काश मै कुछ लिख कर हटा देता ,
मैं लिखता जातिवाद और मिटा देता ...
हदों में रहोगे तो लिहाज देखोगे
पार कर ली तो फिर मिज़ाज देखोगे..
आदमी जब थक जाता हैस्त्री को ढुँढ़ता हैआदमी जब उब जाता हैस्त्री को ढुँढ़ता हैआदमी जब टुट जाता हैस्त्री को ढुँढ़ता हैइसे दुसरे तरीके से कहें तोथके टुटे और उबे हुऐ आदमी कोसिर्फ स्त्रीयॉ बचाती हैं..!!
ना जाने इतना दर्द क्यों देती है ये दुनिया
हसता हुआ इंसान भी दुआओं में मौत मागता है
मेरे सपने में भी कभी ऐसा संयोग नहीं होताकोशिश करता हूं, पर मुझसे योग नहीं होता।
प्रेम त्याग हैंप्रेम समर्पण हैंप्रेम सर्वस्व हैंगर,,,,प्रेम निस्वार्थ हैं..!!
नेता गरीबों कि बैसाखी के सहारे खुद के सिर पर ताज चाहते हैं,
कहलाते गरीबों के मसीहा हैं और उन्हीं को पैरों तले दबाते हैं..!!
विरक्ति
खुदा को मना रहे हैं लोग,
खुदा के बंदों का दिल दुखा कर !
लगाव कैसा भी हो,,आखिर मेंदुख का कारण हीं बनता है...!!
ज़िंदगी के सफ़र को एक नया मोड़ दो..
जो तुमको भूल जाए, तुम उसको छोड़ दो..!!
जिससे भी मिलोगे अधूरे मिलोगे.. ,
बहुत सारे तो तुम मेरे पास रह गए हो..!
बच्चों को जहां चूमती है वो
ठीक उसी जगह चूमती थी वो
संस्कारों में बस इतने बने रहना,कि कोई परवरिश तक ना पहुंचे…
मेरा दर्द भी इन मोतियों की तरह बिखरा पड़ा रहता हैं, धागे में पिरोने की कोशिश करूं तो धागे भी टूटने लगते हैं
आदमी जब थक जाता है
स्त्री को ढूँढता है
आदमी जब ऊब जाता है
स्त्री को ढूँढ़ता है
आदमी जब टूट जाता है
स्त्री को ढूँढता है
इसे दूसरे तरीक़े से कहें तो
थके,
टूटे,
ऊबे हुए आदमी को
सिर्फ़ स्त्रियाँ...
कुछ साल सुखों को ताक रखना पड़ेगा खुद को खुद की औकात पर रखना पड़ेगा।नीदें तुम्हें हर रात सुला देना चाहेंगी मगरतुम्हें पहरा किताब पर रखना पड़ेगा ।।
पूर्ण है श्रीकृष्ण, परिपूर्ण है श्रीराधे,
आदि है श्रीकृष्ण, अनंत है श्रीराधे ।