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प्रेम और आदर का सानी देना पड़ता है रिश्तों को भी थोड़ा पानी देना पड़ता है।

किताब के पन्ने की तरह मोडे गए फिर ना कभी खोले गए ना पढ़े गए

मोहब्बत कहीं न कहीं अपनी हम-ख़्याल पसंदीदा रूह के साथ सारी उम्र , बिना उकताये हम-कलाम होते रहने का नाम है .!!

की गैर तो गैर है गैरों से गिला क्या.. अपने तो अपने हैं अपनों से मिला क्या..!!

बुरा वक़्त हमेशा इंसान को ,अकेला कर देता है …

बुरा व्यक्ति उस समय और भी बुरा हो जाता है, जब वह अच्छा होने का ढोंग करता है।

आ मत जाना अब हम संभल गये हैं , यूँ बिखरने का हौंसला बार-बार नहीं होता...

"माँ थी अनपढ़ लेकिन उसके पास गीतों की कमी नहीं थी कई बार नये गीत भी सुनाती रही होगी एक अनाम ग्राम-कवि" आलोक धनवा

हवाएँ ज़ोर कितना ही लगाएँ आँधियाँ बन कर मगर जो घिर के आता है वो बादल छा ही जाता है

बहुत लोग हमसे पीछे हैं,इसका मतलब यह नहीं कि हम आगे हैं.. !!

आप की सब से बड़ी दौलत आप का वक़्त है जिसे भी दे रहे हो बहुत सोच समझ कर देना !!

किताबें हमें रोटी नहीं देतीं लेकिन यह बताती ज़रूर हैंकि हमारे हिस्से की…….रोटी कौन खा रहा है !!

कहने को सभी अपने है लेकिन सिर्फ़ कहने को …..!!!

मेरा बुरा वक्त क्या आ गया आज अंधों को भी मेरे में कमियां दिखने लगी!!

जिनके पास मुलाकात का कोई रास्ता नहीं वे आँख बंद करके एहसास कर लिया करते हैं...

थोड़ा और ज़ोर लगा ले और थोड़ा दर्द भी सह ले देखना दम नहीं तोड़े तेरी कोशिशें मक़ाम पर पहुँचने से पहले

मुझे अकेले चलेने में बहुत मज्जा आता है, क्योंकि ना कोई आगे चलता है और ना कोई पीछे छूटता है…

हर रिश्ता इसी कागज़ का गुलाम हैं..जिसे हम पैसा कहते हैं..

याद रखना सपने तुम्हारे है तो पुरे भी तुम ही करोगे , न तो हालात तुम्हारे हिसाब से होंगे और न ही लोग !

जो कुछ भी हूॅं पर यार गुनहगार नहीं हूॅं, दहलीज़ हूॅं दरवाजा हूॅं पर दीवार नहीं हूॅं !!


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