मैंने ख़त लिख रखा है आँखों मेंआप नजर मिलाकर पढ़ो तो सही
जिंदगी में गम बहुत है,खुलासा मत होने देना,
लबों से मुस्कुरा देना,मगर तमाशा मत होने देना..!!
जिम्मेदारी वो पिंजरा है..
जहां इंसान आजाद होकर भी कैद है..!!
रोज़ अच्छे नही लगते आँसू खास मौको पे मज़ा देते है..!!
हाय वो जिम्हें देखा भी नही याद आये तो रुला देते है..!!
आग अपने ही लगाते हैगैर तो सिर्फ हवा देते है…!!
बदल गए हैं मायने अब रिश्तों के..
अब हर रिश्ते का मतलब,
सिर्फ़ "मतलब" है..
छोड़ न देना हमें राह-ए-मोहब्बत में.... ज़माना बड़ा तलबगार है, हमें तन्हा देखने के लिए..!!
उठते हुए तूफ़ान का मंज़र नहीं देखा
देखो मुझे गर तुम ने समुंदर नहीं देखा
पानी की बूंद जब
समुन्दर में होती है
तब उसका कोई
अस्तित्व नहीं होता,
लेकिन जब वो बूँद
पत्ते पर होती है तो
मोती की तरह चमकती है।
आपको भी जीवन में
ऐसा ही मुकाम हासिल करना है।
हमेशा मोती की तरह चमको...
सबने कहा अच्छे से जाना
सिर्फ मां ने कहा बेटा घर जल्दी आना
वो जो हर दर्द अपने दिल में छुपाए बैठा है
रो पड़ेगा कभी लगना आहिस्ता गले उसके
परत चढ़ी है लाचारी की, आंखों से बहती अश्कों कि धार है,
सिकुड़ रही हैं आंतें भूख से, लेकिन मिलती सिर्फ दुत्कार है..!!
"उम्मीद" ही होती है शायद गम की वजह….वरना ख्वाहिशें रखना कोई "अपराध" तो नहीं..!
बलात्कार को 'पाशविक' कहा जाता है , पर यह पशु की तौहीन है, पशु बलात्कार नहीं करते। सुअर तक नहीं करता, मगर आदमी करता है।
हरिशंकर परसाई
मैंने अपनी पीड़ा किसी को नहीं बताई, क्योंकि मेरा मानना है कि व्यक्ति में इतनी ताकत हमेशा होनी चाहिए कि अपने दुख, अपने संघर्षों से अकेले जूझ सके
मेरा दुख दर्द महज़ आपके लिए,मनोरंजन एवं बकवास का विषय है.
जैसा दिल बनाया है, काश वैसा ही नसीब भी बना देता मालिक।।
देखे होंगे आपने महोबत्त के लाखों सपने,
हमने तो बस महोबत्त से आपको देखा है…!!
कुछ देर की ख़ामोशी है फिर शोर आएगा
तुम्हारा सिर्फ़ वक़्त आया है हमारा दौर आएगा।
पेट का कोई धर्म नहीं होता,राजनीति तो भरे पेट वाले ही करते हैं…
ज़िंदगी के रास्तों मेंखुद से चलने,गिरने,उठने,का हुनर सीख लो,क्यूॅंकि सहारे कितने भीभरोसेमंद क्यूॅं न हों,एक न एक दिन साथछोड़ ही जाते हैं!!!