सुबह का मतलब केवल सूर्योदय नहीं होता,
यह सृष्टि की खूबसूरत घटना है,
जहाँ अंधकार को मिटाकर
सूरज नई उम्मीदों का उजाला फैलाता है।
'पागल औरत है' ये सुनकर भी,
औरत ने घर को घर ही बनाया पागलखाना नहीं।
नुमाइश करने से बढ़ नही जाता इश्क़, इश्क़ वो भी करते है जो इज़हार नही करते।।
हज़ारों जताने वालों सेएक निभाने वाला बेहतर है..!!
जिंदगी में रिश्ते खराब होने की एक वजह ये भी है,कि लोग जरा सा झुकना पसंद नहीं करते !!
हम खुद को बेच भी देते तो कम पड़ता, उसके खुशियों की कीमत इतनी ज्यादा थी
कमाने की सोचो ,जमाने की नहीं!
इक लंबे सफर से लौटकर सबकी खुद से मिलने की आस है
झूठ बोलते हैं सब.......
जो कहते हैं 'हम हमारे पास हैं '...!!
यही खशियत है जिंदगी की
कर्ज वो भी चुकाने पड़ते है जो लिए ही नही
गाली तो नही देते हम पर इन गुप्तसूत्रों को बहुत गरियाने का मन कर रहा है
हम भूख के पले बच्चे हैं
एक दिन आएगा हम सबकुछ खाएंगे
अब जब घर से निकले है
तो इतिहास लिखकर ही जाएंगे।
ज़ाकिर खान
थोडी आज़ादी थोडी पाबंदी
थोडा वक़्त थोडी चाहत
थोडे बादल थोडी बारिश
थोडी नादानी थोडी समझदारी
थोडा तुम थोडी मैं
बस और क्या चाहिए ??
मिलकर पूरा हम हो जायेंगे
ना थोडा बचेंगे ना पूरा
दोनों मिलकर आकाश भर में समाएंगे
फिर ख़्वाब सारे हकीक़त...
अच्छा सुनो तुम इश्क की बातें न किया करो मासूम हैं हम, तेरी बातों से बहक जाते हैं..
औरत होना इतना आसान भी नहींआधे ख़्वाब दिल में ही दफ़न करने होते है….
बेरोज़गार के लिए,
रोज़गार ही त्योहार होते हैं…
हम खाली किताब थेलोग आते गए सबक छपता गया
स्नेह के उत्तर में माँ शीर्ष पर है, पिता तो सदा प्रश्नों में आते हैं !
तेरे हुस्न को परदे की क्या जरूरत,,,
कौन होश मे रहता है तुझे देखने के बाद,,,
सन्नाटा इस कदर पसरा है जज़्बातों की मौत का,
अब तो तन्हाई भी मुझे सुनाई पड़ती है...!!
बेहिसाब उधड़ी पड़ी हैं ख्वाहिशों की चादरें
कोई दर्जी सलीखे का शहर में बिठाया जाए!