वो जो हर दर्द अपने दिल में छुपाए बैठा है
रो पड़ेगा कभी लगना आहिस्ता गले उसके
उम्र छोटी, किरदार हजार, अनुभव लाख पाए थे,
तक़दीर कि मिली ठोकर से हम शून्य पर आए थे..!!
विरक्ति
अदालत बन गई है जिंदगी,
रोज नए मामले दर्ज़ होते जा रहे हैं...
लाचार है बीमार है सही से चल नहीं सकता,एक गरीब बिना मेहनत किये पल नहीं सकता,और जो खुद कांटे हैं उन्हें तक़दीर सुख भेजती है,वहीं मुफलिसी उम्मीद लिए सड़कों पर फूल बेचती है..!!
सोचती हूँ मेहनत की कलम से.... ज़िंदगी की कहानी फिर से लिखूं...!!
वो इसलिएनहीं आती हैमेरे साथउसके मन में हैमेरे लिएविचित्र बात..!!हम जोलगाते हैंनए-नए ट्वीट पर पिक..!!उन्हें देखकर हीबदल गएउसके हालात..!!
ख़बर नहीं मुझको ये कौन सा दर्जाएइश्क़ है,कि लफ़्ज़ सब मेरे हैं और ज़िक्र बस तुम्हारा है।
हे मेरी माँ..आपकी छत्रछाया है ,न कोई मोह माया है ,बारिश से ज्यादा तो मुझको ,आपकी यादों ने भिगाया है…!!!!
घास बड़ी होती हैतो आपस में दोस्त हो जाती है पेड़ बड़े होते हैं तो अकेले हो जाते हैं…..
~ लीलाधर जगूड़ी
ये दुनिया है इधर जाने का नहीं,मेरे बेटे किसी से इश्क कर,मगर हद से गुजर जाने का नहीं ।
गांव बदलकर शहर हो रहे हैं,
और इंसान बदलकर जहर हो रहे हैं…
पिघल रही गलेशियर ...
दरारों को देखिए
बड़े बड़े चट्टान
टूटते देखिए
जलवायु परिवर्तन
मनुष्यता देखिए
अपने ही पैरों से
सकूं रौंदते देखिए
गगन चुंबी इमारत
आधुनिकता देखिए
छोड़ रहे दूषित वायु
परिवर्तन देखिए
विलुप्त जमी जंगल
मौसम देखिए
बेमौसम की मार
आफत देखिए ..!!
वो हमारे परिवार का दुःख कैसे समझेगा जिसका अपना कोई परिवार ही नहीं है !
उम्मीदों के जंजाल में उलझे हुए हैं,अपनी ही आंखों में खोए हुए हैं…
हज़ारों जताने वालों सेएक निभाने वाला बेहतर है..!!
कुछ लोग ऐसे मिले जिंदगी मेंसाथ बैठकर हंस गए और पीठ पीछे डंस गए
ब्रह्मांड केवल अपने सबसे मजबूत योद्धा
को ही सबसे कठिन लड़ाई देता है।
हैं ईश्क तो असर भी होगाजितना इधर है उतना उधर भी होगा…
हम पहुंचेंगे हर घर तक,
न्याय का हक़, मिलने तक!
गली, मोहल्ला, संसद तक
न्याय का हक़, मिलने तक!
सहो मत...डरो मत!
एक एक कर के कितनों ने छोड़ा नहीं पताइक साथ याद आते हैं सारे कभी कभी