कबीरा खड़ा बाजार में, सबकी मांगे खैर,न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर।
मैं जिसे ओढ़ता-बिछाता हूँ,
वो ग़ज़ल आपको सुनाता हूँ।
एक जंगल है तेरी आँखों में,
मैं जहाँ राह भूल जाता हूँ।
दुष्यंत कुमार
बहन बाक़ी तो सब ठीक है पर जब हम चन्द्रमा पर रहने लगेंगे...
तब करवा चौथ का व्रत किस को देख कर खोलेंगे...??
मुसीबत में भी रास्ता निकाल लेते हैं..
वक्त कैसा भी हो मां बाप संभाल लेते हैं..!!
मसला ये नहीं की लोग परवाह क्यों नहीं करते,
मुद्दा ये है की हम उम्मीद क्यों करते हैं...
मुझसे ही क्यो पूछते हो सब, उनके बारे में, कभी उनसे भी पूछ लिया करो, मेरे बारे में...
दुनिया में दो तरह के लोग होते हैं
मेरी तरफ़ से दोनों भाड़ में जाएं
मुझसे मेरे मिजाज़ का आलम न पूछिये ,
क़ातिल को ख़ुद दिया है हमने कलेजा निकाल के ..!!
किसी की गुलामी से लाख बेहतर हैं,
अपनी अपाहिज ज़िंदगी जीना...
मेहनत तो हर फिल्ड में करनी पड़ती है
बेकार पड़े रहने से लोहे में भी जंग लग जाती है
'आज का प्रत्येक संवेदनशील व्यक्ति प्रेम का भूखा है।'
~ मुक्तिबोध
लग चुकी है मनजिल कि तलब खुद को आग में झोंक देंगे,,मुश्किलें कहता है मारा जाएगा, हौंसले कहते हैं देख लेंगे..!!
कोई ग़म तेरी मोहब्बत में पराया ही नहींवो भी आए हैं जिन्हें मैंने बुलाया नहीं !!
हालातों के साज़ परपीड़ा के तार सेवेदना के स्वर लिखूँगा
वक़्त की राह परज़िन्दगी की क़लम सेलम्हों की रफ़्तार लिखूँगा
वैश्या की पीड़ा सेजिस्म के खरीददारों परमैं हवस के बाज़ार लिखूँगा
तन्हाई के साये मेंअन्धेरे की क़लम सेमैं अपना संसार लिखूँगा..
"जिंदगी में इतना काबिल बनो" कि भगवान किसी गरीब की मदद करने के लिए तुम्हारी जेब का इस्तेमाल करें !
जिंदगी अपने रफ्तार से चल रही हैं, हम अपनी रफ्तार से चल रहे हैं, और समय........? वो तो बस मजे लिए जा रहा हैं।
ऐ खुदा, मेहनत कि दो रोटियों पर ये तेरी कैसी खुदाई है,
जिम्मेदारियों को बीच में छोड़ एक गरीब ने जान गंवाई है..!!
मेहनत एक ऐसी " मधुमक्खी" है,
जो बिना फूलों के कामयाबी का शहद चखा देती है।