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World's Best Cow Hospital

शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हमआँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे

कुछ सफ़र ज़िंदगी के ऐसे होते हैं जिसमें पैर नहीं दिल थक जाते हैं...

समस्या का अंतिम हल माफ़ी है, कर दो या मांग लो...

छतरियाँ हटा के…मिला करो इनसे, ये जो बूँदें हैं ना,बहुत दूर से आती हैं।

चार चार बेटियां विदा हो जाती है खेल कूद कर, और बहुएं आते ही नाप देती है, कि घर बहुत छोटा है।

किसी के लिए इतना भी मत गिर जाना कीजिसके लिए गिरे हो वहीं उठाने से इंकार कर दे।

पतझड़ में सिर्फ़ पत्ते गिरते हैं, नज़रों से गिरने का कोई मौसम नहीं होता.....

अहमियत देने पर लोग इतराते बहुत है...

खुद को श्रेष्ठ खुद नही, औरों को करने दो खुद कहोगे तो मान नही अभिमान झलकेगा।

ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैंफिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं।

पिताजी के बाहर जाने पर मां कभी किवाड़ तुरंत बन्द नहीं करती थीं. खुली छोड़ देती थीं सांकल कभी कभी पिताजी कुछ दूर जाकर लौट आते थे कहते हुए.. कि कुछ भूल गया हूं और मुस्कुरा देते थे दोनों... मां ने सिखाया... किवाड़ की खुली सांकल किसी के लौटने...

इस दुनिया में ऐसे भी शैतान है, जो धर्म के नाम से सरकार बनाते है. !!

वक्त का खास होना जरूरी नहीं.... खास लोगों के लिए वक्त होना जरूरी है...!!

पुरानी शाख से पूछो कि जीना कितना मुश्किल है.., नए पत्ते तो बस अपनी अदाकारी में रहते हैं...!!!

घर ना जाऊं किसी के तो रूठ जाते हैं, गांवों में अभी वो तहज़ीब बाकी है...

ज़िंदगी बेहतर बनाने में ज़िंदगी को ही वक्त नहीं दे रहे है। कल की परेशानी के चलते आज को जी नहीं पा रहे है I

मन से उतर रहे हैं, दिल में रहने वाले...

वक़्त चाहे कितना भी बदल जाए ,..पर चाय से मोहब्बत नहीं बदलेगी…!!

उसूलों पर चलती हूँ , बेवजह कुछ ना कहती कोई बेवजह कहेगा तो चुप भी नहीं रहती।

सुना है तारीफ के पुल के नीचे…मतलब की नदी बहती है…..!!


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