मस्तमौला होकर जीना अपनी ज़िन्दगी,तुम परेशानियों से मत हारना,ज़िम्मेदारी कितनी भी परत चढ़ा दे सिलवटों की,कभी अपने बचपन को मत मारना..!!
अपमानित होने के बाद भी
जो शख्स आपसे जुदा नहीं हो रहा है
जरूरी नहीं कि वो बेशर्म ही हो
असलियत है कि उसकी जिंदगी में
आपका स्थान उसकी इज्जत से बढ़कर है
यानी कि उसके दिल में आपके लिये
इज्जत से कहीं ज्यादा...
उदास चेहरों को लूट लेती है दुनिया ,
जरूरी है हर हाल में मुस्कुराते रहना ..!!
वो सूफ़ी का क़ौल हो या पंडित का ज्ञानजितनी बीते आप पर उतना ही सच मान।
जो आप को बड़े क़रीब से,
जान लेते हैं एक दिन वही आप की जान लेते हैं !!
सुनो ये हकीक़त बहोत पुरानी है
चाय आज भी दिल की राजधानी है...
हमारे जीने का तरीका थोड़ा अलग है,
हम उमीद पर नहीं अपनी जिद पर जीते हैं
तन्हा होना नज़र अंदाज़ होने से बेहतर है।
ख़ैर अच्छा तो कुछ नहीं , पर जो हैं सही हैं ...
हमारे सारे सपने सच हो सकते हैं
अगर हमारा होंसला बुलन्द रहे तो
आज शाम है बहुत उदासकेवल मैं हूँ अपने पास।
~ भगवतीचरण वर्मा
जो मेरी ज़िंदगी की किताब का दस पन्ना भी न पढ़ा सका हो……. उसकी नज़रों में हम ख़ुदगर्ज़ नज़र आ रहे हैं……..
अपने हिस्से की क़िस्मत अपने हाथों से ही गढ़ लेंगे ,धीरे-धीरे ही सही मगर थोड़ा बहुत हम भी पढ़ लेंगे ।।
नौकरी नौजवानों के
जीवन का वह श्रृंगार है,
जिसके बिना समाज
का कोई भी अंग उन्हें सम्मान
की दृष्टि से नहीं देखता है।
आ गए ना तुम अपनी औकात पर..
मेरा मतलब है मतलब की बात पर..!!
आ देख मेरी आँखों के ये भीगे हुए मौसम,ये किसने कह दिया कि तुझे भूल गए हैं हम.
सुनसान रास्तों पर भी , ज़िंदगी ख़ुशगवार लगती है ,,जब मौजूद हो कुछ भटके हुए साये , लाजवाब बेशुमार लगती है ,,भीड़ थी आसपास बहुत कि उलझनें और उलझ गई ,, इसलिए ...छोड़ दिया सब कुछ ,, अब ना कोई...
आज ये दिल बेवजह ही खुश हैं
लगता है एक नया दर्द मेरे इंतजार में हैं