आत्मबल को भेदती इस तीक्ष्ण गर्मी में, मानसूनी बारिश की पहली फुहार हो तुम...
खुद में ढूंढता हूं दुनिया भर की खुशी ,
दुनिया में ढूंढना महंगा सौदा होगा यही..!!
दिल में बसी मोहब्बत
अब आंखों से बह गई है....।।
मिलती नही है सादगी,
मुुश्किल बड़ा ये काम,
मिल जाये जब ये सादगी,
मिलते नही है दाम
जीत के सौ बाप होते हैं और हार अनाथ होती है।
“ये फ़र्ज़ रहे ध्यान में,लिखा है संविधान में,अगर कोई भी बात,तेरा मन गई कचोट कर,तू वोट कर,ये प्रश्न तेरे बल का है,सवाल तेरे कल का है,समय ये फ़ैसले का फिर से,आ गया है लौट कर,तू वोट कर”
ये दुनिया नफ़रतों के आख़री मुक़ाम पे हैं,इलाज इसका मोहब्बत के सिवा कुछ भी नहीं हैं…
किसी को अधूरा पाने से बेहतर है
उसे मुकम्मल खो दिया जाए ..!!
अपने अहंकार में चूर होकर,
जो सबका बाप हो जाता है,
उस तुच्छ के लिये अमरत्व का वरदान भी श्राप हो जाता है..!!
ये दो शब्द जीवन को नष्ट कर देते है..पहला "अहम" और दूसरा "वहम"…!!
मोहब्बत क्या है,हाथों में चूड़ामांग में सिंदूरगले मे मंगलसूत्रऔरमहबूब की वफादारी।
मिलकर सबसे रहो,
दबकर किसी से नही।।
प्रेम सरल है.. जटिल उसे अपेक्षाएं बना देती हैं..!!
विनय विफल हो जहाँ, बाण लेना पड़ता है।
स्वेच्छा से जो न्याय नहीं देता है, उसको
एक रोज आखिर सब-कुछ देना पड़ता है।
इक्का चाहे कितना भी उछलें..
हुकुमत तो बादशाह ही करता है..!!
जितना भी सही किया..
सब गलत लोगों के लिए किया..!!
ज़िंदगी जोड़ घटाव से नहीं, प्रेम और लगाव से है।
व्यवहार सबसे रखो मगर.... लगाव हर किसी से नहीं...!!
जान लेनी थी तो साफ़ कह देते,
क्या ज़रूरत थी मुस्कुराने की
नफरत का बाज़ार ना बन, फूल खिला तलवार ना बन,रिश्ता रिश्ता लिख मंज़िल, रस्ता बन दीवार ना बन- राहत इंदौरी