किताबें इस लिए पढ़ो ताकि आप ,लोगों से बहस नहीं तर्क कर सको …
कुदरत ने हमें हीरा बनाया है,
बशर्ते जो घिसेगा वही चमकेगा…!
पतझड़ में सिर्फ़ पत्ते गिरते हैं,
नज़रों से गिरने का कोई मौसम नहीं होता.....
पिता वो दीपक है, जो खुद जल जाता है
और अपने बच्चे को प्रकाश देता है ।।
इश्क़ के तो साथ मसअला है ये
जान वफ़ादारों की ही लेता है
भावनाओं का कोई पार्थिव शरीर नहीं होता,
उनका बस अंतिम संस्कार होता है।।
मान ही लो अब जो भी कुछ है सच्चा झूठा सा,
कब तलक करते रहें दिल की वक़ालत हम ?
है एक कर्ज जो हरदम सवार रहता है ,
वो माँ का प्यार है सबपे उधार रहता है।।
कुत्ता को घी और मानसिक विछिप्त व्यक्ति को पॉवर नहीं पचता है ।
मेरी किताबों कि सबसे अच्छी कविता हो तुम…🍁
जो बर्बाद हो गए तेरे इश्क़ में, वो दिन मेरे पढ़ने लिखने के थे ,
मेरे मयार को गिराने का सोच भी मततेरे किरदार में इतना दम नहीं मेरे मयार को हिला भी सके.
हमारा खुद का एक रुतबा है,
आप कोई भी हो फर्क नहीं पड़ता
आज कल हम अकेले ही रहते हैं,
खुद की सारी बातें खुद से ही कहते हैं.....
आसमान जितना नीला है,
सुराजमुखी जितना पिला है,
पानी जितना गिला है,
लगता है स्क्रू उतना ही ढीला है. . .
बारिश तो और बढ़ गई, लगता नही आज थमेगी.
बरस जाएगी तो, अपने आप थम जाएगी...
गुलज़ार
इस दुनिया मे कुछ भी स्थायी नही है
यहाँ तक कि हमारी परेशानियाँ भी नहीं!
वर्तमान में
स्त्री का एक हिस्सा ,
उसके बहोत से हिस्सो पर
भारी पड़ रहा है ।
अपने लिए तो सभी जीते हैं,
दूसरों के लिए जीना ही असली जिंदगी है।।
कहां से लायी हो इतनी खूबसूरत आंखें…सारे जहां की खूबसूरती समेटे हुए..कौन कहता है कि छोटे कपड़ों में ही सुंदर दिखा जा सकता है.. मर्यादा , संस्कारों में रहकर पूरे कपड़ों में भी सिर्फ आंखों से ही चांद सी खूबसूरत...