हम ही पत्थर के हो गये ये सोचके..
कि ज़िंदगी तो फूल बनेगी नहीं...!!
"समर शेष है, जनगंगा को खुल कर लहराने दो
शिखरों को डूबने और मुकुटों को बह जाने दो
पथरीली ऊँची जमीन है? तो उसको तोड़ेंगे
समतल पीटे बिना समर की भूमि नहीं छोड़ेंगे
समर शेष है, चलो ज्योतियों के बरसाते तीर
खण्ड-खण्ड हो गिरे विषमता...
है एक कर्ज जो हरदम सवार रहता है ,
वो माँ का प्यार है सबपे उधार रहता है।।
जीवन में हमेशा एक दूसरे को,
समझने का प्रयत्न करे परखने का नहीं...
अक्लमंद और बेवकूफ इंसान मे कोई फर्क
नही ये दोनो किसी के बाप की नही सुनते..!!
वह नास्तिक है, जो अपने आप में विश्वास नहीं रखता।
स्वामी विवेकानंद
हर किसी पर विश्वास कर लेना खतरनाक है,किसी पर भी विश्वास न करना बहुत खतरनाक है.
मैं क्या बताऊँ कैसी परेशानियों में हूँ
काग़ज़ की एक नाव हूँ और पानियों में हूँ
भारत भूषण पन्त
मैंने अपनी ज़िंदगी के सारे,महंगें सबक सस्ते लोगों से सीखे हैं….
जून कीझुलसती गर्मी के मध्य भी जो तुम आ जाओपीपल की घनीछांव के नीचेहम तुम दशहरी आम चखेंगे
आप का क़द नहीं आप की विनम्रता आपकों बड़ा बनाती है
उसे पता ही नहीं इंतजार का मतलब
क्योंकि मैं उसके पास कभी देर से गयी ही नहीं
सारा झगड़ा ही खवाहिशो का है ,ना गम चाहिए ना कम चाहिए ।।
अपने सपनों को साकार करने कासर्वश्रेष्ठ तरीका है कि आप जाग जाएं…
जिंगदी तू भी यूं बेवफा निकलीशिद्दत से चाहा मगर तू भी गैरो सी निकली
दे कर लबो पर ख़ुशी मेरेदिल में बेइंतेहा दर्द क्यों दे के गयी..!!
वाणी की मिठास अन्दर के भेद नहीं खोलती,
मोर को सुन कर कौन कह सकता है कि वह साँप खाता होगा।
अज्ञात
शत-शत दीप इकट्ठे होंगे
अपनी-अपनी चमक लिए,
अपने-अपने त्याग, तपस्या,
श्रम, संयम की दमक लिए।
ता उम्र के लिएं हाथ थामना होता है,ए पल दो पल का खेल नहीं होता...
कितना बचा के रखते हैं हम समाज में अपनी छवि को,
जबकि बचाना हमें हमारे विचारों और कर्मों को चाहिए
अर्चना अनिरुद्ध
जब प्रतिष्ठा बढ़ेगी तो निंदा का टैक्स तो चुकाना ही पड़ेगा...
निंदा से ना घबराएँ ये तो प्रगति की निशानी है...