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पूर्ण है श्रीकृष्ण, परिपूर्ण है श्रीराधे, आदि है श्रीकृष्ण, अनंत है श्रीराधे ।

फितरत से जो गिरगिट होता है राजनीति में वो फिट होता है ! लबालब भरा हो जो फ़रेब से किरदार वो बड़ा हिट होता है !

गलती पीठ की तरह होती है... औरों की दिखती है अपनी नहीं..!!

जब जब तुम ख़फा हुए हो मुझसे, तब तब ख़फ़ा हुई हूँ मैं खुद से 

अकेले बैठ कर तुमको कभी जब याद करता हूं , मैं रोना मुस्कुराना दोनो साथ करता हूं ..!!

जैसे जैसे उम्र गुजरती है हमें अहसास होता है कि माता पिता हर चीज़ के बारे में सही कहते थे!

कितनी भी जान छिड़क लो… बदलने वाले बदल ही जाते हैं!!!

कहानी शुरू हुई है तो खत्म भी होगी किरदार काबिल हुए तो याद रखे जाएंगे!

खामोशियां बे वजह नहीं होती ,कुछ दर्द आवाज छीन लिया करते हैं…

इन बारिशों से कह दो कहीं और जाकर बरसे ..... मुरशद ... इतनी रिमझिम तो रोज हमारी आँखों में होती है।।

गलतफहमियां तो होंगी रिश्ते में, तुम संभाल लोगे ना.. यूं तो वक्त मिलेगा नहीं कभी, पर तुम निकाल लोगे ना..!!

व्यवहार बदल जाता है , जब काम निकल जाता है ...

अनुभव से ही सत्य का पता चलता है, न कि विचार से !

मेरी आँखों में ये जो पानी है, तेरी आँखों की मेहरबानी है।

तीर्थंकर महावीर ने कहा-सोचो.शंका करो क्योकि सत्य केअनेक कोण होते हैप्रश्न करो.तब सत्य को पहचानोजरूरी नही कि वही शाश्वत सत्य है जो कभी किसी ने लिख दिया थामगर साथ ही हर बात में ‘शायद’ का ध्यान अवश्य रखना यही 'स्यादवाद...

हालातों के साज़ परपीड़ा के तार सेवेदना के स्वर लिखूँगा वक़्त की राह परज़िन्दगी की क़लम सेलम्हों की रफ़्तार लिखूँगा वैश्या की पीड़ा सेजिस्म के खरीददारों परमैं हवस के बाज़ार लिखूँगा तन्हाई के साये मेंअन्धेरे की क़लम सेमैं अपना संसार लिखूँगा..

अगर जिंदगी में खुश रहना चाहते होतो दूसरों के सुख और अपने दुखदेखना छोड़ दोजिंदगी में बहुत खुश रहोगे….

मेरे दिल मे मत झांकना धुंआ बहुत है , बची कुची ख्वाइशें जला रही हूँ मैं ।।

बचपन में आकाश को छूता सा लगता थाउस पीपल की शाखें अब कितनी नीची हैं

रिश्ते भी इमारत की तरह होते हैं , हल्की-फुल्की दरारें नज़र आए तो इमारत तोड़िये नहीं मरम्मत कीजिए !


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