लहू रिसने नही देता कभी जो अपने अंदर से ,ज़माना सोचता है वो ज़ख़्म ताज़ा नहीं होता!बस आंखों की उदासी खोलती है राज ए दिल वरना ,मेरे चेहरे से मेरे गम का अंदाज़ा नहीं होता!
यक़ीनन सूरज चढ़ेगाइस रात का रंग उतरेगा
जब भी कोशिश करता हूं अपनी मौत टालने की, वो किसी ना किसी बहाने सामने आ जाती है..!!
प्राण देना प्रेम नहीं...किसी के प्राण बन जाना प्रेम है...।
नूर दिखेगा नही चहरे पर
ना होगी चमक आंखों में
एक दफ़ा आईने में देखो खुद को
कितना फरेब छुपा है बातों में
कितना,और कितना बोलोगे झूठ ख़ुदसे...
हो ही नही सकता की खुशी मिलती हो खैरातो में
स्वीकारो तो...
अभी भरा नहीं था गम पति के जाने का,
उससे पहले रिश्तेदारों ने बेघर कर दिया,
भरे नहीं थे घाव एक मां कि चूड़ी टूटने के,
बच्चा बड़ा होने से पहले उन्हें लावारिस कर दिया..!!
बेहद ना हो तो चाहत कैसी
जान पर ना बन आए तो मोहब्बत कैसी...!!
टूटते हुए रिश्तों को बचाइए,
बिना बुलाए अपनों के घर जाइए,
फल-मिठाई ना सही,
कम से कम टमाटर ही ले जाइए।
तुम मिल सको तो मिल लेना,
कुछ कह सको तो कह लेना...
मैं जी नहीं पाया जुदा होकर तुमसे,
तुम जी सको तो जी लेना...
बस सफ़र के मज़े लो,
मंजिल सबकी मौत है.....
अदाओं का खेल है बहुत सारा.
कुछ लोग ज़िस्म पर भी मरते होंगे.!
न हम-सफर न किसी हम-नशीं से निकलेगा
हमारे पाँव का काँटा हमीं से निकलेगा...!!
एक बार तुम्हारे भीतर का गुलाम गायब हो जाए,
तो तुम बादशाहों के भी बादशाह बन जाओगे
मेरे होते हुए मेरे रूम का कोई भी,मच्छर रात को भूखा नहीं सो सकता है !
अधूरे प्रेम का बोझ लिए जीनाअनायास आयी मृत्यु के दुख से ज्यादा दुखदायी होता है
जो मेरे ख़यालात से रूबरू नहीं, वो मेरी मोहब्बत के लायक नहीं.
हादसे इंसान के संग,मसखरी करने लगे…!लफ़्ज़ कागज़ पर उतर करजादूगरी करने लगे… !क़ामयाबी जिसने पाई,उनके घर तो बस गये…. !जिनके दिल टूटे वो आशिक़,शायरी करने लगे….!!
बहते पानी की तरह रहोगेतो कचरा ख़ुद किनारे हो जाएगा !
इतना कुछ था दुनिया में
लड़ने-झगड़ने को
पर ऐसा मन मिला
कि ज़रा-से प्यार में डूबा रहा
और जीवन बीत गया
जिनको विरासत में सब कुछ मिल जाता है, वे संघर्ष का वास्तविक अर्थ ही नही समझ पाते हैं!!
अनवर चतुर्वेदी