नफ़रत के खेल में बस ख़ून है,
मुहब्बत करो, इसमें सुकून है।
मै लेखक हू लेकिन मै उद्दंडता नही लिखता,देश को पृथक करने वाली उग्रता नही लिखता,इंसान हू मै इसलिए हिन्दू मुस्लिम नही लिखता,हिन्दुस्तान के गौरव पर चोट करती अशिष्टता नही लिखता,और इश्क चाहती है मेरी कलम मै दुष्टता नही लिखता,मै द्वेष...
तुम्हारे जुल्मों का हिसाब लिखूं
सोच रहा हूँ
इश्क़ पर एक किताब लिखूं...
जाना पहले तय कर लेते हैं,लोग विदा बाद में लेते हैं.
सब लोग कहते हैं ..... " सीता और द्रौपदी के कारण हुई रामायण और महाभारत, किसी ने यह नहीं कहा नारी का सम्मान न करने अंत है रामायण और महाभारत " !!
हम तो पहले से बिगड़े हुए हैं,हमारा कोई क्या बिगाड़ लेगा !
जीवन बड़ा नीरस सा हो गया है,वापसी कि आस तेरी अब भी है.
भुला दिए जाने से ज़्यादा,आश्चर्य देता है अचानक याद किया जाना…
किताबें पढ़ो तो औरते कमजोर,
और दीवारें पढ़ो तो मर्द कमजोर...
आखिर कब तक किस्सा बनके रहोगे ,
जल्दी से हिस्सा भी बनजाओ मेरी जिंदगी का ..!!
यक़ीनन सूरज चढ़ेगाइस रात का रंग उतरेगा
रस्सी जैसी है ज़िंदगी, तने-तने से हालात है.,
एक सिर पर है ख्वाहिशें, दूसरे पर औकात है.!!
मैं झुक तो जाऊं, मुझे पता है मसला हल हो जाएगा,..मगर इससे मेरे किरदार का क़त्ल हो जाएगा…
थक गया हूं मेहमान की तरह घर जाते जाते,
बेघर हो गए हम चंद रुपए कमाते कमाते..!
शुक्रिया है जिंदगी यहाँ तक लाने के लिये,
यहाँ से अब मैं अकेला ही चला जाऊंगा…!!
तुम जिसे प्रेम करते हो
अगर उसको पूजने का भाव
मन में ना उठता हो तो
समझ लेना कि तुम्हारा प्रेम
प्रेम नहीं सिर्फ आकर्षण है।
ओशो
विधान को चुनना ज़ुबान को नहीं संविधान को चुनना अज्ञान को नहीं किसान को चुनना निशान को नहीं जवान को चुनना सुल्तान को नहीं ईमान को चुनना बेईमान को नहीं मुस्कुान को चुनना गुमान को नहीं मकान को चुनना मसान...
अहंकार का बस इतना ही सच है
दिल से जुड़े रिश्ते भी खा जाता है।
ना बाप का साया,
ना रिश्तेदार और ना ही कोई रहबर है,
सर पर कई जिम्मेदारियां ऊपर से मुफलिसी का कहर है..!!
अब रिश्ते भी नौकरी की तरह हो गए है,
बेहतर Offer मिलते ही लोग Change कर लेते है !