सकारात्मक विचार कड़वे जरूर होते हैं
मगर इनका परिणाम हमेशा सुखद होता है।
अजनबी बने रहने में सुकून हैये जान पहचान वाले जान ले लेते है
शराब तुम्हारा कुछ नहीं बिगाड़ेगी,
तुम एक शख्स के नशे में मरोगे..
जब तक मां नहीं उठती,
तब तक सभी घरों में अंधेरा रहता है !
दुआ के वक्त आंखों का भर आना,
कुबूलियत की सबसे बड़ी दलील है !!
तमाम उम्र रूटने मनाने
में गुजार दी,,,,
हमदर्द कहते है
जनाब गर जिंदगी में
लुफ्त चाहिए तों
इश्क कीजिये
वेदना मेरे हृदय में नासूर कर रही है,
ये खामोशियां मेरी चीखें रोक रहीं हैं..!!
विरक्ति
कर्म से डरिये…..ईश्वर से नहीं…..ईश्वर माफ़ कर देता है…..कर्म नहीं ….. !!!
अगर कभी वक़्त में उनसे मुलाक़ात होगीसिर्फ़ रस्म निभाने की शायद वो क़वायद होगीहँसी आती है मुझको अब दरमियाँ आयेवजहों पर ,के अब एक अजनबी बन कर पहचान होगी…
विरह कि आग में जल रही, अपनी ज़िन्दगी को खींच रहा हूं,
बंद हो चुकी अपनी प्रेमग्रंथ के, जज्बातों को सींच रहा हूं..!!
विरक्ति
अब भी पूरा भरा है मेरे भीतर
तेरे जाने के बाद का ‘ख़ालीपन’
देख तेरे "इंतज़ार" में आंखों ने "लहू" छोड़ा है,
"दुनिया" समझती है रगड़ने से "लाल" हुई हैं..!!
विरक्ति
अल्फाजों को बयां करना मुझे आता नहीं,
आंखों की उदासी पढ़ सको तो गले से लगाना..!!
आज कल हम अकेले ही रहते हैं,
खुद की सारी बातें खुद से ही कहते हैं.....
वो मंदिर भी जाती है ,वो मस्जिद भी जाती है
बेटा बीमार हो तो मां मजहब भूल जाती है
वही ज़िद वही हसरत,
ना दर्द-ए-दिल की कमी हुई
अजीब है मोहब्बत मेरी,
ना मिल सकी ना ख़त्म हुई
कुछ हंस कर बोल दो, कुछ हंस कर टाल दो,
परेशानियां तो बहुत है, कुछ वक़्त पर डाल दो।
ठोकरें खा कर भी न समझे तो मुसाफ़िर का नसीबवरना पत्थरों ने तो अपना फ़र्ज़ निभा दिया था !
सियासत को लहू पीने की लत है ,
वरना हमारे मुल्क में सब खैरियत है ।।
ज़िन्दगी तुम्हारे उसी गुण का इम्तिहान लेती हैजो तुम्हारे भीतर मौजूद है मेरे अन्दर इश्क़ था
~ अमृता प्रीतम