तड़प मेरे बेकरार दिल की कभी तो असर उन पे भी करेगी..... कभी तो वो भी जलेंगे इसमें जो आग दिल मे दहक रही है....
नियम के बिना और अभिमान के साथ
किया गया तप व्यर्थ ही होता है।
वेदव्यास
सन्नाटा इस कदर पसरा है जज़्बातों की मौत का,
अब तो तन्हाई भी मुझे सुनाई पड़ती है...!!
तेरे हुस्न को परदे की क्या जरूरत,,,
कौन होश मे रहता है तुझे देखने के बाद,,,
उठ मन्दिर के दरवाजे से,
जोर लगा खेतों में अपने;
नेता नहीं, भुजा करती है,
सत्य सदा जीवन के सपने।
स्वार्थ से ज्यादा ताकतवर इस दुनिया में कुछ नहींदो लोग जो एक दूसरे से नफ़रत में हैस्वार्थ उन्हें बांधे रखने का एक मात्र जरिया है!!
सुंदरता का अर्थ नग्नता नहीं,शिक्षा का अर्थ अंग्रेजी नहीं…प्रेम का अर्थ पाना नही…..!!
ये रविवार नही आसान
कपड़ो का दरिया है
धो धो कर सुखाना है.
तेरे अपने ना कर पायें तुझपर उपहास... तू कर कुछ ऐसा कि बन जायें इतिहास...!!
न हम-सफर न किसी हम नशीं से निकलेगा,हमारे पाँव का काँटा है हमीं से निकलेगा !
यह लड़ाई साझी थी...मुल्क से मुहब्बत साझी थीनफ़रत से लड़ाई साझी थी कभी-कभी जो होती थीवो हताशा साझी थी झीख...खीज...अनबनहंसी-बैठकीसब साझी थी और साझी रहेगी तुम्हारा हिस्साअब तुम्हारी यादें देंगी तुम्हारी यादेंसब में साझी रहेंगी
बातो की मिठास अंदर का भेद नहीं खोलती, मोर को देखकर कौन कह सकता है ये सांप खाता होगा..!!
अपने को साधारण आदमी मानना भी एक ताक़त है।
ऐसा आदमी असाधारणता के कोई फालतू सपने नहीं देखता,
और निराश नहीं होता, टूटता नहीं।
ना मोक्ष चाहिए ना स्वर्ग चाहिए मुझे अपने श्री हरि के चरण कमल चाहिए ❤
मैं केवल दो लोगों को ही सुंदर लगता हूं
मम्मी को और कपड़ा बेचने वालों को
कुछ लोग ऐसे मिले जिंदगी मेंसाथ बैठकर हंस गए और पीठ पीछे डंस गए
पुरानी शाख से पूछो कि जीना कितना मुश्किल है..,
नए पत्ते तो बस अपनी अदाकारी में रहते हैं...!!!
ज़िन्दगी के तजुर्बों में एक अनुभव ये भी सबसे काम का रहा,गोपनीयता को प्राथमिकता देने वाला हर इंसान नमक हराम रहा