अन्याय हुआ हो चाहे जितना,आदर्शों पर रहे अटल। संत से कोमल हैं जो और वीर भी बेहद प्रबलबैशाखी की हार्दिक शुभकामनाएं
गरीब भूख से मर रहे हैं...अमीर शौक से मर रहे हैं !
तुम्हें गुरुर है तुम्हारा वक्त बोल रहा है!
हमें यकीन है हमारा सब्र बोलेगा!!
ठोकरें खा कर भी न समझे तो मुसाफ़िर का नसीबवरना पत्थरों ने तो अपना फ़र्ज़ निभा दिया था !
सूखे कपड़ों से नमी निकाल रहा है,
वो मुझमें कुछ यूं कमी निकाल रहा है।
https://youtu.be/8b9Rh9XHihw
न दिन होता है अब न रात होती हैसभी कुछ रुक गया हैवो क्या मौसम का झौंका थाजो इस दिवार पर लटकी हुई तस्वीरतिरछी कर गया है….
आज तो कलम ने भी
ताना मार दिया !
जब कोई पढ़ता ही नहीं
तो लिखते क्यू हों !!
मुकम्मल नहीं हुआ "इश़्क़",
इसलिए आज "शायर" बना बैठा हूं,
अपने कल के "हालातों" से हार कर,
मैं आज "कायर" बना बैठा हूं,
और हर "कसौटी" पर खरी उतरी वो,
तो "मोहब्बत" को क्या दोष देते,
मैं खुद "मुकद्दर" से चोट खा कर,
आज यहां "अधमरा" बैठा...
सवाल अहंकार का नहीं इज़्जत का रखोकोई लहज़ा बदले तो तुम रास्ता बदल लो!
मोहब्बत में काम आई कोई दवा न दुआ मुझे.
जब दे सकी शिफ़ा न किसी की दवा मुझे ...
हर लम्हा सांसें बुड्ढी हो रही है
जिंदगी मौत के साये में हैं फिर भी जिद्दी हो रही है
बेवफा को बेख़बर रखना मेरी मौत की खबर से
जमाने के लिए आंसू हैं वो अंदर हस रही है!!
जेब खाली होने पर टूट जाता है हर वो रिश्ता जो खास होता है ,
हाल पूछता है हर कोई जब पैसा आपके पास होता है...!!
घर वालों को ज़रूर बताइए उलझने अपनी,मर जाने से अच्छा है उनके लिए जिया जाए….
हर शख़्स को नहीं मिलती मंज़िल यहां,,,,
कुछ लोग जिंदगी भर मुसाफ़िर रह जाते है….!!
सब गुज़र तो जाता है,
मगर सब भुलाया नहीं जाता...
मैं जो कहता था बदलूंगा नहीं कभी खुद कोइन दिनों मैं उस पुराने लड़के को ढूंढ रहा हूॅं !!
एक तेरा दीदार मेरे सारे गमो को भुला देता है….
मेरी जिंदगी को जिंदगी बना देता है….!!
ये सोचना ग़लत है के’ तुम पर नज़र नहीं,मसरूफ़ हम बहुत हैं, मगर बे-ख़बर नहीं
हम आपके इशारे पे घर-बार छोड़ दें ?दीवाने हैं ज़रूर ! मगर इस क़दर नहीं !!
~ आलोक श्रीवास्तव
मुसाफिर है हम, मुसाफिर हो तुम भी
न जाने किस मोड़ पर फिर मुलाकात होगी...