खुद से बेखबर हूं
पता नही मैं कौन हूं

दर्द है ज्यादा
फिर भी मौन हूं

इधर उधर मैं
गलियों में फिरता हूं

कोई पूछले गर इकबार
की मैं कौन हूं

कह दूंगा ..
खुद की तलाश में हूं
भटकता मैं कोई राही

दीन दुनिया से भी बेखबर हूं
शायद इसलिए ही मैं अब मौन हूं!