जो मुश्किलों से मैंने सिखाया था उस को दोस्त उसने वो इश्क करके दिखाया किसी के साथ
अपनी ज़िन्दगी को मैं दीमक कि तरह बर्बाद कर दूंगा,
ज़िन्दालाश बनकर रहूंगा मैं, रूह को आजाद कर दूंगा..!!
बदनाम तो बस हमारे वहां के लोग हैंवरना माल फूंक के तो सारे काम करते हैं
पैसा इन्सान को ऊपर जरूर ले जाता हैं,
परंतु इंसान पैसे को ऊपर नहीं ले जा सकता....
वक्त भी कैसी पहेली दे गया
उलझने सौ और जान अकेली दे गया
तुम्हारी नूर के दीदार को ,कहाँ रोक पायेगा हिजाब।दिल मेरा कहता है,क्यों ना दे दूँ तुम्हें,जन्नत की हूर का ख़िताब।।
आप का क़द नहीं आप की विनम्रता आपकों बड़ा बनाती है
सच बोलूं तो तुम्हें ज्यादा जान नहीं पायाहां मगर समझ लिया था,की कोई अधूरी ख्वाहिश सी हो तुम
दुःख देखिएहम सब अकेले हैंफिर भी हमारे पास समय नहीं हैकिसी अकेले के लिए।
नरेश गुर्जर
ये चेहरे का गुस्सा महज एक बहाना है,
मेरी दुनिया मासूमियत का खजाना है!
मैं तो मुसाफ़िर हूँ, आया हूँ सैर करने यहाँ,
नफ़रत भरी दुनिया में न कोई घर बसाना है ¡!
मुमकिन नहीं मेरा पहले जैसा हो पाना
खुद को बहुत पीछे छोड़ आई हूँ मैं
रावण में लाख बुराई थी फिर भी उसके
राज्य में किसी स्त्री को निर्वस्त्र कर घुमाया
नहीं गया था
मेरे शौक तो छोड़ो मेरी ज़िद भी छोड़ो
मन को इतने टुकड़ों में बांटा है उसने
अब तो ज़रूरत भी मुझे ज़रूरी नहीं लगती..!!
हम नास्तिक लोग इस धरती को स्वर्ग बनाना चाहते हैं,
और आस्तिक मूर्ख लोग काल्पनिक स्वर्ग के चक्कर में,
इस धरती को नर्क बना रहे हैं।।
सागर की अपनी क्षमता है
पर माँझी भी कब थकता है
जब तक साँसों में स्पन्दन है
उसका हाथ नहीं रुकता है
हमारी हकीकत हमे ही पता है,
लोगों ने इस चेहरे को बस हसते हुए देखा है...
बिछी थीं हर तरफ़ आँखें ही आँखें
कोई आँसू गिरा था याद होगा
मैं दोस्ती का हर एक बढता हाथ चुमता हूं
बस एक शर्त है , बंदा नमक हराम ना हो
न हम-सफर न किसी हम नशीं से निकलेगा,हमारे पाँव का काँटा है हमीं से निकलेगा !
अपनी जिंदगी में Royal लोगों को नहीं,
बल्कि Loyal लोगों को अहमियत दीजिए...!!