मै लेखक हू लेकिन मै उद्दंडता नही लिखता,देश को पृथक करने वाली उग्रता नही लिखता,इंसान हू मै इसलिए हिन्दू मुस्लिम नही लिखता,हिन्दुस्तान के गौरव पर चोट करती अशिष्टता नही लिखता,और इश्क चाहती है मेरी कलम मै दुष्टता नही लिखता,मै द्वेष...
मैं कियूं करूं तुम्हारी बातों पर गुस्सा, जब मुझे पता हैं की तुम्हारे पास दिमाग नही हैं...||
खुशियां बहुत सस्ती हैं इस दुनियां में
हम ही दूंढते है उसे महंगे लोगों और महंगी दुकानों में..!!
आपकी अकड़ अभी जवा हुई हैं कल परसों में ,हमारे तेवर बगावती है वर्षो से…
सवाल अहंकार का नहीं इज़्जत का रखोकोई लहज़ा बदले तो तुम रास्ता बदल लो!
मुकद्दर कि चोट ऐसी खाई थी मैंने,आज हर कदम पर फिसल रहा हूं,कभी झूठे सुख, तो कभी झूठी हंसी लिये,मैं किरदारों पर किरदार बदल रहा हूं..!!
मैं अपनी हर रात बस यूँ गुज़ार लेता हूँ ,
तुम्हारी यादों से चंद शब्द उधार लेता हूँ !!
ईमान बेचकर दौलत कमाने वालों से कह दो, फरिश्ते कब्रों में रिशवत नहीं लेते
जो जिंदगी बची है उसे मत गँवाइए
बेहतर यह है कि आप मुझे भूल जाइए
हम नास्तिक लोग इस धरती को स्वर्ग बनाना चाहते हैं,
और आस्तिक मूर्ख लोग काल्पनिक स्वर्ग के चक्कर में,
इस धरती को नर्क बना रहे हैं।।
चलो हकीक़त से थोड़ी मुलाक़ात करते हैं ,जितनी औकात बस उतनी ही बात करते हैं !!
सागर की अपनी क्षमता है
पर माँझी भी कब थकता है
जब तक साँसों में स्पन्दन है
उसका हाथ नहीं रुकता है
छीन लेते हैं रंगत चेहरे की,
बेटियों को जो बोझ समझते हैं,पहले छीन लेते हैं खुशियां उनकी,
फिर हंसने को कहते हैं..!!
शायरी को आज रहने दो ,
मुस्कुराहट की बात करते हैं ।।
रहता नहीं कोई भी मंज़र सदा
यहां हर ताल्लुक मुसाफिराना है !
कामयाबी में रफ्तार का होना बहुत जरूरी है
क्योंकि कछुआ सिर्फ कहानियों में जीतता है
काम करने वाला मरने से कुछ घंटे पूर्व ही वृद्ध होता है।
~वृंदावनलाल वर्मा
इश्क़ की इंतिहा ने क़ैस को मजनू बना दियाअपनी जां से गया लेकिन तारीख़ बना गया~आरिफ़
हर रिश्ता इसी कागज़ का गुलाम हैं..जिसे हम पैसा कहते हैं...
बहुत महंगा पड़ता है वो रिश्ता,जिसमे खुद को सस्ता कर दिया जाए…