खाक हूँ मैं…खाक पर…क्या खाक इतरा के चलूं...
एक वही शख़्श मेरी हर कहानी हर किस्से में आया…जो मेरा होकर भी , न मेरे हिस्से में आया..!!
स्वार्थ की बदबू मारने वाले मतलबी लोग…..
मतलब होने पर चंदन सी सुग़न्धित बातें करते है !!!
भूखे पेट तेज धूप में तपता बहुत है
गरीब का खून है साहेब ये सस्ता बहुत है
हज़ार चाहने वालों से,
एक निभाने वाला बेहतर होता है....
तेरी यादों की ख़ुशबू से हम महकते रहते है,
जब-जब तुझको सोचते है बहकते रहते हैं !!
रफ्फू ना कर इसे ए दर्जी खुदा के लिए
की दिल के सुराख से हवा खुश ग्वार आती है
चढ़ते हैं चढ़ाइयाँ बनाकर सीढ़ियाँ जिन काँधों पर,
फतह होते ही मंज़िल लतियाकर गिरा देते हैं लोग.
मुकेश को याद करते हुए...१०० साल {1923-2023}
आज कल हर इंसान के पास ई मेल है,
मगर इंसान का इंसान से कोई मेल नहीं है...
प्रेम तो आज भी उसी रुप उसी मिठास में है बस उसे निभाने वाला मनुष्य ही अधिक समझदार हो गया है।
राजेश गौरी
कपड़े और चेहरे अक्सर झूठ बोलते हैं,
इंसान की असलियत वक्त बताता है..
आपकी घड़ी को तो सुधारने वाले दुनिया में बहुत हैं, लेकिन आपके समय को सुधारने वाले सिर्फ़ आप हैं..!!
पैसा बोलता है लेकिन अफ़सोस,
कोई इसका ग्रामर चेक नहीं करता.