मैं वो चिराग हूँ,जो आँधियों में भी रोशन था...खुद अपने घर की हवा ने,बुझा दिया है मुझे...
पानी और चरित्र कितना भी साफ क्यों ना हो,
लोग इन्हें मैला करने में कोई कमी नहीं छोड़ते....!!
जहां कद्र ना हो वहां खुद को मत बिखेरिये ,
बे-कद्रों को हीरा भी कांच ही नजर आता है !
दोनों की मोहब्बत जुदा जुदा कभी तू मुझसे कभी में तुझसे खफा ख़फ़ा,,,,आ लग जा गले मिलकर करें अपने दरमियान सारे मसले रफा दफा,,,,
बात सच्ची जो करते हैं,
खुल के जीना उनका दुस्वार है भाई।
फिर एक दिन वो लोग हमेशा के लिए सो जाते हैं ,
जिनको रात भर नींद नहीं आती !
बहुत कुछ चाहिए नहीं मुझे ,मुस्कुराने के लिए,तुम्हें मुस्कुराता हुआ देखूं,बस इतना काफी है मेरे लिए ।
_अर्चना शर्मा
जो झूठ पर भी वाह करेगा,
वो ही तुम्हें तबाह करेगा.
अब कोई मरहम काम नहीं करता उन ज़ख्मों पर, जो मुझे मेरी वफ़ा के बदले उससे इनाम में मिले थे..!!
खामोशियां कर दे बयां तो यह अलग सी बात है
वरना कुछ अल्फाज लफ्जों में बयां नहीं होते
मौत आज़मा रही थी परिंदे को,
ईश्वर भी करामात दिखा रहा था
दम तोड़ रही थी इंसानियत,
जब उसे इंसान मरना सिखा रहा था
उम्मीदें इंसान से लगा कर शिकायत ऊपरवाले से करते हो!
अँगूठीयों में कोयला जड़ा जा रहा हैहीरों की परख है अब अंधों के हाथ में
-अम्बष्ठ
छुड़ा के उंगली पापा ने सलाह दी, अकेले चला कर बेटे सहारे ठीक नहीं होते...
मुझे उम्र के उस पड़ाव तक तेरा साथ चाहिए,आखिरी निवाला हो मेरा हांथ तेरा चाहिए..!!
फिर यूँ हुआ कि वक़्त ने मसरूफ़ कर दिया ,
वरना हमारे पास ज़माने के ख़्वाब थे ।।
सच में अक्सर ऐसा होता
जब भी मेरे मन
और संघर्ष के बीच युद्ध होता है
सोचते अब लड़ के खड़ा हुए की
फिर लड़खड़ा के गिर ही जाते हैं
शायद यही असल ज़िंदगी का
यथार्थ मतलब है।
नेहा यादव
एक आँसू भी हुकूमत के लिए ख़तरा है
तुम ने देखा नहीं आँखों का समुंदर होना ।
मुनव्वर राना
भरोसा टूटा है वहम की सफाई मत दो
कहीं और जाकर मुंह मारो हमें सफाई मत दो
दोनों भाई बहनों को ऊंट भी चाहिए और राजस्थान भी नहीं जाना चाहते..शास्त्रों में इसे ही कूटनीति कहा गया है…