सिपाहियों बैरिकेड लगवाओ
मेरे किसान आये हैं
मेरे किसान आये हैं
नुकीले भाले बिछवाओ
मेरे किसान आये हैं
मेरे किसान आये हैं
भक्तों गालियाँ बरसाओ
मेरे किसान आये हैं
मेरे किसान आये हैं
छल करोगे तो छल मिलेगा!!
आज नहीं तो कल मिलेगा!!
जिओगे जिंदगी सच्चाई से
तो सुकून हर पल मिलेगा..!!
तेरे वजूद से हैं मेरी मुक़म्मल कहानी,
मैं खोखली सीप और तू मोती रूहानी...!!
कितने हसीन नाज़नीन मिले तुम नहीं मिलेकुछ आप जैसे भी मिले पर तुम नहीं मिलेबारिश फिज़ा तुम्हारी पसंदीदा चाय भीमिलने के आसार तो लगे फिर भी तुम न मिले..
छत पर वॉक करने वाला मौसम है,
और छत से छलांग लगाने वाले हालात.
जीवन अपूर्ण लिए हुएपाता कभी खोता कभीआशा निराशा से घिराहँसता कभी रोता कभीगति-मति न हो अवरूद्धइसका ध्यान आठो याम हैचलना हमारा काम हैइस विशद विश्वप्रहार मेंकिसको नहीं बहना पडासुख-दुख हमारी ही तरहकिसको नहीं सहना पडाफिर व्यर्थ क्यों कहता फिरूँमुझपर विधाता...
उनकी गलतियों पर पर्दा डाल दिया
मैंने उसको दिल से निकाल दिया
दिक्कतों पर जितना ध्यान दोगे वो उतनी बढेंगी ,
समाधान पर जितना ध्यान दोगे वो उतने ही मिलेंगे ...
कचरा कहां तक टाला जाये,
पॉलिथीन कहां पर डाला जाये,
तू भी कीचड़ का चैंपियन है,
तैर जहां तक नाला जाये।
वक्त बहुत ही कीमती चीज होता है जनाबकभी इसको फालतू कार्यों में बर्बाद ना करें..
अफ़सोस हो रहा है तेरा हाल देखकर ,
तुझको भी मेरे बाद मोहब्बत नहीं मिली ।।
मुमकिन नहीं मेरा पहले जैसा हो पाना
खुद को बहुत पीछे छोड़ आई हूँ मैं
लिख देने से, कह देने से,
बोझ कहां ख़त्म होते हैं ...
मैं खुद की तस्वीरें अब नहीं खींचताकारण बचपन की यादे रुलाती है...
गाली तो नही देते हम पर इन गुप्तसूत्रों को बहुत गरियाने का मन कर रहा है
जब मोहब्बत जवान होती है
तो हर अदा एक ज़बान होती है
पीड़ा, अवसादों से रिश्ता जोड़कर, नाता खुशियों से तोड़ा था,
मोहब्बत में रूह को फना करके, मैंने अपनी जान निचोड़ा था..
मुझे ज्ञान मत दो सहाब
मेरा वक्त ख़राब है दिमाग नहीं
आप दुखो को गिनने बैठ जाओगे ,जाहिर है खुशियों की गिनती भूल जाओगे
पन्नों के परे भी है एक ज़िंदगी
सभी किरदार किताबों में नहीं होते