किसी भी मौसम में खरीद लीजिए जनाब
मोहब्बत के ज़ख्म तरो - ताज़ा ही मिलेंगे
रिस्तो का आलम अब कुछ ऐसा है
हाल भी पूछते है तो चाल लगता है
मैंने कब चाहा कोई मेरे साथ चले,
"कहा ज़रूर
तुम्हारी तपन जला रही है,,,,,
वरना कब के बुझ गए होते ....
जो जवाब वक्त पर नहीं मिलते,
अक्सर वो अपने मायने खो देते हैं।
कर्ज़ उतर जाता है
एहसान नहीं उतरता।
व्यक्ति पर अहंकार तभी हावी होता है,जब वह अपने को सर्वज्ञ समझ लेता है…
पवित्रता किस को रास आती है यहाँ जनाब ,
सब के सब "जिस्म"के कीचड़ में "इश्क़"ढूंढते हैं.
ज़मीर हमेशा सच्चाई से महकते रहना चाहिए ,
क्यूंकि कागज़ के फूलों पर तितलियां नहीं बैठा करती!
कुछ पन्ने क्या फटे जिंदगी की किताब के,
जमाने ने समझा हमारा दौर ही ख़त्म हो गया...
पैसा बचाने पर ध्यान मत दीजिए,
बल्कि ज्यादा कमाने पर ध्यान दीजिए...
तुम मुझे इतना भूल जाना की तुम जी सको ,मैं तुम्हें इतना याद रखूगा की मैं जी सकूं...
नियम के बिना और अभिमान के साथ
किया गया तप व्यर्थ ही होता है।
वेदव्यास
आज की सुबह खास है बादल का वो टुकड़ा बारिश के साथतेरी यादों की फुहार भी लाया है मैं खुद को आज सींचूँगीमन में बसी विरह की तपिशको इन गिली बूंदो सेकुछ नयी कलियाँ कुछ नये सपनेकुछ नये से तुम...
आखिर में ज़िंदगी चंद सवाल,
और कुछ जवाब बनकर रह जाती हैं...
तुम बदले तो गम भी कहाँ पुराने से रहे,तुम आने से रहे तो हम भी बुलाने से रहे ।।
फकीरों की सोहबत में बैठा कीजिए साहब!!
बादशाही का अंदाज खुद ब खुद आ जाएगा...
काश ये सिर्फ शायरी ना होकर हकीकत हो जाती,
जी भरकर देख लेता तुझे अश्कों की बरसात हो जाती..!!
विरक्ति
हटा पतझर के पहरा, तनिक मधुमास आवे द
उदासल मन का देहरी पर, किरिन सविलास आवे द।
कसक एतना, मसकि जाता करेजा, दर्द अइसन बा
जिये के होसिला लेके, नया उल्लास आवे द।
झुकल आकास देखता, घुटन से जिन्दगी ऊबल
चुकल एहसास, बिनती बा, नया...
यादों के सिलसिलेकभी छूटे ही नहींभूल तो गए हम सबपर तुम्हें भूले ही नहीं…