"उम्मीद" ही होती है शायद गम की वजह….वरना ख्वाहिशें रखना कोई "अपराध" तो नहीं..!
समय कई जख्म देता है इसलिये...घडी में फूल नहीं काटे होत है...!
न दिन होता है अब न रात होती हैसभी कुछ रुक गया हैवो क्या मौसम का झौंका थाजो इस दिवार पर लटकी हुई तस्वीरतिरछी कर गया है….
लिबास की कमी गरीब के तन पर अजीब लगती है,मगर अमीर बाप की अर्धनग्न बेटियां तो शरीफ लगती है...
रास आ जायेगा एक रोज़ तेरा जाना भी ,
हम किसी दुःख में लगातार नहीं रोते हैं ।।
भावनाओं का कोई पार्थिव शरीर नहीं,
होता उनका बस अंतिम संस्कार होता है....
सनकी
जिंदगी से एक सबक मिल गया है,अकड़ में रहोगे तो लोग औकात में रहते हैं !
आंधियों को आख़िर ज़िद छोड़ना पड़ादम उनका निकाल दिया इक चराग़ ने
चार चार बेटियां विदा हो जाती है खेल कूद कर,
और बहुएं आते ही नाप देती है, कि घर बहुत छोटा है।
बड़ी मुद्दतों के बाद लगा कोई मिला है मुझेपर ये तो ख़्वाब था ख़्वाब से गिला है मुझे.।
-नेहा यादव
घुटन सी होने लगी उस के पास जाते हुए
मैं ख़ुद से रूठ गया हूँ उसे मनाते हुए
नींदें वापस कर दी हमने,,सुकून भरी रातों को।
किताबों के संग ' हर रात बितानी थी, आँखों को।।
सेजल
वक्त और टीचर में थोड़ा सा फर्क होता है ,
टीचर सीखा कर इम्तेहान लेता है
और वक्त इम्तेहान लेकर सिखाता है ...
खुद में ढूंढता हूं दुनिया भर की खुशी ,
दुनिया में ढूंढना महंगा सौदा होगा यही..!!
नाराज़ हो जाते हैं अब वो साहब
जब जवाब हम उन्हें उनके ही लहज़े में देते हैं
लाख समझाया था उसको की दुनिया विश्वास के लायक नही हैफिर भी उसने मुझे छोड़ थामा किसी गैर कोअब वो खाए लाख ठोकरें मुझे उसका हाथ थामना ही नहीं हैजेहन में रहेगा ताउम्र वो हां ज़िंदगी में अब मुझे उसको...
मनुष्य के आगे कुछ बड़ा नहीं,
हारा वही जो लड़ा नहीं....
लगता होगा चांद बहुत खूबसूरत है ,मगर लोगों ने तुम्हें देखा ही कहां है ।।
होंगे तुम्हारे शहर में तुम्हारी खूबसूरती के चर्चे ,हमारे गांव में तो हमारी सादगी मशहूर है..